Aadarsh Prabandhan Ke Sookta
(0)
₹
125
₹ 100 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
प्रबन्धन आत्म-विकास की एक सतत् प्रक्रिया है। अपने को व्यवस्थित-प्रबन्धित किए बिना आदमी दूसरों को व्यवस्थित-प्रबन्धित करने में सफल नहीं हो सकता, चाहे वे दूसरे लोग घर के सदस्य हों या दफ़्तर अथवा कारोबार के। इस प्रकार आत्म-विकास ही घर-दफ़्तर दोनों की उन्नति का मूल है। इस लिहाज़ से देखें, तो प्रबन्धन का ताल्लुक़ कम्पनी-जगत के लोगों से ही नहीं, मनुष्य मात्र से है। वह इंसान को बेहतर इंसान बनाने की कला है, क्योंकि बेहतर इंसार ही बेहतर कर्मचारी, अधिकारी, प्रबन्धक या करोबारी हो सकता है।</p> <p>‘आदर्श प्रबन्धन के सूक्त’ में संकलित आलेखों को पाँच खंडों में विभाजित किया गया है—व्यक्तित्व-विकास, कैरियर निर्माण, औद्योगिक सम्बन्ध, समय-प्रबन्धन और कौशल-विकास। इस पुस्तक से आप अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं की लगातार जाँच-परख और आशावाद की उपयोगिता को समझ सकते हैं। साथ ही ख़ुश रहने, अपनी भीतरी शक्तियों के विकास, अपनी सामर्थ्य के भरसक उपयोग और सटीक लक्ष्य-निर्धारण की व्यावसायिक उपादेयता का आकलन कर सकते हैं। इसके अलावा संघर्षों की महत्ता, पेशा बदलने से सफलता, सलाहकार व कार्यपालक के आपसी रिश्तों, और साख आदि विषयों पर भी इसमें प्रकाश डाला गया है।</p> <p>प्रबन्धन और आत्मविकास के क्षेत्र में वर्षों से अध्ययन व लेखनरत लेखक की एक महत्वपूर्ण पुस्तक।
Read moreDon’t Miss Out
- Free Delivery
- 25% off on all MRP of books
- Author-signed copy
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹999/Year
You will be auto-charged ₹999 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Prime Plus
Author-signed copy
25% off on all MRP of books
Book Recomendation Per Year
Delivery is free for the entire year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
प्रबन्धन आत्म-विकास की एक सतत् प्रक्रिया है। अपने को व्यवस्थित-प्रबन्धित किए बिना आदमी दूसरों को व्यवस्थित-प्रबन्धित करने में सफल नहीं हो सकता, चाहे वे दूसरे लोग घर के सदस्य हों या दफ़्तर अथवा कारोबार के। इस प्रकार आत्म-विकास ही घर-दफ़्तर दोनों की उन्नति का मूल है। इस लिहाज़ से देखें, तो प्रबन्धन का ताल्लुक़ कम्पनी-जगत के लोगों से ही नहीं, मनुष्य मात्र से है। वह इंसान को बेहतर इंसान बनाने की कला है, क्योंकि बेहतर इंसार ही बेहतर कर्मचारी, अधिकारी, प्रबन्धक या करोबारी हो सकता है।</p>
<p>‘आदर्श प्रबन्धन के सूक्त’ में संकलित आलेखों को पाँच खंडों में विभाजित किया गया है—व्यक्तित्व-विकास, कैरियर निर्माण, औद्योगिक सम्बन्ध, समय-प्रबन्धन और कौशल-विकास। इस पुस्तक से आप अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं की लगातार जाँच-परख और आशावाद की उपयोगिता को समझ सकते हैं। साथ ही ख़ुश रहने, अपनी भीतरी शक्तियों के विकास, अपनी सामर्थ्य के भरसक उपयोग और सटीक लक्ष्य-निर्धारण की व्यावसायिक उपादेयता का आकलन कर सकते हैं। इसके अलावा संघर्षों की महत्ता, पेशा बदलने से सफलता, सलाहकार व कार्यपालक के आपसी रिश्तों, और साख आदि विषयों पर भी इसमें प्रकाश डाला गया है।</p>
<p>प्रबन्धन और आत्मविकास के क्षेत्र में वर्षों से अध्ययन व लेखनरत लेखक की एक महत्वपूर्ण पुस्तक।
Book Details
-
ISBN9788183611398
-
Pages19
-
Avg Reading Time1 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Kushal Prabandhan Ke Sootra
- Author Name:
Suresh Kant
- Book Type:

