Family Health Guide
(0)
₹
425
340 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
"कहा गया है—एक सेहत हजार नियामत। अच्छा स्वास्थ्य किसी वरदान से कम नहीं है। स्वास्थ्य अच्छा रखने के लिए हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जो हमें रोगी बनाए, अर्थात् हमें ‘इलाज से बेहतर बचाव’ की नीति का पालन करना चाहिए। लेकिन आज के विषम माहौल में कोई-न-कोई रोग, व्याधि हमें जब-तब आकर घेर लेती है—तब हम क्या करें? तब इस पुस्तक की मदद लें, जिसमें पूरे परिवार को स्वस्थ रखने के सटीक उपाय दिए गए हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि हम सुदीर्घ-स्वस्थ जीवन कैसे पा सकते हैं। यह आपको ऐसे सरल घरेलू उपाय बताती है कि आप उन्हें स्वयं आजमाकर स्वस्थ परिवार, समाज और देश का निर्माण कर सकते हैं। सामान्य रोगों और उनके उपचार की पूरी जानकारी सरलता से समझी और अपनाई जा सकनेवाली विधि से बताई गई है। पूरे परिवार के सुदीर्घ-स्वस्थ जीवन के लिए एक प्रामाणिक और व्यावहारिक ‘फैमिली हैल्थ गाइड’। "
Read moreAbout the Book
"कहा गया है—एक सेहत हजार नियामत। अच्छा स्वास्थ्य किसी वरदान से कम नहीं है। स्वास्थ्य अच्छा रखने के लिए हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जो हमें रोगी बनाए, अर्थात् हमें ‘इलाज से बेहतर बचाव’ की नीति का पालन करना चाहिए। लेकिन आज के विषम माहौल में कोई-न-कोई रोग, व्याधि हमें जब-तब आकर घेर लेती है—तब हम क्या करें?
तब इस पुस्तक की मदद लें, जिसमें पूरे परिवार को स्वस्थ रखने के सटीक उपाय दिए गए हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि हम सुदीर्घ-स्वस्थ जीवन कैसे पा सकते हैं। यह आपको ऐसे सरल घरेलू उपाय बताती है कि आप उन्हें स्वयं आजमाकर स्वस्थ परिवार, समाज और देश का निर्माण कर सकते हैं। सामान्य रोगों और उनके उपचार की पूरी जानकारी सरलता से समझी और अपनाई जा सकनेवाली विधि से बताई गई है। पूरे परिवार के सुदीर्घ-स्वस्थ जीवन के लिए एक प्रामाणिक और व्यावहारिक ‘फैमिली हैल्थ गाइड’।
"
Book Details
-
ISBN9789383111336
-
Pages232
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Chal Khusaro Ghar Aapne
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
...‘कैसी विचित्र पुतलियाँ लग रही थीं मालती की। जैसे दगदगाती हीरे की दो कनियाँ हों, बार-बार वह अपनी पतली जिह्वा को अपने रक्तवर्णी अधरों पर फेर रही थी, यह तो नित्य की सौम्य-शान्त स्वामिनी नहीं, जैसे भयंकर अग्निशिखा लपटें ले रही थी...।’ यह कहानी है कुमुद की, जिसे बिगड़ैल भाई-बहनों और आर्थिक, पारिवारिक परिस्थितियों ने सुदूर बंगाल जाकर एक राजासाहब की मानसिक रूप से बीमार पत्नी की परिचर्या का दुरूह भार थमा दिया है।
मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों का मनोसंसार, निम्न-मध्यवर्गीय परिवार की कमासुत अनब्याही बेटी और उसकी ग्लानि से दबी जाती माँ का मनोविज्ञान, शिवानी के पारस स्पर्श से समृद्ध होकर इस उपन्यास को एक अद्भुत नाटकीय कलेवर और पठनीयता देते हैं।
Chandrakanta Santati : Vols. 1-6
- Author Name:
Devakinandan Khatri
- Book Type:

