Gomutra
(0)
Author:
Geet ChaturvediPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
199
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इक्कीसवीं सदी के पहले दशक के मेरे प्रिय कवि व कथाकार हैं गीत चतुर्वेदी।</p> <p>—नामवर सिंह</p> <p>गीत चतुर्वेदी ने अपने गल्प व कविताओं में अवाँ-गार्द भाव दिखाया है। उनका अध्ययन बेहद विस्तृत है जो कि उनकी पीढ़ी के लिए एक दुर्लभ बात है। यह पढ़ाई उनकी रचनाओं में अनायास और सहज रूप से गुँथी दिखती है। उनकी भाषा व शैली अभिनव है। उनके पास सुलझी हुई दृष्टि है जिसमें क्लीशे नहीं और जो कि वर्तमान विचारधारात्मक खेमों के शिकंजे में भी फँसी हुई नहीं है।</p> <p>—अशोक वाजपेयी</p> <p>गीत के पास बहुत ताज़ा और चमकीली भाषा है। वह विचारवान और स्वप्नदर्शी हैं। अपने कथन में शब्दों की बारीक नक़्क़ाशी के साथ ही गद्य में भी कविता की सुगंध, गीत के लेखन की विशेषता रही है।</p> <p>—ज्ञानरंजन</p> <p>गीत चतुर्वेदी का रचनाकर्म जितना स्थानीय संस्कृति में रचा-बसा है, उतना ही विश्व-साहित्य की बारीकियों में भी। वह हृदय के इतिहासकार हैं, आत्मा के पुरातत्त्ववेत्ता। </p> <p>—अनिता गोपालन
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इक्कीसवीं सदी के पहले दशक के मेरे प्रिय कवि व कथाकार हैं गीत चतुर्वेदी।</p>
<p>—नामवर सिंह</p>
<p>गीत चतुर्वेदी ने अपने गल्प व कविताओं में अवाँ-गार्द भाव दिखाया है। उनका अध्ययन बेहद विस्तृत है जो कि उनकी पीढ़ी के लिए एक दुर्लभ बात है। यह पढ़ाई उनकी रचनाओं में अनायास और सहज रूप से गुँथी दिखती है। उनकी भाषा व शैली अभिनव है। उनके पास सुलझी हुई दृष्टि है जिसमें क्लीशे नहीं और जो कि वर्तमान विचारधारात्मक खेमों के शिकंजे में भी फँसी हुई नहीं है।</p>
<p>—अशोक वाजपेयी</p>
<p>गीत के पास बहुत ताज़ा और चमकीली भाषा है। वह विचारवान और स्वप्नदर्शी हैं। अपने कथन में शब्दों की बारीक नक़्क़ाशी के साथ ही गद्य में भी कविता की सुगंध, गीत के लेखन की विशेषता रही है।</p>
<p>—ज्ञानरंजन</p>
<p>गीत चतुर्वेदी का रचनाकर्म जितना स्थानीय संस्कृति में रचा-बसा है, उतना ही विश्व-साहित्य की बारीकियों में भी। वह हृदय के इतिहासकार हैं, आत्मा के पुरातत्त्ववेत्ता। </p>
<p>—अनिता गोपालन
Book Details
-
ISBN9788119835447
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘त्रिकाल संध्या’ की कथा के केन्द्र में चक दौलतराम नाम के एक गाँव का सिर्फ़ एक दिन है। कथानक गाँव के उन वृद्धों के बारे में है जो अपनी उम्र के चलते अब गाँव की उत्पादन-प्रणाली के लिए अप्रासंगिक हो चुके हैं और उनका दिन गाँव के बाहर मौजूद एक नीम के पेड़ के नीचे बीतता है। उनके जीवन में ऐसा कुछ भी घटित नहीं होता जिसे महत्त्वपूर्ण कहा जा सके, फिर भी उनके जीवन में एक गति निहित है जो गाँव की जीवनधारा और वहाँ के सामाजिक रिश्तों के लिए बहुत अहम है।
उपन्यास के मुख्य पात्र इंदर को अफ़ीम की लत है जिसका उसे कोई पश्चात्ताप नहीं है, लेकिन गाँव की गतिविधियों से वह बेहद जुड़ाव महसूस करता है।
नीम का पेड़ जहाँ बूढ़ों की ठहरी हुई ज़िन्दगी के प्रतीक के तौर पर उपन्यास में आता है, वहीं गाँव के पास से गुज़रने वाली ट्रेन उन्हें गुज़रते वक़्त का भी आभास कराती है। जीवन की सन्ध्या में पहुँचे इन लोगों की स्थिति ज़िन्दगी और मौत के बीच का एक पड़ाव है जो लज्जा और ग्लानि के क्षणों में सुन्दर सिंह द्वारा की गई आत्महत्या के रूपक में अभिव्यक्त भी होती है।
