Baramasi
(0)
Author:
Gyan ChaturvediPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
350
₹ 280 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
ज्ञान चतुर्वेदी ने परसाई, शरद जोशी, रवीन्द्रनाथ त्यागी और श्रीलाल शुक्ल की व्यंग्य-परम्परा को न केवल आगे बढ़ाया है, वरन् कई अर्थों में उसे और समृद्ध किया है। विषय-वैभिन्नय तथा भाषा और शैलीगत प्रयोगों के लिए वे हिन्दी व्यंग्य में ‘हमेशा ही कुछ नया करने को आतुर’ लेखक के रूप में विख्यात हैं। लकीर पीटने के वे सख़्त खिलाफ हैं–चाहे वह स्वयं उनकी अपनी खींची हुई ही क्यों न हो !<br />‘बारामासी’ बुन्देलखंड के एक छोटे से कस्बे के, एक छोटे से आँगन में पल रहे छोटे-छोटे स्वप्नों की कथा है–वे स्वप्न, जो टूटने के लिए ही देखे जाते हैं और टूटने के बाद तथा बावजूद देखे जाते हैं। स्वप्न देखने की अजीब उत्कंठा तथा उन्हें साकार करने के प्रति धुँधली सोच और फिर-फिर उन्हीं स्वप्नों को देखते जाने का हठ–कथा न केवल इनके आसपास घूमती हुई मानवीय सम्बन्धों, पारम्परिक शादी-ब्याह की रस्मों, सडक़छाप कस्बाई प्यार, भारतीय कस्बों की शिक्षा-पद्धति, बेरोजगारी, माँ-बच्चों के बीच के स्नेहिल पल तथा भारतीय मध्यवर्गीय परिवार के जीवन-व्यापार को उसके सम्पूर्ण कलेवर में उसकी समस्त विडम्बनाओं-विसंगतियों के साथ पकड़ती है, साथ ही बुन्देलखंडी परिवेश के श्वास-श्वास में स्पन्दित होते सहज हास्य-व्यंग्य को भी समेटती चलती है।
Read moreAbout the Book
ज्ञान चतुर्वेदी ने परसाई, शरद जोशी, रवीन्द्रनाथ त्यागी और श्रीलाल शुक्ल की व्यंग्य-परम्परा को न केवल आगे बढ़ाया है, वरन् कई अर्थों में उसे और समृद्ध किया है। विषय-वैभिन्नय तथा भाषा और शैलीगत प्रयोगों के लिए वे हिन्दी व्यंग्य में ‘हमेशा ही कुछ नया करने को आतुर’ लेखक के रूप में विख्यात हैं। लकीर पीटने के वे सख़्त खिलाफ हैं–चाहे वह स्वयं उनकी अपनी खींची हुई ही क्यों न हो !<br />‘बारामासी’ बुन्देलखंड के एक छोटे से कस्बे के, एक छोटे से आँगन में पल रहे छोटे-छोटे स्वप्नों की कथा है–वे स्वप्न, जो टूटने के लिए ही देखे जाते हैं और टूटने के बाद तथा बावजूद देखे जाते हैं। स्वप्न देखने की अजीब उत्कंठा तथा उन्हें साकार करने के प्रति धुँधली सोच और फिर-फिर उन्हीं स्वप्नों को देखते जाने का हठ–कथा न केवल इनके आसपास घूमती हुई मानवीय सम्बन्धों, पारम्परिक शादी-ब्याह की रस्मों, सडक़छाप कस्बाई प्यार, भारतीय कस्बों की शिक्षा-पद्धति, बेरोजगारी, माँ-बच्चों के बीच के स्नेहिल पल तथा भारतीय मध्यवर्गीय परिवार के जीवन-व्यापार को उसके सम्पूर्ण कलेवर में उसकी समस्त विडम्बनाओं-विसंगतियों के साथ पकड़ती है, साथ ही बुन्देलखंडी परिवेश के श्वास-श्वास में स्पन्दित होते सहज हास्य-व्यंग्य को भी समेटती चलती है।
Book Details
-
ISBN9788126708673
-
Pages248
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Ashawari
- Author Name:
Arun Bagchee
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Apsara
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

