Management Funda : Vyavaharik Evam Aadhyatmik Sootra
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प्रबन्धन के इस युग में सफलता प्राप्त करने के कुछ पारम्परिक तरीक़े हैं तो कुछ करते-करते सीख जानेवाले मौलिक सूत्र भी। लेकिन यह तय है कि योग्य और श्रेष्ठ प्रबन्धन के द्वार पर दस्तक देने के लिए सफलता मजबूर होती है। आधुनिक समझ और साहित्य में प्रबन्धन के जितने सूत्र सिमटे हैं, उतने ही संकेत हमारे प्राचीन आध्यात्मिक ग्रन्थों में भी वर्णित हैं। हमारे प्राचीन ग्रन्थ इस मामले में उदाहरण हैं कि उनमें सुख-शान्ति और विजय प्राप्त करने का वर्णन प्रबन्धकीय रीति-नीति से किया गया है।</p> <p>इस पुस्तक में हमारा पहला प्रयास यह है कि सांसारिक प्रगति और आध्यात्मिक रुझान के विरोधाभास को मिटाया जाए। जीवन के हर क्षेत्र में प्रबन्धन से प्राप्त की जा रही सफलता के लिए जो समझ होती है, उसके व्यावहारिक दृष्टि के इक्यावन उदाहरण इस पुस्तक में हैं। ठीक इन उदाहरणों के सामने वाले पृष्ठ पर व्यावहारिक दृष्टिकोण से मिलते हुए आध्यात्मिक सोच के प्रसंग दिए गए हैं।
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प्रबन्धन के इस युग में सफलता प्राप्त करने के कुछ पारम्परिक तरीक़े हैं तो कुछ करते-करते सीख जानेवाले मौलिक सूत्र भी। लेकिन यह तय है कि योग्य और श्रेष्ठ प्रबन्धन के द्वार पर दस्तक देने के लिए सफलता मजबूर होती है। आधुनिक समझ और साहित्य में प्रबन्धन के जितने सूत्र सिमटे हैं, उतने ही संकेत हमारे प्राचीन आध्यात्मिक ग्रन्थों में भी वर्णित हैं। हमारे प्राचीन ग्रन्थ इस मामले में उदाहरण हैं कि उनमें सुख-शान्ति और विजय प्राप्त करने का वर्णन प्रबन्धकीय रीति-नीति से किया गया है।</p>
<p>इस पुस्तक में हमारा पहला प्रयास यह है कि सांसारिक प्रगति और आध्यात्मिक रुझान के विरोधाभास को मिटाया जाए। जीवन के हर क्षेत्र में प्रबन्धन से प्राप्त की जा रही सफलता के लिए जो समझ होती है, उसके व्यावहारिक दृष्टि के इक्यावन उदाहरण इस पुस्तक में हैं। ठीक इन उदाहरणों के सामने वाले पृष्ठ पर व्यावहारिक दृष्टिकोण से मिलते हुए आध्यात्मिक सोच के प्रसंग दिए गए हैं।
Book Details
-
ISBN9788183610919
-
Pages119
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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