Khayalon Ke Munder Se
(0)
Author:
Akhilesh BakshiPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
113
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Hindi Poetry Book written By Akhilesh Bakshi . This book consist of poetry related to love and life.
Read moreAbout the Book
Hindi Poetry Book written By Akhilesh Bakshi . This book consist of poetry related to love and life.
Book Details
-
ISBN9789385137341
-
Pages80
-
Avg Reading Time1 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginN/A
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Her Dreams : The Story After Her Departure
- Author Name:
Saransh Verma
- Book Type:

- Description: “Have you ever lost someone very special to your heart?” completing a quota of nine months, she popped out from the womb of her mother, with cute twinkling eyes. Life was all fun then with daily discussions in a cheerful family of five. But one dark day, something happened and she went missing! So, how will you feel when your favourite person suddenly disappears from your life? You have unanswered questions like, what happened to her? Where did she go all of a sudden? Why did it happen? So here comes a young, witty story of a 16 year old carmelite, who had dreams of reaching heights which coincidentally met the doom, putting a full stop to everything. It shows the after-story of how a happy family breaks into pieces with the demise of their daughter, leftover with her dreams. Her mother had a dream of seeing her again, her father had a dream of dropping her school again, her brother had a dream of playing a set of chess with her again, her sister had a dream of gossiping with her again; it all just remained, a dream!.
Jhansi Ki Rani
- Author Name:
Vrindavan Lal Verma
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- Description: "रानी ने घोड़े की लगाम अपने दाँतों में थामी और दोनों हाथों से तलवार चलाकर अपना मार्ग बनाना आरंभ कर दिया। रानी की दुहत्थु तलवारें आगे का मार्ग साफ करती चली जा रही थीं। रानी के साथ केवल चार सरदार और उनकी तलवारें रह गईं। रानी ने देशमुख की सहायता के लिए सुंदर को इशारा किया और स्वयं संगीनबरदारों को दोनों हाथों की तलवारों से खटाखट साफ करके आगे बढ़ने लगीं। एक संगीनबरदार की हूल रानी के सीने के नीचे पड़ी। उन्होंने उसी समय तलवार से उस संगीनबनदार को खतम किया। हूल करारी थी, परंतु आँतें बच गईं। रानी ने सोचा, स्वराज्य की नींव बनने जा रही हूँ। रानी के खून बह निकला। —इसी उपन्यास से अदम्य साहस, शौर्य और देशभक्ति की प्रतिमूर्ति झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई पर केंद्रित इस उपन्यास में बाबू वृंदावनलाल वर्मा ने तत्कालीन राजनीतिक-सामाजिक परिवेश का ऐसा सजीव चित्रण किया है मानो पूरा घटनाक्रम हमारी आँखों के सामने हो रहा हो। झाँसी की रानी का नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। रानी स्वराज्य के लिए लड़ीं, स्वराज्य के लिए मरीं और स्वराज्य की नींव का पत्थर बनीं। अद्भुत, प्रेरणाप्रद, पठनीय ऐतिहासिक औपन्यासिक कृति!
Koi Baat Nahin
- Author Name:
Alka Saraogi
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Description:
“तभी हवा का एक झोंका न जाने क्या सोचकर एक बड़े से काग़ज़ के टुकड़े को शशांक के पास ले आया। उसने घास से उठाकर उसे पढ़ा—‘आदमी का मन एक गाँव है, जिसमें वही एक अकेला नहीं रहता।’ शशांक ने सोचा, आदमी मन में ही तो अपने को और अपनी सारी बातों को छिपाकर रख सकता है...’’
‘कोई बात नहीं’ जैसे एक मंत्र है—हार न मानने की ज़िद और नई शुरुआतों के नाम। समय के एक ऐसे दौर में जब प्रतियोगिता जीवन का परम मूल्य है और सारे निर्णय ताक़तवर और
समर्थ के हाथ में हैं, वेदना, जिजीविषा और सहयोग का यह आख्यान ऐसे तमाम मूल्यों का प्रत्याख्यान है।
मोटे तौर पर इसे शारीरिक रूप से कुछ अक्षम एक बेटे और उसकी माँ के प्रेम और दु:ख की
साझेदारी की कथा के रूप में देखा जा सकता है, पर इसका मर्म एक सुन्दर और सम्मानपूर्ण जीवन की आकांक्षा है, बल्कि इस हक़ की माँग है। शशांक सत्रह साल का एक लड़का है जो दूसरों से अलग है क्योंकि वह दूसरों की तरह चल और बोल नहीं सकता। कलकत्ता के एक नामी मिशनरी स्कूल में पढ़ते वक़्त अपनी ग़ैरबराबरी को जीते हुए, उसका साबिका उन तरह-
तरह की दूसरी ग़ैरबराबरियों से भी होता रहता है, जो हमारे समाज में आसपास कुलबुलाती रहती है। स्कूल में शशांक का एकमात्र दोस्त है—एक एंग्लो-इंडियन लड़का आर्थर सरकार जो उसी की तरह एक क़िस्म का जाति-बाहर या आउटकास्ट है—अलबत्ता बिलकुल अलग कारणों से।
शशांक का जीवन चारों तरफ़ से तरह-तरह के कथा-क़िस्सों से घिरा है। एक तरफ़ उसकी आरती मौसी है, जिसकी प्रायः खेदपूर्वक वापस लौट आनेवाली कहानियों का अन्त और आरम्भ शशांक को कभी समझ में नहीं आता। दूसरी तरफ़ उसकी दादी की कहानियाँ हैं—दादी के अपने घुटन-भरे बीते जीवन की, बार-बार उन्हीं शब्दों और मुहावरों में दोहराई जाती कहानियाँ, जिनका कोई शब्द कभी अपनी जगह नहीं बदलता। लेकिन सबसे विचित्र कहानियाँ उस तक पहुँचती हैं जतीन दा के मार्फ़त, जिनसे वह बिना किसी और के जाने, हर शनिवार विक्टोरिया मेमोरियल के मैदान में मिलता है। ये सभी कहानियाँ आतंक और हिंसा के जीवन से जुड़ी कहानियाँ हैं जिनके बारे में हर बार शशांक को सन्देह होता है कि वे आत्मकथात्मक हैं, पर इस सन्देह के निराकरण का उसके पास कोई रास्ता नहीं है।
तभी शशांक के जीवन में वह भयानक घटना घटती है जिससे उसके जीवन के परखच्चे उड़ जाते हैं। ऐसे समय में यह कथा-अमृत ही है जो उसे इस आघात से उतारता है; साथ ही उसे संजीवन मिलता है उस सरल, निश्छल, अद् भुत प्रेम और सहयोग से जो सब कुछ के बावजूद दुनिया को बचाए रखता आ रहा है। और तब उसकी अपनी यह कथा, जो आरती मौसी द्वारा लिखी जा रही थी, पुनः जीवित हो उठती है—कथामृत के आस्वादन से जागी कथा।
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