Anya Kahaniyan Tatha Jhooth
(0)
Author:
Kunal SinghPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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हिन्दी कहानी नई कलम के हाथों कितनी प्रशस्त हुई है, यह कुणाल सिंह की इन कहानियों से ज़ाहिर है। जीवन और रिश्तों की सघनता, तन्मयता और तिलिस्म इन कहानियों का प्राण-बिन्दु हैं। मौलिकता का जीवन्त दस्तावेज़ हैं ये कहानियाँ।</p> <p>—ममता कालिया</p> <p>जहाँ दोपहर के डूबने और साँस के टकराने की आवाज़ सुनी जा सकती है, जहाँ बिना कविता हुए एक ऐसा गद्य, जो क़िस्सा बन जाता है, जिसके हर विन्यास में कविता ज़िन्दगी के असंख्य ब्यौरे लिखती है। ऐसे पात्र, जो किसी और का नहीं, अपने ही जीवन का प्रतिनिधित्व करते हैं और इन कहानियों के पाठक के सामने बैठ कर, उसे अपना जीवन पढ़ते हुए देखते हैं। एक ऐसा अनोखा प्रति-संसार जो अपनी गिरफ़्त में लेकर वास्तविक संसार की ग़लतियों को 'करेक्ट' करता है। ऐसी कहानियाँ जिनसे कतराकर पिछले ढाई दशक की कहानियों की कोई प्रामाणिक सूची मुकम्मल हो ही नहीं सकती। समय और यथार्थ तथा स्मृति और स्वप्न की सभी दूरियों को अनगिनत दुर्लभ युक्तियों से विसर्जित करती हुईं कुणाल सिंह की कहानियाँ भौतिक अवबोध (Physiological Perception) को हिन्दी कथा की कालरेखा में अद्वितीय और मौलिक विरलता के साथ तार्किक अवबोध (Logical Perception) में शायद पहली बार इस तरह तब्दील करती हैं। इसीलिए कुणाल सिंह की कहानियाँ हिन्दी कहानियों की किसी भी पीढ़ी के पाठक और कथाकार के लिए अनिवार्य कहानियाँ हैं। इन्हें न पढ़ना कहीं न कहीं से वंचित रह जाना है।</p> <p>—उदय प्रकाश</p> <p>कुणाल सिंह के पास आख्यान कला का जादू है, ऐसा जादू जो मायाजाल को काटकर हमें सत्य और सौन्दर्य के उजाले में ले जाता है।</p> <p>—अखिलेश
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हिन्दी कहानी नई कलम के हाथों कितनी प्रशस्त हुई है, यह कुणाल सिंह की इन कहानियों से ज़ाहिर है। जीवन और रिश्तों की सघनता, तन्मयता और तिलिस्म इन कहानियों का प्राण-बिन्दु हैं। मौलिकता का जीवन्त दस्तावेज़ हैं ये कहानियाँ।</p>
<p>—ममता कालिया</p>
<p>जहाँ दोपहर के डूबने और साँस के टकराने की आवाज़ सुनी जा सकती है, जहाँ बिना कविता हुए एक ऐसा गद्य, जो क़िस्सा बन जाता है, जिसके हर विन्यास में कविता ज़िन्दगी के असंख्य ब्यौरे लिखती है। ऐसे पात्र, जो किसी और का नहीं, अपने ही जीवन का प्रतिनिधित्व करते हैं और इन कहानियों के पाठक के सामने बैठ कर, उसे अपना जीवन पढ़ते हुए देखते हैं। एक ऐसा अनोखा प्रति-संसार जो अपनी गिरफ़्त में लेकर वास्तविक संसार की ग़लतियों को 'करेक्ट' करता है। ऐसी कहानियाँ जिनसे कतराकर पिछले ढाई दशक की कहानियों की कोई प्रामाणिक सूची मुकम्मल हो ही नहीं सकती। समय और यथार्थ तथा स्मृति और स्वप्न की सभी दूरियों को अनगिनत दुर्लभ युक्तियों से विसर्जित करती हुईं कुणाल सिंह की कहानियाँ भौतिक अवबोध (Physiological Perception) को हिन्दी कथा की कालरेखा में अद्वितीय और मौलिक विरलता के साथ तार्किक अवबोध (Logical Perception) में शायद पहली बार इस तरह तब्दील करती हैं। इसीलिए कुणाल सिंह की कहानियाँ हिन्दी कहानियों की किसी भी पीढ़ी के पाठक और कथाकार के लिए अनिवार्य कहानियाँ हैं। इन्हें न पढ़ना कहीं न कहीं से वंचित रह जाना है।</p>
<p>—उदय प्रकाश</p>
