Saat Paheliyaan
(0)
Author:
Rajeev PundirPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
237
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हमारे जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं जो हमें समझ नहीं आतीं और हमेशा के लिए एक पहेली बनकर हमारे दिल और दिमाग़ के किसी कोने में सुप्तावस्था में पड़ी रहती हैं । मौका मिलते ही वो फिर से हमारे सामने अपनी बिसात बिछाकर हमें चुनौती देती हैं हल करने के लिए । लेकिन हल फिर भी नहीं निकलता । ऐसी ही कुछ सोती-जागती, हंसती-खेलती, कुछ उदास और कुछ गुमसुम बैठी कहानियों का ये संग्रह आपके सामने प्रस्तुत है – सात पहेलियाँ ।.
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हमारे जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं जो हमें समझ नहीं आतीं और हमेशा के लिए एक पहेली बनकर हमारे दिल और दिमाग़ के किसी कोने में सुप्तावस्था में पड़ी रहती हैं । मौका मिलते ही वो फिर से हमारे सामने अपनी बिसात बिछाकर हमें चुनौती देती हैं हल करने के लिए । लेकिन हल फिर भी नहीं निकलता । ऐसी ही कुछ सोती-जागती, हंसती-खेलती, कुछ उदास और कुछ गुमसुम बैठी कहानियों का ये संग्रह आपके सामने प्रस्तुत है – सात पहेलियाँ ।.
Book Details
-
ISBN9788193913451
-
Pages220
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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अर्से तक अंग्रेज़ी का अध्यापन।
कृतियाँ अनेक भाषाओं में अनूदित।
हिन्दी में अनूदित कृतियाँ : ‘चोट्टि मुण्डा और उसका तीर’, ‘जंगल के दावेदार’, ‘अग्निगर्भ’, ‘अक्लांत कौरव’, ‘1084वें की माँ’, ‘श्री श्रीगणेश महिमा’, ‘टेरोडैक्टिल’, ‘दौलति’, ‘ग्राम बांग्ला’, ‘शाल-गिरह की पुकार पर’, ‘भूख’, ‘झाँसी की रानी’, ‘आंधारमानिक’, ‘उन्तीसवीं धारा का आरोपी’, ‘मातृछवि’, ‘सच-झूठ’, ‘अमृत संचय’, ‘जली थी अग्निशिखा’, ‘भटकाव’, ‘नीलछवि’, ‘कवि वन्द्यघटी गाईं का जीवन और मृत्यु’, ‘बनिया-बहू’, ‘नटी’ (उपन्यास); ‘पचास कहानियाँ’, ‘कृष्ण द्वादशी’, ‘घहराती घटाएँ’, ‘ईंट के ऊपर ईंट’, ‘मूर्ति’ (कहानी-संग्रह); ‘भारत में बँधुआ मज़दूर’ (विमर्श)।
सम्मान : ‘जंगल के दावेदार’ पुस्तक पर ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’। ‘मैगसेसे अवार्ड’ तथा ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित।
निधन : 28 जुलाई, 2016 (कोलकाता)।
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