Geet Govind
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‘गीतगोविंद’ संस्कृत कवि जयदेव द्वारा रचित एक अनुपम काव्य ग्रंथ है, जिसमें राधा-कृष्ण की केलि-कथाओं तथा उनकी अभिसार-लीलाओं के अत्यंत रसमय चित्रण के साथ ही प्रेम के सभी भारतीय रूपों का बड़ी तन्मयता और कुशलता के साथ वर्णन किया गया है। समग्र संस्कृत साहित्य में इस कोटि की मधुर रचना दूसरी कोई नहीं। यह आध्यात्मिक श्रृंगार का अत्यंत मनोरम काव्य ग्रंथ है, जिसमें शब्द और अर्थ का मनोमुग्धकारी सामंजस्य है। कृष्ण भक्ति साहित्य में ‘गीतगोविंद’ को धर्मग्रंथ का स्थान प्राप्त है। श्रीवल्लभ संप्रदाय में भी ‘गीतगोविंद’ को श्रीमद्भगवत पुराण के समान प्रतिष्ठा प्राप्त है। यह ग्रंथ देश-विदेश के अनेक मूर्द्धन्य एवं लब्धप्रतिष्ठ विद्वान् समीक्षकों द्वारा मुक्त कंठ से प्रशंसित है। प्रस्तुत है, धर्म और दर्शन के क्षेत्र में सुप्रतिष्ठित इस ग्रंथ-रत्न का सुमधुर हिंदी अनुवाद।
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‘गीतगोविंद’ संस्कृत कवि जयदेव द्वारा रचित एक अनुपम काव्य ग्रंथ है, जिसमें राधा-कृष्ण की केलि-कथाओं तथा उनकी अभिसार-लीलाओं के अत्यंत रसमय चित्रण के साथ ही प्रेम के सभी भारतीय रूपों का बड़ी तन्मयता और कुशलता के साथ वर्णन किया गया है। समग्र संस्कृत साहित्य में इस कोटि की मधुर रचना दूसरी कोई नहीं।
यह आध्यात्मिक श्रृंगार का अत्यंत मनोरम काव्य ग्रंथ है, जिसमें शब्द और अर्थ का मनोमुग्धकारी सामंजस्य है।
कृष्ण भक्ति साहित्य में ‘गीतगोविंद’ को धर्मग्रंथ का स्थान प्राप्त है। श्रीवल्लभ संप्रदाय में भी ‘गीतगोविंद’ को श्रीमद्भगवत पुराण के समान प्रतिष्ठा प्राप्त है। यह ग्रंथ देश-विदेश के अनेक मूर्द्धन्य एवं लब्धप्रतिष्ठ विद्वान् समीक्षकों द्वारा मुक्त कंठ से प्रशंसित है।
प्रस्तुत है, धर्म और दर्शन के क्षेत्र में सुप्रतिष्ठित इस ग्रंथ-रत्न का सुमधुर हिंदी अनुवाद।
Book Details
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ISBN9789390101429
-
Pages152
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: विश्व के साधक चिन्तकों में जैन दार्शनिक एवं तीर्थंकर कई दृष्टियों से स्मरण किए जाते हैं। उनका चिन्तन धर्म, जाति, देशकाल को गहरे प्रभावित करता है। उन्होंने प्राणीमात्र के कल्याण एवं विकास के सूत्र अपने उद्बोधनों में प्रदान किए हैं। भगवान महावीर का सन्देश है कि सुख, शान्ति, तनावरहित जीवन अपरिग्रह, सन्तोष, संयम से ही आ सकता है। तीर्थंकर महावीर ने अपने जीवन में व्यक्तिगत स्वामित्व के विसर्जन का प्रयोग करके बताया है। उन्होंने राज्यपद को त्यागा और पदार्थों के ढेर से अलग जा खड़े हुए, तब वे समता और शान्ति के स्वामी बने भगवान महावीर ने व्यक्ति के पूर्ण विकास के लिए एक ओर जहाँ आत्म-विकास का पथ प्रशस्त किया है, वहीं दूसरी ओर लोक-कल्याण के लिए सामाजिक मूल्यों का भी सृजन किया है। अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकान्त—ये तीनों मूल्य महावीर के सामाजिक अनुसन्धान के परिणाम हैं। तीर्थंकर महावीर के चिन्तन ने व्यक्ति को पुरुषार्थी और स्वावलम्बी बनने की शिक्षा दी है। उन्होंने मानव को सहिष्णु, निराग्रही होने का भी सन्देश दिया है। विचारों की उदारता से ही हम सत्य की तह तक पहुँच सकते हैं। तीर्थंकर महावीर का सारा जीवन आत्म-साधना के पश्चात् सामाजिक और नैतिक मूल्यों के निर्माण में ही व्यतीत हुआ। इसी कारण तीर्थंकर महावीर मानव जाति के गौरव के रूप में प्रतिष्ठित हुए। ‘चित्त बसें महावीर’ पुस्तक में प्रो. प्रेम सुमन जैन ने तीर्थंकर महावीर के प्रेरणादायक जीवन और दर्शन को एक रोचक शैली में प्रस्तुत किया है। एक महत्त्वपूर्ण और संग्रहणीय कृति।
Kurma Purana
- Author Name:
Bibek Debroy
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- Book Type:

- Description: To save the world from cosmic annihilation, Lord Vishnu takes on his second avatar, the Kurma, or tortoise. The Kurma Purana is one of the eighteen classic Hindu texts known collectively as the Puranas. Its origins can be traced back to 600 to 900 CE. In this text, we encounter Indradyumna, Varaha, Devi, Vyasa, and Shiva's divine presence as we delve into the deep and nuanced tale of one of the greatest Hindu legends. This translation of the Kurma Purana by Bibek Debroy, the seventh book in the Purana series, attempts to bring readers the rich and layered history of our myths and classics. Previous books in the series include the Bhagavata Purana, Brahma Purana, Markandeya Purana, Brahmanda Purana, Vishnu Purana and the Shiva Purana.
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