<p>कुणाल सिंह के पास आख्यान कला का जादू है, ऐसा जादू जो मायाजाल को काटकर हमें सत्य और सौन्दर्य के उजाले में ले जाता है।</p>
<p>—अखिलेश
Book Details
-
ISBN9788119996667
-
Pages216
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Editor Mrityunjay Singh
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- Description: 1975-2000 कथांतर 'कथांत'र दरअसल सन् 1975 और उसके आस-पास के काल से लेकर सन् 2000 तक के पच्चीस वर्षों में उभरे कथा-लेखकों की कहानियों का संग्रह होने के साथ-साथ इस काल खंड के कथा-कर्म की ऐतिहासिकता के दस्तावेज़ीकरण की भी एक कोशिश है। कहानी की दुनिया की सम्यक जानकारी रखने वाले इस तथ्य से परिचित हैं कि यह दौर स्वयं प्रकाश, रमेश उपाध्याय, असगर वजाहत, पंकज बिष्ट, नमिता सिंह, इसरायल, कामतानाथ, रमाकांत, सतीश जमाली, सुभाष पंत, मधुकर सिंह जैसे समर्थ कथा-लेखकों के दौर के तुरंत बाद शुरू हुआ है। यह दौर सामाजिक-राजनीतिक चेतना से सम्पन्न व्यापक सामाजिक बोध और गहरी अंतर्दष्टि रखने वाले कथा लेखकों का दौर रहा है। अगर वस्तुपरक दष्टि से देखा जाये तो विपुलता और गुणवत्ता की दष्टि से यह दौर पूर्ववर्ती और परवर्ती दौरों से बहुत विशिष्ट है। यह नई अंतर्वस्तु के संधान और अंतर्वस्तु और शिल्प की अन्विति के नये दष्टांतों का दौर भी है। इस पीढ़ी की रचनाशीलता इतनी प्रखर रही है कि इसने इक्कीसवीं शताब्दी में भी अपने लेखन से सतत मौजूदगी बनाये रखी है और कई अविस्मरणीय कहानियाँ रचकर कहानी के परिदश्य को समृद्ध किया है। हिन्दी कथा आलोचना में इस दौर का सम्यक मूल्यांकन नि:संदेह पूर्ववर्ती दौरों के मूल्यांकन सरीखा नहीं हुआ है और अभी इस दौर का मूल्यांकन होना बाकी है। 'कथांतर' के ये दोनों खंड पाठकों को हिन्दी कहानी के इस दौर की पूरी जानकारी देते हैं और कुछ उत्कृष्ट कहानियों से रूबरू कराते हैं। ये दोनों खंड हिन्दी कहानी में रुचि रखने वाले कथा-लेखकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अनिवार्य आधार-पुस्तकें हैं।
Shaadi
- Author Name:
Ismat Chugtai +1
- Book Type:

- Description: इस्मत चुग़ताई उर्दू की सम्पूर्ण गद्यकार हैं। उन्होंने न सिर्फ़ अफ़साने और उपन्यास लिखे, बल्कि अन्य कई विधाओं में भी अपनी क़लम के हुनर का लोहा मनवाया। उनके आत्मकथात्मक लेखन का पैनापन देखते ही बनता है। समाज के साथ अपने ऊपर हँसने की ख़ूबी, गहरा व्यंग्य और सुथरा हास्यबोध उन्हें अपने दौर के बाक़ी कथाकारों से विशिष्ट बनाता है। फिर अपने स्त्री होने का उनका अहसास और सो भी एक ऐसी स्त्री जिसे बनी बनाई लकीरों से अलग हटकर चलने का कुछ चस्का-सा है, उन्हें अपने समय से भी आगे का विजनरी साबित करता है। आज वे जितनी उर्दू की हैं उतनी ही हिन्दी की भी हो चुकी हैं। उनकी ज़्यादातर रचनाएँ हिन्दी में उपलब्ध हैं। हिन्दी में उनकी उर्दू रचनाओं का आना हमेशा पाठकों को उत्तेजित करता रहा है। ख़ास तौर से उनकी कहानियाँ जो आज भी लोकप्रियता के उसी शिखर पर हैं, जैसी वे उनके ज़माने में थीं। इस किताब में उनकी कुछ चर्चित कहानियों के अलावा उनके कुछ छोटे ड्रामों को भी शामिल किया गया उनका एक लेख भी इसमें रखा गया है जो उनके उत्कृष्ट संस्मरणात्मक गद्य का नमूना है।
Pratinidhi Kahaniyan : Mamta Kaliya
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kabootar Ki Udan
- Author Name:
Udita Mishra
- Book Type:

- Description: Book
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