Yaatri-Samgra
- Author Name:
Vaiddnath Mishra 'Yaatri'
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sidha-Sada Rasta
- Author Name:
Rangeya Raghav
- Book Type:

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Description:
‘सीधा-सादा रास्ता’ भगवतीचरण वर्मा के चर्चित उपन्यास ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ की उत्तर-कथा है। इस उपन्यास के पात्र, परिस्थितियाँ, सामाजिक व्यवहार, घर, सम्पत्ति और भूगोल सब वही हैं जो ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ के हैं लेकिन ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ की कहानी ‘सीधा-सादा रास्ता’ के पात्रों का मात्र अतीत है। इस तरह ‘सीधा-सादा रास्ता’ ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ के आगे की कहानी है।
रांगेय राघव को भगवतीचरण वर्मा के उपन्यास में वर्णित पात्रों, परिस्थितियों और विचारों में कुछ विकृतियाँ नज़र आईं, इसलिए उन्होंने उन्हीं पात्रों और परिस्थितियों के आधार पर इस उपन्यास की रचना की। हिन्दी साहित्य के दो दिग्गजों के वैचारिक संघर्ष का प्रतिफलन यह उपन्यास पढ़ना अपने आपमें एक दिलचस्प अनुभव से गुज़रने जैसा है।
प्रस्तुत उपन्यास के लेखक रांगेय राघव के ही शब्दों में, “जैसा जो वर्मा जी का पात्र है, उसको मैंने वैसा ही लिया है, पर वर्मा जी ने चित्र का एक पहलू दिखाया है, मैंने दूसरा भी।”
यह उपन्यास इस तथ्य की पुष्टि करता है कि ‘देश और काल के बिना कुछ भी सीधा...सादा...रास्ता नहीं है।’
अपनी रौ में बहा ले जानेवाली भाषा, अनूठे शिल्प और ज़बर्दस्त अन्तर्वस्तु के कारण यह उपन्यास पाठकों के रचनात्मक सोच को नया आयाम प्रदान करेगा, ऐसी आशा है।
The Carved Cabinet
- Author Name:
Sudha Om Dhingra +1
- Book Type:

- Description: Sometimes life takes everything we give and still feels like it’s giving nothing back. But somewhere within that silence, there lies a moment—a turning point—that reminds us of the power we still hold. This novel is built around that moment. The Carved Cabinet is the English translation of the Hindi novel Naqqashidar Cabinet, originally written by Sudha Om Dhingra. It was an honor for me to bring this powerful story to English readers. As my first work of literary translation, it is more than a linguistic journey—it is an emotional one, too. At its heart, this is the story of a woman who dares to stand up when the world turns its back. Drawn into a life-altering situation, she faces deceit and danger—but instead of breaking, she finds the strength to fight back. Her courage becomes a quiet revolution. Set across the vibrant land of Punjab and the layered realities of American life, the story reminds us that resilience is universal. It belongs to anyone who refuses to be silenced and chooses to rise, again and again. This work is my humble attempt to bring her powerful story to a broader audience through English. -Aravind Anil
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