Kavi Vandyaghati Gaein Ka Jeevan Aur Mrityu
(0)
Author:
Mahashweta DeviPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
150
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वरिष्ठ बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी का यह लघु उपन्यास ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर रचा गया है, लेकिन कवि वन्द्यघटी गाईं के जन्म और मृत्यु का इतिहास पूर्णतः लेखिका की अपनी मानस-कथा है। कोई ऐतिहासिक कथा नहीं। लेखिका ने इसके माध्यम से एक ऐसे युवक के प्रेम और जिजीविषा की अनूठी कहानी रचने की कोशिश की है जो अपने जन्म और जीवन को लाँघकर एक नई दुनिया का सृजन करना चाहता है, लेकिन उसके हर प्रयास को तत्कालीन समाज ने मात दी। चुयाड़ वंश में जन्मा युवक एक ब्राह्मण कन्या से प्यार करने लगता है लेकिन अन्ततः उसके हिस्से में आता है दु:ख और अपमान।</p> <p>निश्चय ही तरल संवेदना और प्रवाहमयी शिल्प में रची यह कृति एक बार फिर पाठकों को महाश्वेता देवी की रचनात्मक विशिष्टता से रू-ब-रू कराएगी।
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वरिष्ठ बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी का यह लघु उपन्यास ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर रचा गया है, लेकिन कवि वन्द्यघटी गाईं के जन्म और मृत्यु का इतिहास पूर्णतः लेखिका की अपनी मानस-कथा है। कोई ऐतिहासिक कथा नहीं। लेखिका ने इसके माध्यम से एक ऐसे युवक के प्रेम और जिजीविषा की अनूठी कहानी रचने की कोशिश की है जो अपने जन्म और जीवन को लाँघकर एक नई दुनिया का सृजन करना चाहता है, लेकिन उसके हर प्रयास को तत्कालीन समाज ने मात दी। चुयाड़ वंश में जन्मा युवक एक ब्राह्मण कन्या से प्यार करने लगता है लेकिन अन्ततः उसके हिस्से में आता है दु:ख और अपमान।</p>
<p>निश्चय ही तरल संवेदना और प्रवाहमयी शिल्प में रची यह कृति एक बार फिर पाठकों को महाश्वेता देवी की रचनात्मक विशिष्टता से रू-ब-रू कराएगी।
Book Details
-
ISBN9788183611046
-
Pages155
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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बांग्ला की ख्यातनामा लेखक महाश्वेता देवी बांग्ला-पाठकों से अधिक हिन्दी-पाठकों में परिचित व प्रसिद्ध हैं। अपनी यथार्थवादी कृतियों के कारण वे पाठकों के विशाल समूह में आदर की पात्री हैं।
महाश्वेता देवी के उपन्यासों की विषय-वस्तु कुछ इतनी नवीन, अनजानी और आकर्षक होती है कि उसे पढ़ते समय पाठक एक अन्य भाव-जगत् की सैर करने लगता है। अपने ‘सच-झूठ’ उपन्यास में वे एक नई ज़मीन हमारे सामने प्रस्तुत करती हैं।
भारत में नव-धनाढ्य वर्ग की अपनी विचित्र लीला है। अब वे घर-मकान छोड़ प्रोमोटरों द्वारा निर्मित बहुमंज़िली इमारतों के फ़्लैटों में कई-कई मंज़िलों में बसते हैं। इन फ़्लैटों की सजावट उनके धन के प्रदर्शन का साधन है। लेकिन इन बहुमंज़िली इमारतों के पार्श्व में एक पुरानी बस्ती का होना भी आवश्यक है। वह बस्ती न रहे तो फ़्लैटों में बसनेवाली मेमसाहबों की सेवा के लिए दाइयाँ-नौकरानियाँ कहाँ से आएँ। फिर इन दाइयों की साहबों को ज़रूरत रहती है। मेमसाहबों की ग़ैर-मौजूदगी में ये युवती दाइयाँ साहबों के काम आती हैं। ऐसी ही एक दाई और धनिक साहब अर्जुन के चारों ओर घूमती यह कथा धनिक वर्ग के जीवन के गुप्त रहस्यों को प्रकट करती है जहाँ ग़रीबों का शोषण आज भी बरक़रार है। रहस्य-रोमांच से भरपूर एक चमत्कारी कथा।
Namo Andhakaram
- Author Name:
Doodhnath Singh
- Book Type:

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Description:
दूधनाथ सिंह के कथा-साहित्य को पढ़ते हुए लगता है कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर उन्होंने हमेशा अपनी पैनी और सचेत निगाह रखी। वे अपने समीपतर परिवेश में भी विश्वव्यापी बदलावों और संकटों के चिन्ह देख लेते थे। यही कारण है कि उनकी कहानियाँ, उपन्यास विशेष तौर पर किसी विराट परिस्थिति का सूक्ष्म-अध्ययन जैसे मालूम पड़ते हैं।
‘नमो अंधकारं’ भी ऐसी ही एक कथा-कृति है जिसमें उन्होंने समाज, विचारधारा, व्यक्ति की गिरावट आदि बिन्दुओं के सापेक्ष अपने नैतिक क्रोध को अंकित किया है। आज़ादी के बाद भारतीय समाज में जो एक खाता-पीता तबक़ा कभी विचार तो कभी ईश्वर की आड़ में सिर्फ़ अपने आसपास की दुनिया नहीं, बल्कि मानवीयता के अखिल विचार के लिए ख़तरा हो गया है, यह उपन्यास उसका राजनीतिक शोकगीत है। यह एक संवेदनशील व्यक्ति की पतन-गाथा का चित्र खींचता है, जो और भी दुखद है।
दूधनाथ जी कहा करते थे कि ‘कथा-लेखन में वास्तविक ज़़िन्दगी की एक भीतरी छाया रहती है जिसको एक लेखक अपनी कल्पना से रचता है।’ और इस रचने में वह उस भीतरी छाया को बड़े फलक पर सामान्यीकृत करके एक सत्य के रूप में स्थापित करता है। ‘नमो अंधकारं’ पर उठे विवादों के चलते बार-बार पाठकों ने इसे पढ़ा, और इस मान्यता की ताईद की। किसी भी पाठक के लिए यह एक ज़रूरी पाठ है।
The Tale of a Palace
- Author Name:
S.K. Pottekkat +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: English translation by Prema Jayakumar of S.K. Pottekkar's award winning Malayalam novel Oru Deshanthinte Katha. Sahitya Akademi 2015
Angoor
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

- Description: साहित्य में मंज़रनामा एक मुकम्मिल फ़ॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयान अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इन्टरप्रेटेशन हो जाता है। मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ॉर्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इजाफ़ा हो गया है। यह बेहद लोकप्रिय कॉमेडी ‘अंगूर’ का मंज़रनामा है। दो जुड़वाँ जोड़ियों के बीच बुनी घटनाओं की यह कहानी आज भी दर्शकों को उतना ही लुभाती है जितना अपने समय में लुभाती थी। शेक्सपीयर के नाटक ‘द कॉमेडी ऑफ़ एरर्स’ से प्रेरित इस फ़िल्म ने स्वस्थ और चुटीले हास्य का एक मानक फ़िल्म-उद्योग के सामने रखा था। विश्वास है, पुस्तक के रूप में इस फ़िल्म की यह प्रस्तुति पाठकों की स्मृति में रचे चित्रों को पुनः गतिमान करेगी और साथ ही एक उपन्यास का आनन्द भी देगी।
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