- Description:
‘कुशल प्रबन्धन के सूत्र’ पर सुरेश कांत के दैनिक ‘अमर उजाला कारोबार’ में हर मंगलवार को प्रकाशित होनेवाले लोकप्रिय साप्ताहिक प्रबन्धन–कॉलम में छपे लेखों में से 40 चुने हुए लेखों का संकलन है। इन लेखों में हिन्दी में पहली बार प्रबन्धन के विभिन्न पहलुओं पर अत्यन्त रोचक और प्रभावशाली ढंग से प्रकाश डाला गया है। स्व–प्रबन्धन, कर्मचारी–प्रबन्धन, कार्यालय–प्रबन्धन, समय–प्रबन्धन, व्यक्तित्व–विकास, औद्योगिक सम्बन्ध, नेतृत्व–कला, कौशल–विकास आदि सभी पक्षों पर इनमें इतने सरल, सुबोध और आकर्षक तरीक़े से चर्चा की गई है कि पाठक लेखक के साथ बह चलता है। प्रबन्धन उसके लिए पराया अथवा दुरूह विषय नहीं रह जाता।
प्रबन्धन लेखक की नज़र में व्यक्तित्व के सतत विकास और जीवन में निरन्तर प्रगति की प्रक्रिया है। आदमी अपना ही परिष्कार न कर सके, अपने घर–परिवार की ही उन्नति न कर सके, तो वह कारोबार या दफ़्तर की प्रगति कैसे सुनिश्चित कर सकेगा? वह अपने को ही न सँभाल सके, तो दूसरों को—कर्मचारियों, ग्राहकों आदि को—क्या सँभाल सकेगा? अच्छा आदमी ही अच्छा कर्मचारी, अधिकारी या प्रबन्धक हो सकता है। अत: प्रबन्धन छात्रों, शोधार्थियों, कारोबारियों, कर्मचारियों–अधिकारियों अथवा प्रबन्धकों से ही ताल्लुक़ नहीं रखता, आम आदमी से भी ताल्लुक़ रखता है। वह कम्पनी–जगत के ही मतलब की चीज़ नहीं, मनुष्य मात्र के मतलब की चीज़ है। वह आदमी को बेहतर आदमी बनाने की कला है।
सुरेश कांत ने अपना लक्ष्य–समूह कॉरपोरेट–दुनिया के आदमी को ही नहीं, पूरी दुनिया के हर आदमी को मानकर इस विषय की प्रस्तुति की है। एक सफल, सिद्धहस्त रचनाकार होने के कारण वे इस विषय में लालित्य भरने में कामयाब रहे हैं। अपने विशद अध्ययन, गहरे ज्ञान और असरदार लेखन–शैली के बल पर वह इस विषय को हिन्दी में जन–जन में लोकप्रिय बनाने में सफल रहे हैं।
आप चाहे कोई भी हों, इस पुस्तक को पढ़ने के बाद आप वही नहीं रह जाएँगे, जो आप इसे पढ़ने से पहले थे। एक बहुत ही ज़रूरी और महत्त्वपूर्ण पुस्तक।
Utkrishta Prabandhan Ke Roop
- Author Name:
Suresh Kant
- Book Type:

- Description:
प्रबन्धन आत्म-विकास की एक सतत प्रक्रिया है। अपने को व्यवस्थित-प्रबन्धित किए बिना आदमी दूसरों को व्यवस्थित-प्रबन्धित करने में सफल नहीं हो सकता, चाहे वे दूसरे लोग घर के सदस्य हों या दफ़्तर अथवा कारोबार के। इस प्रकार आत्म-विकास ही घर-दफ़्तर, दोनों की उन्नति का मूल है। इस लिहाज़ से देखें, तो प्रबन्धन का ताल्लुक़ कम्पनी-जगत के लोगों से ही नहीं, मनुष्य मात्र से है। वह इनसान को बेहतर इनसान बनाने की कला है, क्योंकि बेहतर इनसान ही बेहतर कर्मचारी, अधिकारी, प्रबन्धक या कारोबारी हो सकता है।
‘उत्कृष्ट प्रबन्धन के रूप’ को विषयानुसार चार उपखंडों में विभाजित किया गया है : स्व-प्रबन्धन, नेतृत्व-कला, औद्योगिक सम्बन्ध तथा कॉरपोरेट-संस्कृति। प्रबन्धन कौशल के विशेषज्ञ लेखक ने इस पुस्तक में आत्मसम्मान, वैचारिक स्पष्टता, सफलता और विफलता की अवधारणा, व्यावसायिक निर्णय-प्रक्रिया में धैर्य और प्राथमिकता-क्रम की अहमियत, रचनात्मक दृष्टिकोण, प्रबन्धन के मानवीय पहलू, कर्मचारियों में सकारात्मक नज़रिया तथा प्रतिभा का सदुपयोग आदि बिन्दुओं पर व्यावहारिक कोण से विचार किया है।
प्रबन्धन के विद्यार्थियों और आम पाठकों के लिए एक मार्गदर्शक पुस्तक।
Hindi Gadya Lekhan Mein Vyangya Aur Vichar
- Author Name:
Suresh Kant
- Book Type:

- Description:
व्यंग्य क्या है? उसका हास्य से क्या सम्बन्ध है? वह एक स्वतंत्र विधा है या समस्त विधाओं में व्याप्त रहनेवाली भावना या रस? वह मूलतः गद्यात्मक क्यों है, पद्यात्मक क्यों नहीं? वह बैठे-ठाले क़िस्म की चीज़ है या एक गम्भीर वैचारिक कर्म? क्या व्यंग्यकार के लिए प्रतिबद्धता अनिवार्य है? यह प्रतिबद्धता क्या चीज़ है?...
ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं, जो प्रायः पाठकों और समीक्षकों को ही नहीं, व्यंग्यकारों को भी स्पष्ट नहीं। उदाहरण के लिए, हरिशंकर परसाई व्यंग्य को विधा नहीं मानते थे। रवीन्द्रनाथ त्यागी पहले मानते थे, बाद में मुकर गए। शरद जोशी मानते थे, पर कहते हिचकते थे। नरेन्द्र कोहली मानते हैं और कहते भी हैं। ऐसे ही, कुछ व्यंग्यकार हास्य को व्यंग्य के लिए आवश्यक नहीं मानते, जो कुछ हास्य के बिना व्यंग्य का अस्तित्व नहीं मानते...
असलियत क्या है? इसे वही स्पष्ट कर सकता है, जो स्वयं एक अच्छा व्यंग्यकार होने के साथ-साथ कुशल समीक्षक भी हो। सुरेश कांत में इन दोनों का मणिकांचन संयोग है। अपनी इस प्रतिभा के बल पर उन्होंने अपने इस शोधपूर्ण कार्य में व्यंग्य के तमाम पहलुओं को उनके वास्तविक रूप में उजागर किया है। व्यंग्य का अर्थ, उसका स्वरूप, उसका प्रयोजन, उसकी पृष्ठभूमि, उसकी परम्परा, उसके तत्त्व, उसकी उपयोगिता आदि पर प्रकाश डालते हुए वे उसकी सम्पूर्ण संरचना उद्घाटित कर देते हैं, जिसके ‘अभाव’ के चलते परसाई को व्यंग्य विधा प्रतीत नहीं होता था। व्यंग्य की रचना-प्रक्रिया में वैचारिकता की भूमिका रेखांकित करते हुए वे व्यंग्य और विचार का सम्बन्ध भी स्पष्ट करते हैं। भारतेन्दु से लेकर अब तक के सम्पूर्ण हिन्दी-व्यंग्य-कर्म का ज़ायज़ा लेते हुए वे हिन्दी-व्यंग्य की ख़ूबियों और उसके समक्ष उपस्थित चुनौतियों को एक साथ प्रकट करते हैं।
आज एक ओर जहाँ व्यंग्य-लेखन एक ज़रूरी माध्यम के रूप में उभरा है, रचनात्मक-संवेदनात्मक स्तर पर उसका बहुआयामी विस्तार हुआ है, उसकी लोकप्रियता और माँग भी अपने चरम पर है, वहीं अधिकाधिक मात्रा और अल्पसूचना (शॉर्ट नोटिस) पर लिखे जाने के कारण उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का भारी ख़तरा भी मौजूद है। व्यंग्य चूँकि एक हथियार है, अतः उसका विवेकसंगत प्रयोग नितान्त आवश्यक है। हर किसी पर इस अस्त्र का उपयोग नहीं किया जा सकता। इसे किसी के पक्ष में प्रयुक्त करना है तो किसी के विरुद्ध। यह विवेक व्यंग्य के मूल में विद्यमान विचार से प्राप्त होता है। व्यंग्य विचार से पैदा भी होता है और विचार को पैदा भी करता है। इस वैचारिकता से दिशा प्राप्त कर मानवता के हित में व्यंग्य का उत्तरोत्तर उत्कर्ष सुनिश्चित करना आज व्यंग्यकारों का सबसे बड़ा कर्तव्य भी है और उनके समक्ष गम्भीर चुनौती भी—यही इस शोध का निष्कर्ष है।
Ghar Ki Vyawastha Kaise Karen ?
- Author Name:
Ram Krishna
- Book Type:

- Description:
संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार की अवधारणा ने घर के मायने ही बदल दिए हैं। पहले हम ज़्यादातर कामों के लिए घर के दूसरे सदस्यों पर निर्भर रहते थे, अब हमें स्वयं अपनी व्यवस्था करनी पड़ती है। ऐसे में अनेक छोटी-मोटी बातों का ध्यान रखना ज़रूरी हो जाता है, घर का सही प्रबन्धन न हो तो कभी-कभी छोटी-छोटी चीज़ों के लिए भी आपको पूरा दिन तनाव में गुज़ारना पड़ सकता है। दूसरी तरफ़ घरों में जगह की कमी के चलते भी घर की व्यवस्था करना कठिन होता जा रहा है। अब एक या दो कमरों में ही अपने सामान को व्यवस्थित करना पड़ता है। फिर घर की व्यवस्था करते समय घर के बाक़ी सदस्यों का भी ध्यान रखना होता है। यह पुस्तक हमें बताती है कि देखने में छोटी लगनेवाली इन बड़ी समस्याओं से कैसे निबटा जाए। महत्त्वपूर्ण काग़ज़ात को कैसे, कहाँ सँभालें। कपड़ों की साज-सज्जा, खान-पान का चुनाव, साफ़-सफ़ाई, फ़र्स्ट एड बॉक्स और ऐसी ही तमाम चीज़ों के समुचित प्रबन्धन की जानकारी इससे मिलती है।
Prabandhan Mein 5 Ka Mantra
- Author Name:
Vijay Joshi
- Book Type:

- Description:
पाँच इन्द्रियाँ हैं जो हमारी देह के जटिलतम तंत्र का संचालन करती हैं, हमारे हाथों में पाँच-पाँच उँगलियाँ हैं जो स्पर्श से लेकर हमारे आसपास की वस्तुओं के परिचालन में हमारी सहायता करती हैं, पांडव पाँच थे जो कुरुक्षेत्र में सौ कौरवों और उनकी सेना को पराजित कर विजय के प्रतीक बने। कहने का तात्पर्य यह कि पाँच अंक का भारतीय दर्शन में भी बहुत महत्त्व माना गया है, और प्रकृति में भी।
यह पुस्तक प्रबन्धन के विस्तृत विषय को पाँच के अंक के साथ जोड़कर इच्छुक पाठकों के लिए एक सरल सूत्रावली प्रस्तुत करती है, ताकि वह अध्यात्म की मूल प्रेरणा को इस भौतिक जगत् में सम्यक् रूप में प्रयोग कर सके। शरीर के संवेदी तंत्र के माध्यम से पाँच इन्द्रियों को यहाँ प्रबन्धन के उपकरणों की तरह देखा गया है, और पाँचों पांडवों की पाँच तरह की प्रकृतियों को किसी भी कॉरपोरेट तंत्र के पाँच स्तम्भों की तरह देखना-सिखाया गया है।
इसी तरह धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष और परमात्मा के पाँच को हम अपने आज के आर्थिक जीवन में कैसे बरतें, इसके बहाने भारतीय दर्शन में निहित प्रबन्धन सूत्रों को भी यह पुस्तक स्पष्ट करती है।
लम्बे प्रबन्धकीय जीवनानुभव से प्राप्त ज्ञान को लेखक ने यहाँ संक्षेप में, लेकिन स्पष्टता के साथ इस तरह सँजोया है कि कोई भी पाठक इससे लाभान्वित हो सकता है।
Saphal Prabandhan Gandhi Darshan
- Author Name:
Vijay Joshi
- Book Type:

- Description:
कुशल तथा सफल प्रबन्धक उसे कहा जाता है जो अपने साथ काम करनेवाले लोगों के सामने स्वयं एक नैतिक उदाहरण के रूप में खड़ा हो सके। प्रबन्धन लोगों से काम निकालने की ट्रिक नहीं, उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा है। यह पुस्तक बताती है कि इस लिहाज़ से गांधी जी से बड़ा कोई प्रबन्धन हमारे पास नहीं है।
गांधी ने केवल अपने जीवन-व्यवहार तथा कठोर सिद्धान्त-पालन से लाखों लोगों को प्रभावित किया। न सिर्फ़ प्रभावित बल्कि एक कठिन कार्य में उन्हें स्वयं आगे आकर हिस्सेदार बनने की प्रेरणा भी दी।
इस पुस्तक में हमें गांधी-जीवन तथा दर्शन के ऐसे ही बिन्दुओं से परिचित कराया गया है, जो हमेशा एक सक्षम नेतृत्व के लिए आधार-स्तम्भ का काम करते रहेंगे। लेखक का विश्वास है कि उन सूत्रों को अपनाकर हम आज भी अपने व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक जीवन को सन्तुलन तथा सार्थकता दे सकते हैं।
बापू के जीवन के कुछ दिलचस्प और प्रेरक प्रसंगों के हवाले से यह पुस्तक हमें उन जीवन-मूल्यों का बोध कराती है जिन्हें उन्होंने पुस्तकों से निकालकर सशक्त सामाजिक हथियारों के रूप में बदला।
विजय जोशी की यह पुस्तक भी उनके अपने प्रबन्धकीय अनुभवों पर आधारित है। वे मानते हैं कि गांधी इस सदी के सबसे बड़े मैनेजमेंट गुरु थे। साध्य के बजाय साधन की शुचिता पर ज़ोर देकर उन्होंने प्रबन्धन तथा नेतृत्व की परिपाटी को एक नितान्त भारतीय रूप दे दिया था।
Manav Sansadhan Prabandhan Ke Anubhoot Aayam
- Author Name:
Ram Janam Singh
- Book Type:

- Description:
H R Management
Kuda Dhan
- Author Name:
Deepak Chaurasia
- Book Type:

- Description:
कूड़ा-कबाड़ जैसी कोई चीज इस दुनिया में है ही नहीं। अगर कुछ कूड़ा-कबाड़ है तो हमारी सोच के चलते। या है कि हम जिन चीजों के इस्तेमाल के बारे में सोच नहीं पाते, उसे बेकार समझ लेते हैं, कूड़ा समझ लेते हैं। हमें उनका इस्तेमाल करना नहीं पता, इसलिए उन चीजों को फेंकना शुरू कर देते हैं। आज बहुत कम लोग हैं, जो दवा-दारू की खाली शीशियाँ और बोतलें फेंकते हैं। लोहे और धातुओं से बने सामान अगर खराब भी हो जाएँ तो ज्यादातर लोग उसे कूड़ेदान में नहीं फेंकते। नालों में नहीं फेंकते। यों? योंकि सबको शीशे और धातुओं की कीमत का अंदाजा है। जिन्हें ज्यादा नहीं पता, वे भी जानते हैं कि कबाड़ी वाला शीशी-बोतल और लोहा-लकड़ अच्छे दाम पर खरीद लेता है। लेकिन ऐसा हम पॉलीथिन, प्लास्टिक की बोतलों, बाल या घरेलू कचरे के बारे में नहीं सोचते, योंकि हमें पता ही नहीं कि इनका भी बहुत कुछ इस्तेमाल हो सकता है। यह इनसानी फितरत का मामला है। हर कोई आसान काम करना चाहता है, जिसमें जोखिम न हो, जबकि हर कोई यह ज्ञान भी बाँटता रहता है कि ‘नो रिस्क, नो गेन’। प्लास्टिक कचरे से पेट्रोल-डीजल बनाने में भी यही मानसिकता आड़े आ रही है। तकनीक मौजूद है, लेकिन उस तकनीक का इस्तेमाल करने का इरादा नदारद है। यह पुस्तक ‘वेस्ट टु वैल्थ’ यानी कूड़े से धन अर्जित करने के व्यावहारिक तरीके बताती है।
Upbhokta Vastuon Ka Vigyan
- Author Name:
Ramchandra Mishra
- Book Type:

