Mam Aranya
(0)
Author:
Sudhakar AdeebPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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Available
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वीरवर लक्ष्मण अपने चारों ओर विस्तीर्ण एवं अभ्यन्तर में घुमड़ते-गूँजते अरण्य से जूझते चौदह वर्ष देश निकाला पाए अपने अग्रज श्रीराम के साथ विचरते रहे। रामकथा तो इस धरती के कण-कण और पत्ते-पत्ते पर लिखी गई तथा बहुश्रुत है। परन्तु त्यागमूर्ति लक्ष्मण अधिकतर मौन-से चित्रित किए गए हैं। कुछेक स्थलों पर जब वह अपने सम्पूर्ण तेज के साथ मुखर होते हैं, तो उन्हें उनके मर्यादाप्रिय अग्रज श्रीराम शान्त करा देते हैं। ऐसा अनेक रामायणों में होता आया है।</p> <p>विचारणीय यह है कि क्या सौमित्र-लक्ष्मण सम्पूर्ण रामकथा में सदैव मौन ही रहे होंगे? क्या उनका अपना कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व नहीं रहा होगा? इतना तेजस्वी, इतना कर्मठ और शौर्यवान् योद्धा भला क्या इतना चुपचाप रह सकता है? फिर रामानुज लक्ष्मण का स्वयं का चिन्तन क्या रहा होगा? ये प्रश्न वर्षों तक मेरे मन में आकार लेते रहे। समाधान इस ‘मम अरण्य’ के रूप में उपस्थित हुआ है।...
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वीरवर लक्ष्मण अपने चारों ओर विस्तीर्ण एवं अभ्यन्तर में घुमड़ते-गूँजते अरण्य से जूझते चौदह वर्ष देश निकाला पाए अपने अग्रज श्रीराम के साथ विचरते रहे। रामकथा तो इस धरती के कण-कण और पत्ते-पत्ते पर लिखी गई तथा बहुश्रुत है। परन्तु त्यागमूर्ति लक्ष्मण अधिकतर मौन-से चित्रित किए गए हैं। कुछेक स्थलों पर जब वह अपने सम्पूर्ण तेज के साथ मुखर होते हैं, तो उन्हें उनके मर्यादाप्रिय अग्रज श्रीराम शान्त करा देते हैं। ऐसा अनेक रामायणों में होता आया है।</p>
<p>विचारणीय यह है कि क्या सौमित्र-लक्ष्मण सम्पूर्ण रामकथा में सदैव मौन ही रहे होंगे? क्या उनका अपना कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व नहीं रहा होगा? इतना तेजस्वी, इतना कर्मठ और शौर्यवान् योद्धा भला क्या इतना चुपचाप रह सकता है? फिर रामानुज लक्ष्मण का स्वयं का चिन्तन क्या रहा होगा? ये प्रश्न वर्षों तक मेरे मन में आकार लेते रहे। समाधान इस ‘मम अरण्य’ के रूप में उपस्थित हुआ है।...
Book Details
-
ISBN9788180319518
-
Pages356
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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