-
Description:
‘चन्द्रकान्ता’ का प्रकाशन 1888 में हुआ। ‘चन्द्रकान्ता’, ‘सन्तति’, ‘भूतनाथ’—यानी सब मिलाकर एक ही किताब। पिछली पीढ़ियों का शायद ही कोई पढ़ा-बेपढ़ा व्यक्ति होगा जिसने छिपाकर, चुराकर, सुनकर या ख़ुद ही गर्दन ताने आँखें गड़ाए इस किताब को न पढ़ा हो। चन्द्रकान्ता पाठ्य-कथा है और इसकी बुनावट तो इतनी जटिल या कल्पना इतनी विराट है कि कम ही हिन्दी उपन्यासों की हो।
अद्भुत और अद्वितीय याददाश्त और कल्पना के स्वामी हैं—बाबू देवकीनन्दन खत्री। पहले या तीसरे हिस्से में दी गई एक रहस्यमय गुत्थी का सूत्र उन्हें इक्कीसवें हिस्से में उठाना है, यह उन्हें मालूम है। अपने घटना-स्थलों की पूरी बनावट, दिशाएँ उन्हें हमेशा याद रहती हैं। बीसियों दरवाज़ों, झरोखों, छज्जों, खिड़कियों, सुरंगों, सीढ़ियों...सभी की स्थिति उनके सामने एकदम स्पष्ट है। खत्री जी के नायक-नायिकाओं में ‘शास्त्रसम्मत’ आदर्श प्यार तो भरपूर है ही।
कितने प्रतीकात्मक लगते हैं ‘चन्द्रकान्ता’ के मठों-मन्दिरों के खँडहर और सुनसान, अँधेरी, ख़ौफ़नाक रातें।—ऊपर से शान्त, सुनसान और उजाड़-निर्जन, मगर सब कुछ भयानक जालसाज हरकतों से भरा...हर पल काले और सफ़ेद की छीना-झपटी, आँख-मिचौनी।
खत्री जी के ये सारे तिलिस्मी चमत्कार, ये आदर्शवादी परम नीतिवान, न्यायप्रिय सत्यनिष्ठावान राजा और राजकुमार, परियों जैसी ख़ूबसूरत और अबला नारियाँ या बिजली की फुर्ती से ज़मीन-आसमान एक कर डालनेवाले ऐयार सब एक ख़ूबसूरत स्वप्न का ही प्रक्षेपण हैं।
‘चन्द्रकान्ता’ को आस्था और विश्वास के युग से तर्क और कार्य-कारण के युग में संक्रमण का दिलचस्प उदाहरण भी माना जा सकता है।
—राजेन्द्र यादव
Odyssey
- Author Name:
Homer
- Book Type:

-
Description:
विश्वप्रसिद्ध ट्रॉय-युद्ध के महान योद्धा ओडिसियस की घर वापसी का वृत्तान्त है—‘ओडिसी’। प्राचीन यूरोप के महान रचनाकार होमर की कथाकारिता का बेमिसाल नमूना है। यह ग्रन्थ जिसकी विशेषताओं की पुनरावृत्ति परवर्ती कथाकारों से सम्भव नहीं हो सकी।
इस ग्रन्थ ने सम्पूर्ण विश्व के कथा साहित्य को प्रभावित किया है। इसका रचनाफलक व्यापक है जिसमें मानवीय सम्बन्ध, क्रिया-कलाप और समाज के सभी पक्षों का समावेश है।
नित परिवर्तनशील विश्व के सुख-दु:ख और संघर्षों के चित्रण के माध्यम से ‘ओडिसी’ में होमर ने जीवन और जगत् के यथार्थ को उजागर करते हुए यह रेखांकित किया है कि साहस, उत्साह और जिज्ञासावृत्ति से ही मनुष्य सफलता के शिखर पर पहुँचता है।
होमर के रचना-कौशल ने दृश्य-जगत् की वास्तविकताओं को कुछ इस तरह सहेजा है कि यह ग्रन्थ साहित्य ही नहीं अपितु इतिहास, पुरातत्त्व, समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र और मनोविज्ञान के खोजी विद्वानों के आकर्षण की वस्तु बन गया है।
जटिल संरचना के बावजूद ‘ओडिसी’ का कथाप्रवाह पाठकों का औत्सुक्य बनाए रखता है। अपनी इन विशेषताओं के कारण ही ई.पू. 850 के आसपास जन्मे होमर की यह कृति आज भी प्रेरणादायी बनी हुई है।
Krishnavtar : Vol. 3 : Paanch Pandav
- Author Name:
K. M. Munshi
- Book Type:

-
Description:
पौराणिक चरित्रों को आधार बनाकर अनेक श्रेष्ठतर आधुनिक उपन्यासों की रचना करनेवाले सुप्रसिद्ध गुजराती कथाकार कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का भारतीय कथा-साहित्य में अपना एक विशिष्ट स्थान है। अपनी कृतियों में उन्होंने सुदूर अतीत का जो विस्तृत जीवन-फलक प्रस्तुत किया है, वह जितना विराट् है उतना ही आकर्षक, साथ ही वह वैज्ञानिकता की कसौटी पर भी खरा उतरता है।
मुंशी जी का ‘कृष्णावतार’ एक वृहत् उपन्यास है—सात खंडों में विभक्त। ‘पाँच पाण्डव’ तीसरे खंड का हिन्दी रूपान्तर है। अन्य खंडों की ही तरह अगर यह परस्पर सम्बद्ध है तो अपने आपमें एक पूरी कथा भी है। पाँचों पाण्डवों के जन्म, विकास और संघर्षों-उपलब्धियों की इस रोचक-रोमांचक गाथा में आर्यावर्त्त के महान नायक श्रीकृष्ण की विलक्षण ऐतिहासिक भूमिका बड़ी कलात्मकता से रेखांकित हुई है। पुराकालीन आर्यों की संघर्षशील गतिविधियों, नागों की अरण्य-संस्कृति और ‘राक्षस’ नाम से पुकारे जानेवाले प्रस्तरयुगीन मानवों की आदिम जीवनचर्या के जीवन्त चित्र इसमें पूरी तरह से मुखर हैं।
Deaf Girl
- Author Name:
Adesh Kumar
- Book Type:

- Description: 20-year-old Adesh Kumar has quite a story. Internet and technology don’t care for age, and this youngster, having found a penchant for how the web works, started working very early in his life, at the tender age of 13. And by 17, he had started his first company- foodzo, an online food delivery service for college students. Unfortunately, the model has shut down, and the company will soon be out with its new model. He is also Co-founder of skypix labs, a software development firm based in Delhi and Dehradun.
Dudiya : Tere Jalte Hue Mulk Mein
- Author Name:
Vishwash Patil
- Book Type:

-
Description:
शाश्वत सत्य यह था कि आदिवासी जंगल की सन्तान हैं। मगर वस्तुस्थिति यह थी कि उनमें से किसी के पास भी जंगल की जमीन का कोई पट्टा नहीं लिखा था। न ही उनमें इतनी समझ थी कि उस जमीन को अपने नाम लिखाकर रखें। अपने पूर्वजों की तरह वह उस जमीन पर खेती करते थे। जंगल से जीवन यापन करते थे। लेकिन साठ के दशक में अचानक वन अधिकारी नए नियम-कायदों की लाठी से लैस होकर वहाँ घुस गए। आदिवासियों को चूल्हे में जलाने के लिए, जंगलों की सूखी लकड़ियाँ बीनने तक से रोका जाने लगा। उनके भेड़-बकरियों को जंगल में चराने पर रोक लगा दी गई। आदिवासी स्तब्ध रह गए कि यह क्या! जहाँ वे अपना हक समझते थे, पीढ़ी-दर-पीढ़ी जिन जंगलों में रहते थे, वहाँ किसका राज आ गया।
–इसी पुस्तक से
Himachal Pradesh Ki Lokkathayen
- Author Name:
Dr. Ashu Phull
- Book Type:

- Description: This book has no description
Charu Chandralekh
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Book Type:

-
Description:
चारु चन्द्रलेख आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की कलम से निकली हुई एक गहन संवेद्य कृति है। इसमें 12वीं-13वीं सदी के भारत का व्यक्ति और समाज बारीकी से व्यक्त हुआ है।
समय के उस दौर में देश के लिए विदेशी आक्रमण का प्रतिरोध एक बड़ी चुनौती का दायित्व था लेकिन देश की समूची आध्यात्मिक तथा इतर शक्तियाँ पुरातन अन्धविश्वास के रास्ते नष्ट हो रही थीं। ऐसे में समाज के पुनर्गठन का काम पूरी तरह से उपेक्षित था और नए मूल्यों के सृजन की जरूरत की अनदेखी हो रही थी।
Anna Karenina : Vols. 1-2
- Author Name:
Leo Tolstoy
- Book Type:

- Description: ‘आन्ना कारेनिना’ महाकाव्यात्मक त्रासदी को नए दिक्-काल सन्दर्भों में पुनर्परिभाषित करने का दबाव बनानेवाला यह महान उपन्यास अपराध या पाप के नैतिक प्रश्न को गहरे ऐतिहासिक-सामाजिक सन्दर्भों में प्रस्तुत करते हुए, समाज और स्वयं अपने जीवन के प्रति प्रत्येक व्यक्ति के उत्तरदायित्व को चिन्तन के केन्द्र में उपस्थित करता है। इसके साथ ही, यह तत्कालीन रूसी जीवन के सभी बुनियादी और केन्द्रीय अन्तर्विरोधों को भी चित्रित करता है। सामाजिक जीवन की समस्याओं तथा कला और दर्शन के प्रश्नों के साथ ही तोल्स्तोय ने इस उपन्यास में परिवार और नैतिक जीवन की समस्याओं पर केन्द्रित करते हुए स्त्री-प्रश्न को भी गहरी दार्शनिक चिन्ता के साथ प्रस्तुत किया है। उल्लेखनीय है कि इस उपन्यास के प्रकाशन के बाद, तोल्स्तोय गम्भीर विचारधारात्मक संकट के दौर से गुज़रे, जिसकी परिणति के तौर पर, बल के द्वारा बुराई के अप्रतिरोध का सिद्धान्त प्रतिपादित करते हुए भी, वे मौजूदा व्यवस्था की सभी बुनियादों को ख़ारिज करने तथा सामाजिक ढाँचे की निर्मम-बेलाग आलोचना करने की स्थिति तक जा पहुँचे। ‘आन्ना कारेनिना’ का दायरा हालाँकि ‘युद्ध और शान्ति’ की अपेक्षा संकुचित है, लेकिन इस उपन्यास के चरित्र अधिक जटिल हैं। वे अधिक संवेदनशील प्रतीत होते हैं और उनके आन्तरिक तनाव और चिन्ताएँ उपन्यास में समग्र जीवन की अनिश्चितता और अस्थायित्व के परिवेश को परावर्तित करती हैं। ‘आन्ना कारेनिना’ एक हद तक आत्मकथात्मक उपन्यास भी है। इसे लिखते हुए तोल्स्तोय अपने समय और अपने ख़ुद के जीवन के बारे में स्वयं ही स्पष्ट होने की प्रक्रिया से गुज़र रहे थे। उपन्यास में जिन समस्याओं को उठाने और हल करने की कोशिश की गई थी, उनके प्रति तोल्स्तोय के सरोकार ने 1870 के दशक के अन्त में उन्हें एक नए विचारधारात्मक संकट के भँवर में धकेल दिया और पितृसत्तात्मक किसानी नज़रिए के प्रति उनकी पक्षधरता भी संकटग्रस्त हो गई।
Khambhon Per Tiki Khushabu
- Author Name:
Narendra Nagdev
- Book Type:

-
Description:
भवन-निर्माण के व्यवसाय में गहरी जड़ें जमा चुके, हर क़ीमत पर कांट्रैक्ट हासिल कर लेनेवाले कुख्यात टेंडर माफ़िया की आतंककारी कार्यप्रणाली तथा उन्हें रोकने को कटिबद्ध, एक समर्पित, सृजनशील वास्तुकार का उनके साथ जोखिम-भरे संघर्ष का दस्तावेज़...
संघर्ष में एक सकारात्मक तथ्य को रेखांकित करता कि सृष्टि वह दानव नहीं चलाता जो अपने अहंकारवश बाढ़ ला देता है पूरे शहर में, वरन् उस चिड़िया के पंख चलाते हैं जो चोंच में तिनका दबाकर, तिनके में पानी की एक बूँद उठाकर, बार-बार फेंक आती है शहर के बाहर ताकि धीरे-धीरे बाढ़ से मुक्त हो सके शहर...
आर्किटेक्चर क्षेत्र के सघन व्यावसायिक घटनाक्रम के साथ-साथ एक लोककथात्मक फ़ैंटेसी की महीन बुनावट और विध्वंसक शक्तियों के गाल पर तमाचा-सा जड़ता एक अतियथार्थवादी चरम...
वर्तमान और अतीत के बीच, कल्पना और यथार्थ के बीच, सही और ग़लत के बीच झूलता हुआ सा, एक मोहक शिल्प तथा भाषा के सहज प्रवाह से युक्त नरेन्द्र नागदेव का आत्मीय, संवेदनशील प्रस्तुतीकरण—‘खम्भों पर टिकी ख़ुशबू...’
Mahasamrat : Pehla Khand—Jhanjhawaat
- Author Name:
Vishwash Patil
- Book Type:

-
Description:
छत्रपति शिवाजी के बारे में कौन नहीं जानता! महाराष्ट्र में स्वाधीनता का अलख जगाने वाले और आगे चलकर सम्पूर्ण भारत के लिए आत्मसम्मान, संघर्ष और साहस का प्रतीक बन जाने वाले शिवाजी पर अनेक लेखकों ने कलम चलाई है। कई विदेशी इतिहासकारों और लेखकों ने भी उनकी जीवनियाँ और ऐतिहासिक वृत्तान्त लिखे हैं।
‘महासम्राट’ उन सबसे अलग है। मराठी के विख्यात उपन्यासकार विश्वास पाटील द्वारा लिखित यह महाआख्यान उनके सुदीर्घ शोध और अपने नायक के प्रति गहन प्रेम और श्रद्धा का परिणाम है। लेखक ने इस वृहत उपन्यास में उन तथ्यों पर भी प्रकाश डाला है जो अभी तक लेखकों की निगाह से छूट जा रहे थे। मसलन, शिवाजी के व्यक्तित्व और चरित्र के शिल्पकार, उनके पिता शाहजी राजे भोसले की उनके जीवन में भूमिका। इस उपन्यास में न सिर्फ उनके, बल्कि तत्कालीन इतिहास से प्राप्त अनेक पात्रों और घटनाओं को भी पर्याप्त जगह दी गई है ताकि आज का पाठक शिवाजी की सम्पूर्ण छवि को अपनी कल्पना में साकार कर सके।
विस्तृत शोध और शिवाजी से जुड़े अनेक स्थलों की यात्राओं के कारण ही यह सम्भव हो पाया है कि उपन्यासकार के रूप में लेखक ने जहाँ कल्पना का हाथ पकड़ा है, तो उसे भी वे इतिहास-सम्मत तथ्यों के रास्ते पर ही लेकर बढ़े हैं। लगातार शोध के चलते लेखक को शिवाजी से सम्बन्धित इतनी सामग्री मिली कि एक उपन्यास की बजाय उन्होंने एक उपन्यास-शृंखला की योजना बनाई है, जिसकी यह पहली कड़ी है—‘झंझावात’। शिवाजी के सम्पूर्ण जीवन को एक उपन्यास में समेटना यूँ भी सम्भव नहीं है।
मूल मराठी में इस उपन्यास को एक मील का पत्थर माना गया है। इसका एक कारण इसकी तथ्यात्मकता है, और दूसरा आख्यान के रूप में इसकी परिपक्वता, भाषा-सामर्थ्य और शैली-सौष्ठव जिसको मूल पाठ की तारतम्यता के साथ इस हिन्दी अनुवाद में प्रस्तुत किया गया है।
Tatvamasi
- Author Name:
Dhruv Bhatt
- Book Type:

-
Description:
‘तत्त्वमसि’ उपन्यास एक ऐसे नायक की कथा है जो सहसा और सहज ही अपने आपको खोजने की एक प्रक्रिया में ख़ुद को पाता है। लेकिन यह ‘आत्मान्वेषण’ ज़िम्मेदारियों से दूर एकान्त में नहीं, बल्कि संघर्ष करते मनुष्यों के बीच प्रकृति के मध्य घटित होता है। मनुष्य को संसाधन माननेवाला यह नायक मनुष्य से ‘मानव’ के रूप में साक्षात्कार करता है। पश्चिम के प्रभावों एवं संस्कारों में लिपटा यह नायक इसी प्रक्रिया में अपने भीतर वर्षों की सोई संस्कृति की जड़ों को अंकुरित होते हुए देखता, अनुभव करता है। इस ‘आत्मान्वेषण’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नायक इस बात से अनभिज्ञ है कि वह ‘आत्मान्वेषण’ की प्रक्रिया में है। विरोध से आरम्भ हुई उसकी यात्रा स्वीकृति में निःशेष होती है।
नर्मदा की भौगोलिक, सांस्कृतिक और जीवन्त उपस्थिति इस उपन्यास की विशिष्टता है।
यथार्थ, फंतासी और कल्पना एक-दूसरे में ऐसे घुल-मिल गए हैं कि यह उपन्यास पढ़ना अपने आपमें एक विशिष्ट अनुभव की प्रतीति कराता है।
जंगल की आग, जंगल की बारिश, जंगल की चुप्पी, जंगल का शोर, जंगल के दिन, जंगल की रातें, जंगलों में रहते आदिवासी, उनकी संस्कृति और परम्पराएँ—सभी कुछ बड़े कौशल के साथ इस उपन्यास में बुना गया है। इसी अर्थ में यह एक भारतीय उपन्यास है।
Bhavbhuti Katha
- Author Name:
Mahesh Katare
- Book Type:

-
Description:
भवभूति आठवीं सदी में हुए थे। नाटककार थे, कवि थे। संस्कृत में लिखे उनके नाटकों को कालिदास की रचनाओं के बराबर माना जाता है।
यह उपन्यास उनके जीवन पर आधारित है, जिसकी मुख्य कथाधारा ब्राह्मण होने के बावजूद नाट्य-कर्म में उनकी प्रवृत्ति और उसके चलते अपने समाज में उनके संघर्ष के साथ-साथ चलती है।
महेश कटारे इससे पूर्व भर्तृहरि पर केन्द्रित एक अत्यन्त लोकप्रिय उपन्यास की रचना कर चुके हैं। भारत के सांस्कृतिक इतिहास के उल्लेखनीय पड़ावों को औपन्यासिक कलेवर में प्रस्तुत करते हुए वे तत्कालीन तथ्यों और आज के प्रश्नों को बराबर ध्यान में रखते हैं। देश, काल और पात्रानुकूल भाषा तथा जीवन-व्यवहार के विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए वे एक तरफ जहाँ अतीत को मूर्तिमान कर देते हैं, वहीं मानव-समाज और व्यवस्था के लिए हमेशा प्रासंगिक रहने वाले मुद्दों को भी अनदेखा नहीं करते।
भवभूति के बहुवर्णी चरित्र पर केन्द्रित यह उपन्यास भी उसका अपवाद नहीं है।
Uday Ravi
- Author Name:
B. Puttaswamayya
- Book Type:

-
Description:
‘उदय-रवि’, ‘क्रान्ति-कल्याण’ उपन्यास मालिका का पहला खंड है। कन्नड़ के विशिष्ट रचनाकार बी. पुट्टस्वामय्या मूलतः नाटक लिखने में रुचि लेते थे।...किन्तु नाटक की कई सीमाएँ होती हैं। नाटक-मंडली के अभिनेताओं की संख्या, संवाद कहने में उनकी क्षमता आदि बातों की ओर नाटककार को ध्यान देना पड़ता है। उपन्यास में इस प्रकार की कोई सीमा नहीं होती। इसलिए एक बड़ा कैनवस का उपयोग करके एक बृहत् उपन्यास की रचना करने की पुट्टस्वामय्या ने जो योजना बनाई, उसी का परिणाम ‘उदय-रवि’, ‘राज्यपाल’, ‘कल्याणेश्वर’, ‘नागबन्ध’, ‘अधूरा सपना’ तथा ‘क्रान्ति-कल्याण’ उपन्यासों का सिलसिला रहा। ये छह के छह अलग-अलग उपन्यास भी हैं और सब मिलाकर एक ही उपन्यास भी।
बसवेश्वर के युग के जनजीवन का चित्रण करनेवाले इन उपन्यासों की मालिका समवेत रूप में एक विशेष प्रकार का ऐतिहासिक उपन्यास है। सामाजिक जीवन को व्यक्त करनेवाले इस उपन्यास के लिए अभिलेख तथा लिखित साहित्य से सन्दर्भों को चुन लिया गया है। चौंकानेवाली बात यह थी कि इस उपन्यास लेखन के लिए पुट्टस्वामय्या ने एक हज़ार अभिलेखों का अध्ययन किया था।
‘उदय-रवि’—ई.सं. 1950—में तैलप (तृतीय) के सिंहासनारोहण से लेकर बसवेश्वर के मंत्री बनने तक की घटनाओं का चित्रण है।
सिद्धहस्त लेखक बी. पुट्टस्वामय्या ने प्रांजल भाषा में एक युग को साकार कर दिया है। भालचन्द्र जयशेट्टी का सतर्क अनुवाद उपन्यास को मूल आस्वाद से अभिन्न रखने में समर्थ सिद्ध हुआ है।
The Parallel Love
- Author Name:
Sid Crish
- Book Type:

- Description: This is the love story of two girls, Aditi and Zara. One is from Pakistan and other is from India. They meet and fall in love with each other in a foreign land, and they make a promise to fight every demon of society for the sake of their love.But destiny has other plans for their love story. When their love is at its peak, a tragedy befalls Aditi, which forces her to return to her home country and ghost herself. After months of no communication, Zara decides to visit India in search of her love. What happens when Zara lands in aditi’s country to seek her love? Will she be able to find her love in the country of billions of people? Will society ever accept their homosexual relationship? Or will they remain as two parallel lines, moving alongside each other But without a destination and never destined to meet?.
Sardhana Ki Begham
- Author Name:
Rangnath Tiwari
- Book Type:

-
Description:
ऐतिहासिक उपन्यास में अपने समय की कहानी होती है जिसमें विराट काल-पुरुष के आँसू और मुस्कान, समय की सीमा को लाँघकर अविकल रूप से छलकते रहते हैं।
‘सरधाना की बेग़म’ एक ऐतिहासिक उपन्यास है जिसमें बेग़म समरू और आयरिश सोल्जर जॉर्ज थॉमस की रूहानी कशमकश साकार हो उठी है।
‘सरधाना की बेग़म’ एक अजीबो-ग़रीब शख़्सियत। सियासत जिसके ख़ून में रची-बसी थी और मक्कारी जिसके वजूद का हिस्सा। मैदाने-जंग में वह जब मर्दाना भेष में अपनी कवायदी फ़ौज और लाव-लश्कर के साथ उतरती तो अच्छे-अच्छों के छक्के छूट जाते।
दिल्ली का बादशाह शाहआलम उसे अपनी बेटी कहता और शाहआलम के वकील-ए-मुतल्लक (वजीर) माधोजी सिन्धिया उसे अपनी समशिरा बहन अर्थात् सगी बहन कहते और जिससे राखी बँधवाते।
‘‘संगीत उसकी साँसों में था
और नृत्य की लय उसके तन-बदन में
सूफ़ी तसव्वुफ़ उसका ईमान था
और ईसा मसीह की प्रेम-संवेदना
उसकी कहानी इकादत’’
जाट, मराठा, पठान, जर्मन, फ़्रांसीसी, आयरिश तथा अंग्रेज़ जांबाज़ों के हौसलों को बार-बार चकमा देकर अपनी बहादुरी और हुस्नोजमाल का भरम क़ायम रखनेवाली क़यामत का नाम है—‘सरधाना की बेग़म’, जिसके ज़िक्र के बिना अठारहवीं शताब्दी के उत्तरी भारत की अन्दरूनी कहानी अधूरी रह जाती है।
Royal Bengal Rahasya
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