- Description:
प्रत्येक व्यक्ति जन्म से लेकर मृत्यु तक अपने दैनिक जीवन में वस्तुतः उपभोक्ता होता है। उपभोक्ता वस्तुओं का प्रयोग सर्वव्यापक और नित्य क्रिया है। खाने-पीने की वस्तुओं और पहनने-ओढ़ने की चीज़ों से लेकर आवास, साफ़-सफ़ाई, सुरक्षा-बचाव, साज-सँवार तथा भोग-विलास से सम्बन्धित अनेकानेक वस्तुओं का दिन-रात निरन्तर प्रयोग किया जाता है।
दैनिक उपयोग की वस्तुओं की गुणवत्ता, संघटन, विश्वसनीयता, उपयोग के लाभालाभ, सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रभाव आदि आवश्यक तथ्यों यानी उपभोक्ता वस्तुओं के विज्ञान से उपभोक्ता प्रायः कम ही अवगत होते हैं। दूसरी तरफ़ बाज़ार की नई प्रवृत्ति ने उपभोक्ता वस्तुओं को नया रूप दिया है। अब उपभोक्ता विज्ञापन की चकाचौंध में घटिया वस्तुओं को भी वरण कर लेता है। इसकी वजह है उपभोक्ता जानकारी और मार्गदर्शन का अभाव।
यह पुस्तक उपभोक्ता वस्तुओं के बारे में कही-सुनी बातों के बजाय हमें ठोस वैज्ञानिक जानकारी देती है जिसके आधार पर हम अपने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।
Local se Global
- Author Name:
Prakash Biyani
- Book Type:

- Description:
हाँ, हम तैयार हैं...
—देश की अर्थव्यवस्था को लाइसेंसी राज की बेड़ियों से मुक्त कराकर आर्थिक स्वतंत्रता के वैश्विक रास्ते पर ले जानेवाले अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहते हैं—‘दुनिया में लोग चीन की तरक़्क़ी से आशंकित होते हैं, लेकिन इसके विपरीत भारत की आर्थिक तरक़्क़ी को सकारात्मक नज़रिये से देखते हैं...’
—व्हार्टन स्कूल ऑफ़ द यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेंसिल्वेनिया के चार प्रोफ़ेसरों के अध्ययन का निष्कर्ष है—‘वैश्विक आर्थिक मन्दी के दौरान भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने बेहतर प्रदर्शन किया क्योंकि वहाँ के उद्योगपतियों के कामकाज का अपना तौर-तरीक़ा है...’
—भारतीय अर्थव्यवस्था सन् 2020 में तीन ट्रिलियन डॉलर होगी...
—कभी विदेशी उद्योगपति हमारी कम्पनियाँ ख़रीदते थे, आज भारतीय ‘कॉरपोरेट-हाट’ के बड़े सौदागर हैं। यहाँ तक कि कभी भारत पर राज करनेवाली ईस्ट इंडिया कम्पनी के नए मालिक हैं—मम्बई में जन्मे उद्योगपति संजीव मेहता...
ऐसी सकारात्मक सच्चाइयों से प्रेरित इस पुस्तक ‘लोकल से ग्लोबल : इंडियन कॉरपोरेट्स’ में उदारीकरण के दूसरे दशक (2001-2010) में भारतीय उद्योग जगत की ֹ‘लोकल से ग्लोबल’ बनने की सफल कोशिश दोहराई गई है। यह पुस्तक उन पचास भारतीयों की यशोगाथा है, जिन्होंने साबित किया है कि भारतीय ठान लें तो कुछ भी कर सकते हैं, वह भी दूसरों से बेहतर।
An Endless Travel
- Author Name:
Dewakar Goel
- Book Type:

- Description:
It is quite fascinating to conceive an idea "one can always remain young", it is our emotional and psychological state of mind which makes us old. In fact, it is the planning for the life cycles in advance which makes the miraculous difference. In European and many other Asian countries, it is adopted as a natural business. It is essential to realize and recognize the need for emotional and psychological stability. Since our expectations, sensibilities, personalities, sensitivity level, concept of empathy all undergo a sea change, therefore, we need to have proper planning as a matter of mental preparedness for physical, emotional and psychological changes in our thinking process. This wonderful book 'An Endless Travel' by Dewakar Goel is an easy and friendly roadmap towards the long journey on an endless road, which is going to be a landmark because of its unique features of relating each concept with the real life situation where a reader may be able to identify himself.
Sansar Kayaron ke Liye Nahin
- Author Name:
Ramesh Pokhariyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description:
स्वामी विवेकानन्द 'योद्धा संन्यासी' थे। करुणा, निर्भयता, कर्मठता, ज्ञान और सेवा आदि महत्तर गुणों से विभूषित उनका जीवन प्रेरणा का महाग्रन्थ है। कठिन से कठिन परिस्थिति का सामना करने और उससे विजयी होकर निकलने का आदर्श स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाओं का सार है।
स्वामी जी ने अपनी अमृत वाणी से पूरे विश्व को नवजीवन का सन्देश दिया था। वे व्यावहारिक वेदान्त के अग्रणी व्यक्तित्व थे। उनके जीवन और कृतित्व में एक विराट सत्ता के प्रति आस्था तो है ही साथ ही मनुष्य को निर्भय और कर्मठ बनाने की प्रेरणा भी है।
‘संसार कायरों के लिए नहीं’ एक विलक्षण और प्रासंगिक पुस्तक है। आज जटिल होते समय और समाज में जीने के लिए व्यक्ति को अपने जीवन का नियोजन करना होता है। यह कठिन कार्य है, इसे स्वामी विवेकानन्द के सन्देश और विचार सुगम बनाते हैं। यह पुस्तक स्वामी विवेकानन्द के विचारों, आदर्शों एवं सन्देशों पर आधारित है। जीवन जीने की कला पर प्रकाश डालते हुए स्वामी जी विश्व मानवता के प्रति अपार करुणा से भर जाते हैं।
सहृदय साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने स्वामी विवेकानन्द के विपुल साहित्य से वे सूत्र चुने हैं जो समय और समाज को एक नई दिशा देते हैं। इस पुस्तक को पढ़कर किसी भी व्यक्ति के मन में जीवन को सार्थक बनाने की ललक जाग उठेगी।
Management Mantra
- Author Name:
Vijay Joshi
- Book Type:

