IS CHHOR SE US CHHOR TAK
(0)
Author:
SUSHANT SUPRIYPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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Collection of short stories
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Collection of short stories
Book Details
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ISBN9789388799331
-
Pages112
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: सप्तला' मे मैथिलीक स्थापित आ समर्थ कथाकार लोकनि संकलित भेल छथि। संग्रह मे अनेक रूप, रंग आ स्वाद वला कथा अछि। कथा सभ समकालीन यथार्थक विभिन्न परिप्रेक्ष्य उपस्थित करैत अछि। वर्तमान मानवीय संकट केँ उत्कृष्ट कलात्मकता प्रदान कर'वला ई कथा सभ अपन विकासक ग्राफ सेहो प्रस्तुत करैत अछि। संग्रहक कथा सभ मानवतावादी दृष्टिक माला मे गाँथल नयनाभिराम फूल अछि। —सुभाष चंद्र यादव 'सप्तला' मे 'अंतिका' पत्रिकाक विभिन्न अंक मे, प्राय: दू दशकक कालखंड मे, छपल कथा सभ संकलित अछि। अपन विविधता मे आ संगहि अपन एकनिष्ठता मे मैथिली कथाक एहि कालखंडक रचना सभ केँ ई संकलन अपन पूर्ण ऐश्वर्य संग परसैत अछि। अपन कथ्यरूप मे विविधता नेने ई संग्रह, मैथिल लोकक, ओकर चिन्ताक आ ओकर जीवन-संघर्षक बानगी निधोख रूपें आ करुणाक संग प्रस्तुत करबा मे एकनिष्ठताक बानगी स्थापित करैत अछि। एक सँ एक कथा, एक सँ एक स्मरणीय आ हमरा सभक चेतना मे सर्वदा चेन्ह छोड़'वला पात्र सब। एतबा सीमित संख्या मे सेहो एहि संकलन मे कह'क ढंग मे अपार विविधता छै। लघु आकारक मुदा मार्मिक कथा सब जेना 'गुदरिया' जकर मौन हमरा सभक मन मे अनंत अर्थ गुंजायित करैत अछि। दीर्घ विवरण सँ भरल कथा सब जेना 'पइठ' जत' बखान अपने पाठकक पुरस्कार बनि जाइत अछि। पाठक सभ बेर-बेर एहि संग्रह मे डुमकी लगब' लेल विवश हेताह आ बेर-बेर अपन प्रयास लेल नीक गोताखोर सब जकाँ पुरस्कृत हेताह। —विद्यानंद झा
Khachchar Aur Admi
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

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Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन: किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर ख़रा जीवन—ये कुछ मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।
‘खच्चर और आदमी’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘वैष्णवी’, ‘मक्खी या मकड़ी’, ‘उपदेश’, ‘कलाकार की आत्महत्या आदमी या पैसा?’ ‘जीव दया’, ‘चोरी और चोरी’, ‘अश्लील!’, ‘सत्य का द्वन्द्व तथा खच्चर और आदमी’।
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