-
Description:
'रॉयल बंगाल रहस्य' महान फ़िल्मकार और अनूठे लेखक सत्यजित राय द्वारा रचित लोकप्रिय जासूस किरदार फेलूदा के सर्वाधिक प्रशेसित कारनामों में शुमार है।
अमूमन शहरी परिवेश के रहस्यों को उजागर करते नजर आने वाले फेलूदा इस उपन्यास में एक निपट ग्रामीण इलाके में पहुँच जाते हैं, जहाँ आदमखोर बाघ की गुत्थी सुलझाने के लिए उन्हें जंगल में भी जाना पड़ता है। वहाँ बाघ तो मिलता है, पर वह आदमखोर नहीं होता। इसके साथ ही वहाँ एक ऐसा राज भी उजागर होता है, जिसका अनुमान फेलूदा को कतई नहीं था। और तब स्पष्ट होता है कि जानवरों के मिजाज को समझना उतना मुश्किल नहीं है, जितना इनसानों का!
अपने रहस्य-रोमांच में आखिरी पंक्ति तक बाँधे रखने वाला उपन्यास!
Lal Peeli Zameen
- Author Name:
Govind Mishra
- Book Type:

-
Description:
रचना अच्छी, कहीं-कहीं बहुत अच्छी, अच्छी के अतिरिक्त सशक्त लगी। न यह स्थानाबद्ध है और न समयाबद्ध...यह रचना की विशेषता है। जिन पात्रों और घटनाओं को लेखक ने लिया है, पात्रों के जो कार्यकलाप हैं, उसके पीछे की मार्मिक कारण-जगत की खोज लेखक को निरंतर रही है। अपने को औरों में खोजने की वृत्ति...जो ‘लाल पीली जमीन’ की औपन्यासिक दृष्टि है...वह मुझे विश्वसनीय प्रतीत होती है।
–जैनेन्द्र कुमार
पढ़ने में रुचिकर और सिर्फ पाठक की दृष्टि से कहूँ तो यह एक सफल, सशक्त और एक स्थायी प्रभाव छोड़नेवाला उपन्यास है। इसके कई चरित्र और घटनाएँ मुझे याद हैं और उनकी याद रहेगी। आंचलिकता केवल भाषिक परिवेश तक सीमित है। उपन्यास की भाषा ने मुझे बहुत आकृष्ट किया। इस उपन्यास ने
बहुत-से ऐसे शब्द हिन्दी को दिए हैं जो ज्यादा आसानी से आज की साधु हिन्दी ग्रहण कर सकती है। भाषा की दृष्टि से इस उपन्यास की यह महत्त्वपूर्ण देन रही।
–अज्ञेय
बुंदेलखंड का जन्म से मरण तक कोई ऐसा पहलू नहीं है जो इस उपन्यास में न आया हो और सो भी ‘फर्स्ट हैंड’। इस उपन्यास के कई गुण हैं मगर सबसे बड़ा गुण है, गोविन्द मिश्र के बयान का अन्दाज जो बातों को शुरू से अन्त तक कहानी बनाए रखता है। यह पुस्तक हमारे उपन्यास साहित्य में एक नक्षत्र की तरह चमकती रहेगी।
–भवानी प्रसाद मिश्र
उपन्यास की घटनाएँ बहुत सजीव हैं। कोई पात्र ‘स्टॉक’ नहीं जान पड़ता, बराबर एक साफ, सुडौल, विशिष्ट, महीन से महीन रेखाओं से उकेरा हुआ व्यक्ति सामने आता है।
–निर्मल वर्मा
Gahri Nadiya Naav Purani
- Author Name:
Ushakiran Khan
- Book Type:

-
Description:
पुनकला को नहीं मालूम कि उसने अपने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर, और लीला को अपने यहाँ शरण देकर कितना बड़ा काम किया। उसका सारा जीवन एक मैनेजर की तरह बीत गया। उसने कर्त्तव्य को टाला नहीं, और प्रेम को भी मन भरकर जिया, लेकिन बस मन में ही भरकर, जो उसे मिला वह ऐसा नहीं था जो सिर्फ उसका हो।
वह दरअसल समय था, अपनी गति से खिलता-बढ़ता समय जिसमें सब शामिल थे : समाज बदलने के अपने बड़े सपने को पूरा करने के लिए उसे छोड़कर गया उसका पति सुधीर हजारी; छीतन हजारी जिसने उसके बाद उसे अपने घर की मालकिन बनाया और अपने बच्चों की माँ; उसके बच्चे जिन्होंने उसे अपनी माँ ही माना; लीला, जिसने उसके आँचल तले ठौर पाया; और वह काल जिस की विराट गोद में बच्चे पल रहे थे, बड़े हो रहे थे, फिर उनके बच्चे; धरती जो धीरे-धीरे थिर हो रही थी, बंजर से उपजाऊ; शिक्षा जो सदियों से पीड़ित-प्रताड़ित जनगण को आगे बढ़ने का रास्ता दे रही थी। यह सब दादी पुनकला का था।
बिहार के देश-काल में अवस्थित इस उपन्यास का जेपी आन्दोलन और आपातकाल का दौर है; लेकिन कथा यह बिहार के पिछड़े दलित समाज की और उसके तेजी से बदलते सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक ढांचे की है। वहाँ बाढ़ है, गरीबी है, गुंडई है, लेकिन सपने भी हैं, बदलाव की आकांक्षा भी है, वे युवा भी हैं जिनमें शिक्षा की, आगे बढ़ने की, और बदलाव की गहरी तलब है, जो अपने सपनों को अपनी ही धरती में बोना चाहते हैं।
दादी पुनकला ने बहुत धीमे समय को भी देखा है, और अब इस वक्त को भी देख रही है। उनके पास सब कुछ है, लेकिन सुधीर हजारी नहीं। और सुधीर हजारी जो पहले नक्सल होते हैं, फिर जेपी के साथ जुड़ते हैं, और आपातकाल के बाद अपने गाँव आकर अपने लोगों को दिशा देते हैं; उनके पास भी सभी कुछ है, लेकिन पुनकला नहीं, जो आठ-नौ साल की उम्र में उनकी पत्नी बनी थी, और जवानी में कदम रखते ही जिसे उन्होंने मुक्त कर दिया था। दोनों के बीच बदलाव का एक बड़ा हलचल-भरा फलक है लेकिन वे दोनों आज भी वहीं खड़े हैं जहाँ अलग हुए थे।
Sahsra Netradhari Nayak
- Author Name:
Karma Ura
- Book Type:

-
Description:
अंग्रेज़ी के इस पहले भूटानी उपन्यास ‘सहस्र नेत्रधारी नायक’ (द हीरो विद ए थाउजैंड आइज़) की कहानी दूसरे भूटान नरेश के राज्यकाल के समय की है, जिसके केन्द्र में लामा से राजदरबारी बने व्यक्ति का जीवन है। साथ ही साथ लुप्तप्राय होती संस्कृति का चित्रण है, जो अब इतिहास है।
उपन्यास में कई घटनाक्रम हूबहू हैं, कहीं-कहीं लेखक कर्मा ऊरा ने कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल किया है, जिससे उपन्यास की रोचकता और पठनीयता बढ़ गई है।
उपन्यास के नायक का जन्म भूटान के एक ग्रामीण शिंखार लामा परिवार में हुआ था किन्तु स्थितियाँ ऐसी बदलीं कि यह लामा द्वितीय भूटान नरेश के राजदरबार में परिचर नियुक्त हो गया। राजपरिवार और शासन-व्यवस्था के साथ यह साधारण नायक भूटान के बहुआयामी जीवन से पाठक का परिचय कराता है।
नायक के चालीस वर्षों के जीवनकाल की अवधि भूटान के इतिहास में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। कर-प्रणाली में सुधार, राष्ट्रीय असेम्बली की स्थापना, भूटान के संयुक्त राष्ट्र में प्रवेश के अलावा आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक जीवन में विकास—इस काल की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं। लेखक ने तत्कालीन राजदरबार के एक परिचर की दिनचर्या, दरबारी गतिविधियों, परम्पराओं, मूल्यों, धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रेम-सम्बन्धों और षड्यंत्रों का भी संवेदनशीलता के साथ चित्रण किया है। अत्यन्त महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक उपन्यास।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book