- Description:
कॉरपोरेट की नई दुनिया में एक सन्तुलित प्रबन्धन शैली अपनाना आज बहुत ज़रूरी हो गया है, ताकि उससे जुड़े लोगों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल भी हो सके, और उन्हें उनके योगदान का सन्तोषजनक फल भी प्राप्त हो, और इस सबके साथ कॉरपोरेट निकाय का समग्र विकास भी सम्भव हो।
यह पुस्तक इसी के लिए कुछ साधारण लेकिन अत्यन्त मूल्यवान गुर बताती है। पुस्तक की आधारभूत मान्यता है कि सम्पत्ति-निर्माण का कार्य मानवीय मूल्यों को नज़रअन्दाज़ करके नहीं किया जा सकता और न ही किया जाना चाहिए। कर्ता अपने कर्तव्य को पहले समझे, जिसके तहत ज़रूरी है कि उस समय निकाय का नेतृत्व अपना सब कुछ हासिल कर लेता है, तब उसकी मनोवृत्ति दूसरों के हित की ओर जानी चाहिए। यानी किसी भी प्रकार की प्रगति को केवल अपने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। एक नीति निर्धारित करें, जिसका आधार परहित हो। जो अपने सहयोगियों की सुरक्षा की गारंटी दे, दूसरों की ग़लतियों को भूलकर आगे बढ़े और सह-अस्तित्व को अपनी कार्यशैली की पहचान बनाए।
ऐसी ही कुछ आवश्यक बातों को इस पुस्तक के लेखक ने सरल ढंग से, उदाहरणों-क़िस्सों की मदद से समझाते हुए क्रमश: संकलित किया है। विशेष उल्लेखनीय यह है कि लेखक स्वयं एक सफल प्रबन्धक रहे हैं, और यह सब उन्होंने व्यवहारत: आज़माया है।
Beema Prabandhan Evam Prashashan
- Author Name:
M. N. Mishra
- Book Type:

- Description:
‘बीमा प्रबन्ध एवं प्रशासन’ बीमा व्यवसाय के सफल संचालन की एकमात्र पुस्तक है। इसे गहन शोध और विस्तृत अध्ययन के बाद लिखा गया है। बीमा व्यवसाय का प्रबन्धन एवं निर्देशन कैसे किया जाए, इस पुस्तक के अध्ययन से पता लग सकता है।
इस पुस्तक में सात खंड हैं जो विभिन्न कार्यक्षेत्रों के संचालन में सहायक हैं। बीमा परिचय, प्रबन्ध एवं प्रशासन को प्रथम खंड में दिया गया है, जिसमें बीमा की परिभाषा एवं स्वभाव, बीमा का विकास एवं संगठन, बीमा प्रसंविदा, प्रबन्ध, प्रशासन एवं संगठन, जीवन बीमा निगम संगठन का रूप, सामान्य बीमा निगम, जीवन बीमा प्रसंविदा, सामुद्रिक बीमा प्रसंविदा और अग्नि बीमा परिचय एवं प्रसंविदा का वर्णन है। द्वितीय खंड में कार्यालय संगठन और प्रबन्ध की विवेचना है, जिसमें कार्यालय अभिन्यास एवं कार्य-दशाएँ, कार्यालय फर्नीचर, उपकरण एवं मशीनें, कार्यालय पद्धति, कार्यालय संगठन और कार्यालय प्रबन्ध का वर्णन है। कायिक प्रबन्ध का विश्लेषण तृतीय खंड में है जिसमें कार्यालय कार्यकर्त्ता प्रबन्धन, विक्रय संगठन एवं प्रबन्ध, अभिकर्त्ता की नियुक्ति, अभिकर्त्ता का प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण एवं प्रेरणा और अभिकर्त्ता का नियंत्रण बताया गया है। चतुर्थ खंड विपणन का है जिसमें विक्रय-कार्यकर्त्ताओं का संगठन, कार्यक्षेत्रीय कार्यकर्त्ताओं के गुण, बीमा विक्रय विधि, प्रचार एवं तर्क, आक्षेपों का उत्तर, बीमा जब्ती नए व्यापार का अभिगोपन, बीमा कराने की विधि एवं चुनाव, बीमापत्र की शर्तें, नवकरण विधियों के प्रबन्ध का वर्णन है। पंचम खंड बीमापत्रधारियों की सेवा का है जिसमें बीमापत्रधारियों की सेवा, अध्यर्थन का भुगतान का वर्णन है। वित्तीय प्रबन्ध का वर्णन षष्ठम खंड में है जिसमें प्रव्याजि निर्धारण, कोष का प्रबन्ध, मूल्यांकन, संचय, कोष का विनियोग, लागत नियंत्रण, अंकेक्षण एवं परीक्षण का विवरण है। सप्तम खंड में बीमा अधिनियम एवं प्रसंविदा, जैसे—बीमा अधिनियम, 1938, जीवन बीमा अधिनियम, 1956, सामुद्रिक बीमा अधिनियम, 1963, सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972, बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण, 2000 का विशद विश्लेषण है।
यह पुस्तक वर्तमान अर्थव्यवस्था के विकास और विस्तृतीकरण में मील का पत्थर है। यह पुस्तक आनेवाले समय में बीमा की विभिन्न समस्याओं के समाधान की गीता है जिसके विभिन्न सिद्धान्तों का उपयोग करके कठिन-से-कठिन समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
Management Seekhen Mahatma Se
- Author Name:
Vijay Joshi
- Book Type:

- Description:
प्रबन्धन आज बाक़ायदा एक शिक्षा-सरणी है जिसके तहत विद्यार्थी को कुछ निश्चित और सीमित अर्थों में प्रबन्धक के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है। शायद इसी कारण आज हमारे कॉरपोरेट जगत में व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के होलिस्टक विकास की कोई जगह नहीं रही।
यह पुस्तक प्रबन्धन को उन आधारभूत नैतिक मूल्यों से जोड़ती है जो व्यावसायिक तथा व्यावहारिक कार्यों को भी विराटतर मानवीय हित के बड़े धरातल पर ले जा सकते हैं और इसके लिए इसमें महात्मा गांधी के जीवन तथा विचारों को आधार बनाया गया है।
हम सभी जानते हैं कि गांधी स्वयं एक कुशल प्रबन्धक थे, और उन्होंने अपनी नेतृत्व-क्षमता से अकल्पनीय जनान्दोलनों को सम्भव बनाया। और इसके लिए उन्होंने कुछ ऐसे सूत्रों को अपने दैनिक जीवन में अपनाया, जिन्हें लोग हमेशा से जानते थे लेकिन उन पर उस निष्ठा तथा सच्चाई के साथ अमल नहीं करते थे जैसा महात्मा ने किया।
झूठ से भरसक दूरी, अपनी कमियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारना, वचनबद्धता, हर काम को समान भाव से देखना, हर किसी से सीखने को तैयार रहना, श्रम का सम्मान करना, समय के मूल्य को समझना, और जब ज़रूरत हो अकेले चलने की हिम्मत जुटाना—यह कुछ बहुत साधारण मूल्य हैं जिन्हें बापू ने अपनाया। और ये एक अनूठे नेता के रूप में सबसे ज़्यादा चमके।
यह पुस्तक बताती है कि यही बातें व्यवहार में लेकर हम आज अपने प्रबन्धनीय कौशल को प्रभावशाली बना सकते हैं।
Pachis Global Brand
- Author Name:
Prakash Biyani +1
- Book Type:

- Description:
ब्रांड यानी उत्पाद विशेष का नाम...एक ट्रेडमार्क। वेबस्टर्स शब्दावली के अनुसार ब्रांड यानी... A mark burned on the skin with hot iron.
हिन्दी में इसका भावार्थ है : व्यक्ति के शरीर पर उसकी पहचान दाग देना। यही इस पुस्तक का सार है। ब्रांड किसी उत्पाद का केवल नाम ही नहीं होता। उसके उत्पाद का पेटेंटेड ट्रेडमार्क भी नहीं होता। ग्राहक जब ब्रांडेड उत्पाद खरीदता है तो वह इस विश्वास का मूल्य भी चुकाता है कि उत्पाद गुणवत्तायुक्त होगा, झंझटमुक्त लम्बी सेवा प्रदान करेगा और उसे वादे के अनुसार बिक्री बाद सेवा मिलेगी। दूसरे शब्दों में, ब्रांडेड उत्पादों के निर्माता केवल वस्तु का मूल्य प्राप्त नहीं करते। वे एक भरोसे, एक विश्वास की क़ीमत भी वसूल करते हैं। वही ब्रांड लम्बी पारी खेलते हैं, जो अपने पर ‘दाग' दी गई ‘पहचान' को एक बार नहीं, बार-बार भी नहीं, बल्कि हर बार सही साबित करते हैं। ऐसे ही शतकीय पारी के बाद ग्लोबल मार्किट में आज भी अव्वल 25 ग्लोबल ब्रांड का इतिहास इस पुस्तक में सँजोया गया है।
Nano Car Ki Khani
- Author Name:
Chacko/Noronha/Agrawal
- Book Type:

- Description:
टाटा मोटर्स के चेयरमैन रतन टाटा ने एक सपना देखा था। लाखों भारतीयों के व्यक्तिगत इस्तेमाल और अपना जीवन स्तर सुधारने के लिए एक सुरक्षित और सस्ती कार मुहैया कराना। इसी सपने से नैनो का जन्म हुआ है। इस सपने के साकार होने से ही नैनो इतनी चर्चित और प्रशंसित कार बन गई है। इस पुस्तक में उस स्वप्न को साकार करने की प्रेरणाप्रद कहानी है। यह कहानी है एक लाख रुपए की ‘वंडर कार’ नैनो की, उसके बनने की। नैनो के निर्माण की एक लंबी, संघर्षपूर्ण, कष्टप्रद एवं अत्यंत महँगी परियोजना थी, जिसमें एक-से-एक बड़ी दिक्कतें आईं। यह पुस्तक उस अनूठे और चमत्कारी प्रकल्प के पीछे की शक्ति टाटा मोटर्स की भी कहानी है, जिसने पुरातन तकनीक और पारंपरिक तरीकों में सुधार कर एक ऐसी कार बनाई, जिसने विश्व की तकनीकी रूप से समृद्ध ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को आश्चर्यचकित कर दिया। टाटा मोटर्स के चेयरमैन रतन टाटा ने एक सपना देखा था—लाखों भारतीयों को व्यक्तिगत इस्तेमाल और अपना जीवन स्तर सुधारने के लिए एक सुरक्षित और सस्ती कार मुहैया कराने का। इसी सपने से नैनो की शुरुआत होती है। इस सपने के साकार होने से ही नैनो इतनी चर्चित और बड़ी प्रशंसित कार बन गई है। यह ऐसी कार है जिसमें न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर में ऑटोमेटिव उद्योग के मौजूदा प्रतिमान को बदलने की क्षमता है। सफलता की नींव के निर्माण के लिए अनुसंधान आवश्यक है। भारत में लाखों परिवारों का असुरक्षित दोपहिया वाहनों पर सफर करना आम बात है। लेकिन एक दूरदर्शी व्यक्ति ने उनके लिए एक सुरक्षित और आरामदायक विकल्प की कल्पना की। यह अभिनव सोच थी। इस सोच के अनुरूप आकर्षक डिजाइनवाली एक कार बनाई जाने लगी, जिसमें चार व्यक्तियों का परिवार आरामदायक और सुरक्षित यात्रा कर सकता था। इस कार की घोषित कीमत महज 1 लाख रुपए थी। विकासशील दुनिया के लाखों लोगों के लिए टाटा मोटर्स की नई 2,500 डॉलर वाली चार दरवाजों की कार हेनरी फोर्ड के मॉडल टी जितनी बड़ी परिवहन क्रांति ला सकती है। यह दुनिया की सबसे सस्ती कार है। —गोविन राबिनोविल, एसोसिएटेड प्रेस नैनो भारतीय स्टाइल के समाजवाद का महान् प्रतीक है।—रेडिफ.कॉम बिक्री शुरू होने से पहले ही यह विकासशील दुनिया में एक महत्त्वपूर्ण प्रतीक के रूप में उभर चुकी है। यह नवीनता का एक नया ब्रांड है, जो सस्ता लेकिन बहुत उपयोगी है।—टाइम पत्रिका नैनो सस्ते निजी वाहन के युग का पूर्वाभास देती है।—न्यूजवीक यदि आधुनिक राष्ट्र बनने की भारत की महत्त्वाकांक्षा का कोई प्रतीक हो सकता है तो वह निश्चित रूप से कम कीमत वाली छोटी कार नैनो है। नैनो उन लाखों भारतीयों का सपना पूरा करेगी, जो शहरी समृद्धि का हिस्सा बनना चाहते हैं।—द फाइनेंशियल टाइम्स नैनो ने भारत को दुनिया के नक्शे पर पहुँचा दिया है। जिस काम को करने में जापानियों ने 30 वर्ष लगाए, टाटा मोटर्स ने उसे 4 वर्षों में कर दिखाया।—फिओन्ना प्रिम्स सेगमेंट वाइ के बिजनेस डेवलपमेंट प्रमुख यह बदलाव का वाहन है। यह भारत में समाज का चेहरा बदल देगी।—श्रवण गर्ग, भास्कर प्रकाशन समूह
Aap Hi Baniye Krishna
- Author Name:
Girish P. Jakhotiya
- Book Type:

- Description:
महाभारत के चरित्रों में अकेले कृष्ण हैं, जिनका किसी न किसी रूप में प्रायः सभी चरित्रों से जुडाव रहा। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे सिंहासन पर विराजमान सम्राट से लेकर गली-कूचों में घूमनेवाली ग्वालिनों तक सबसे उनके स्तर पर जाकर संवाद ही नहीं कर लेते थे, उन्हें अपनी नीति और राजनीति का पोषक भी बना लेते थे। बचपन से लेकर प्रौढ़ावस्था तक देश-भर में उन्होंने जो किया और जैसे किया, उनके सिवा और कौन कर सका? अपने हर काम से वे विपक्षी को पस्त-परास्त और निरस्त्र ही नहीं कर देते थे, उसे अपना अनुरक्त भी बना लिया करते थे। अपने कारनामों के औचित्य के अदभुत-अपूर्व तर्क भी वे जुटा लिया करते थे। धरती के भविष्य को सँवारने और पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ सबको प्यार देने और सबका प्यार पाने में कृष्ण पूर्णतः सफल सिद्ध हुए। योगेश्वर कृष्ण की क्रन्तिकारी नीतियों, सफल रणनीतियों, दार्शनिक विचारों और नेतृत्व की अदभुत शैलियों को प्रबन्धन की दृष्टि से विवेचित-विश्लेषित करनेवाली हिन्दी की एक ऐसी पुस्तक, जिसे पढ़कर आप भी अपने जीवन को कृष्ण की तरह एक विजेता के रूप में ढाल सकते हैं।
Katha Saptak Manisha Kulshreshtha
- Author Name:
Manisha Kulshreshtha
- Book Type:


- Description:
स्त्री जीवन के विभिन्न रंगों को उकेरी ७ कहानियाँ, हरेक कहानी अपने आप में भावनाओं के अनूठे अनुभवों को समेटे हुए। - कठपुतलियाँ - स्वाँग - एडोनिस और लिली के फूल - क़सुमल रंग - आर्किड - एक थी लिलन - ज़मीन
Naqqashidar Cabinet
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:


- Description:
सुधा ओम ढींगरा का उपन्यास नक़्क़ाशीदार केबिनेट वर्ष 2016 का अत्यंत सफल उपन्यास है। यह उपन्यास पेपरबैक और ऑडियोबुक में भी उपलब्ध है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book