-
Description:
‘अप्सरा’ निराला की कथा–यात्रा का प्रथम सोपान है। अप्सरा–सी सुन्दर और कला–प्रेम में डूबी एक वीरांगना की यह कथा हमारे हृदय पर अमिट प्रभाव छोड़ती है। अपने व्यवसाय से उदासीन होकर वह अपना हृदय एक कलाकार को दे डालती है और नाना दुष्चक्रों का सामना करती हुई अतन्त: अपनी पावनता को बनाए रख पाने में समर्थ होती है। इस प्रक्रिया में उसकी नारी–सुलभ कोमलताएँ तो उजागर होती ही हैं, उसकी चारित्रिक दृढ़ता भी प्रेरणाप्रद हो उठती है।
इस उपन्यास में तत्कालीन भारतीय परिवेश और स्वाधीनता–प्रेमी युवा–वर्ग की दृढ़ संकल्पित मानसिकता का चित्रण हुआ है, जो कि महाप्राण निराला की सामाजिक प्रतिबद्धता का एक ज्वलन्त उदाहरण है।
The Forbidden Line
- Author Name:
Mayank Kashyap
- Book Type:

- Description: Virat is completely different from what his dad wants him to be. With Ankit & Saurav, who are like brothers to him and his girlfriend Manya, his life is perfect until one fateful day when his world falls apart.
The Doctor's Heart : A Chamber Of Sorrow
- Author Name:
Mannit Mann
- Book Type:

- Description: Should I enter this ward? Should | tend to the sick? Or should I succumb to the stark reality that surrounds us? Can a doctor have such thoughts? Does a doctor’s heart have the right to feel Low after choosing his profession? Aarav is equipped with knowledge and compassion, two qualities that make him an outstanding doctor. Hailing from Chandigarh, he is employed at the Medict Health Care Hospital as Assistant Clinical Coordinator, where he is trusted and loved by both his seniors and peers for his dedication to his work. He is engaged to Ishika, who is the cynosure of his life. But before they can marry, a catastrophic disease storms into their lives and turns it upside- down. Does Aarav handle this catastrophe, both at professional and personal levels? Or does he break down? What goes on in a doctor’s head when he pushes aside his personal life to give his all to his patients? This book is not a mere story; it’s an unforgettable journey into a doctor’s heart
Until We Meet Again
- Author Name:
Ajitabha Bose
- Rating:
- Book Type:

- Description: How far will you go to meet your love again? More often than not, we rekindle our hopes in the desire to hold onto things which are to be let go. More often than not, that thing is love. That's what brought together shivangi and Karan. Two people who were Poles apart from each other But shared one common thread of love. While Karan was a simple guy from next door, shivangi was a girl with big dreams. Though she had an orthodox family, their love dared to be United. Their passion had another life to run to, and so did they, until fate played its twisted game and a mishap knocked them on the door. Bestselling author ajitabha Bose brings you another heartwarming tale of love, trust and a forever you might have never read.
Uttar Bayan Hai
- Author Name:
Vidya Sagar Nautiyal
- Book Type:

-
Description:
“अपने लोगों की यह कथा जिसे अनेक वर्षों तक मैंने अपने भीतर जिया है...”—विद्यासागर नौटियाल
‘उत्तर बायां है’ हिमाच्छादित बुग्यालों और ऊँचे, विस्तृत चरागाहों में बरसात के दौरान बर्फ़ के पिघलने के बाद उग आनेवाली मखमली घास और असंख्य ख़ूबसूरत फूलों की ख़ुशबू के बीच अपने पशुओं के साथ विचरण करनेवाली घुमन्तू जाति गूजर और पर्वतीय क्षेत्र के भेड़पालकों और भैंसवालों के समूहों के आपसी सम्बन्धों और परिधि पर बसर कर रहे लोगों के जीवन का साक्षात्कार है। पर्वत शृंग पर बसे भेड़पालकों के गाँव चाँदी और उसकी घाटी में
बसे रैमासी के निवासियों के पेशों, रीतियों और प्रथाओं में पर्याप्त भिन्नता हो जाती है। चाँदी के आकाश में चाँद खुलकर प्रकट होकर कभी अपनी आभा नहीं फैला पाता। चाँदीवासियों का आदिकाल से यह विश्वास चला आया है कि कुछ दुष्ट ग्रह, जो उनके आकाश में विचरण करते हैं, उनके चाँद को हमेशा अपने दबाव में रखते आए हैं, जैसे राहु पूर्णमासी के चाँद को अपने दबाव में कर लेता है। उन दुष्ट ग्रहों के संचालक रैमासी में निवास करते हैं। दिन-रात अथक परिश्रम करनेवाले चंदवालों की कमाई को सदियों से निठल्ले रैमासीवाले हड़प करते आए हैं। सदरू, करणू, हुकम के जीवन में खीजी, कन्हैया, देवीप्रसाद, धनसिंह और रथी सेठ जैसे लोग हमेशा संकट पैदा करते आए हैं, और इन निरीह चंदवालों की क़ीमत पर राजकीय कर्मचारियों, अधिकारियों की मौज-मस्ती, बेकसूर लोगों पर सत्ता के अत्याचार, न्यायालयों की हास्यास्पद भूमिका, भेड़पालकों, ग्रामवासियों, गूजरों के पशुवत् जीवन की झलकियाँ; आयशा, सकीना और हसीना की बेबस ज़िन्दगी के चित्र, हाशिए पर पड़े लोगों के अनवरत संघर्ष, ग़रीबी, उनके सपने, सभ्य तथा कथित विकसित समुदायों द्वारा उनका बाहरी-भीतरी
विनाश! ‘उत्तर बायां है’ में अपने मर्मांतक वर्णन से विद्यासागर नौटियाल इन घुमन्तू और सीमान्त लोगों के जीवन का प्रामाणिक तथा ज़िन्दगी से भरपूर सन्धान करते हैं।उपन्यास बेचैन करनेवाले यथार्थ और ज़मीनी सच्चाइयों, आपसी रिश्तों को मानवीय गरिमा देने के बीच एक संयत भाषा में आन्दोलित होता रहता है और इन ‘उपेक्षितों’ की पीड़ा से ‘मुख्यधारा’ को आत्यन्तिक मार्मिकता से साक्षात्कार कराता है।
—हम्माद फ़ारूक़ी।
Tatari Veeran
- Author Name:
Dino Buzzati
- Book Type:

- Description: सन् 1940 में प्रकाशित ‘तातारी वीरान’ दीनो बुत्साती की एक उत्कृष्ट कृति है। इसमें कुशल लेखक ने मँजी शैली के माध्यम से मानव-जीवन में व्याप्त बेतुकेपन (absurdity) को अपनी वैचित्र्यपूर्ण भाव-संवेदनाओं के ताने-बानों से पिरोया है। उपन्यास में व्यक्त दर्शन एक तरह का अस्तित्ववादी चिन्तन है। कथानक की बुनावट की दृष्टि से यह एक अतियथार्थवादी रचना है जिसमें कथा-संयोजन स्वैरकल्पना (fantasy) के माध्यम से होता है। ‘तातारी वीरान’ के पात्र जीवन-भर अपने द्वारा ही निर्मित भ्रमों के क़ैदी बनकर एक आशा में पूरी ज़िन्दगी गुज़ार देते हैं—जीवन में कुछ बड़ा कर पाने की निर्मूल आशा में! जीवन के हर आयाम में छाया बेतुकापन वस्तुत: एक सम्भावित भय से परिचालित रहता है। मानवीय सम्बन्धों की आधारभूमि एक-दूसरे के बीच की ऐसी ‘जानकारी’ पर निर्मित होती है जो ठोस नहीं अपितु दलदल युक्त है—जिसमें बेतुकेपन की अन्त:सलिला निरन्तर बहती रहती है।
Ekda Naimisharanye
- Author Name:
Amritlal Nagar
- Book Type:

-
Description:
एक पुण्य-स्थान के रूप में नैमिषारण्य का उल्लेख बहुत सारे पुराणों में प्राप्त होता है। यही वह स्थान है जहाँ ऋषि-मुनि, कोई समस्या उपस्थित होने पर सभा करते थे। यहीं अधिक यज्ञ-यजन हुए।
यह नागर जी की एकमात्र पौराणिक, पर श्रेष्ठ कृति है। सारे पात्र पौराणिक हैं, कल्पित और अकल्पित भी। पौराणिक गाथाओं का ही इसमें उद्घाटन हुआ है। पौराणिक और सर्वख्यात नारद तो इसके मुख्य पात्रों में हैं। नारद इसमें वेद-वेदान्तों, ज्योतिष, व्याकरण, छन्द-शास्त्र स्मृति-ग्रन्थों यहाँ तक कि गान और नृत्य के अद् भुत ज्ञाता के रूप में प्रस्तुत हुए हैं।
नारद का ज्ञान नागर का ही ज्ञान है, और यह तथ्य इस प्रसिद्ध उपन्यासकार के असामान्य स्वाध्याय और ज्ञान-गरिमा को प्रकाश में लाता है।
उपन्यास पुनर्जागरण का सन्देशवाहक है। मुख्य पात्र हैं भार्गव सोमाहुति।
Vishva Dharma Sammelan
- Author Name:
Laxminiwas Jhunjhunwala
- Book Type:

- Description: इसके बाद यह प्रस्ताव पारित किया गया। यहाँ बहुधा यह कहा गया और मैं भी यह कहता रहा हूँ कि हम लोगों ने विगत सत्रह दिनों में जैसा आयोजन देखा है ऐसा अब इस पीढ़ी को तो उनके जीवनकाल में पुन: देखने का अवसर नहीं प्राप्त होगा; पर जिस प्रकार के उत्साह व शक्ति का संचार इस सम्मेलन ने किया है, लोग दूसरे धर्म सम्मेलन के स्वप्न देखने लगे हैं, जो इससे भी अधिक भव्य व लोकप्रिय होगा। मैंने अपनी बुद्घि लगाई है कि अगले धर्म सम्मेलन के लिए उचित स्थान कौन सा हो। जब मैं अपने अत्यंत नम्र जापानी भाइयों को देखता हूँ तो मेरा मन कहता है कि पैसिफिक महासागर की शांति में स्थित टोकियो शहर में अगला धर्म सम्मेलन किया जाए, पर मैं यह सोचता हूँ कि अंग्रेजी शासन के अधीन भारतवर्ष में यह सम्मेलन हो। पहले मैंने बंबई शहर के बारे में सोचा, फिर सोचा कि कलकत्ता अधिक उपयुक्त रहेगा, पर फिर मेरा मन गंगा के तट की प्राचीन नगरी वाराणसी पर जाकर स्थिर हो गया, ताकि भारत के सबसे ओंधक पवित्र स्थल पर ही हम मिलें। अब यह भव्य सम्मेलन कब होगा? हम आज यह निश्चय कर विदा ले रहे हैं कि बीसवीं सदी में अगला भव्य सम्मेलन वाराणसी में होगा तथा इसकी भी अपयक्षता जॉन हेनरी बरोज ही करेंगे।
Safed Ghora Kala Sawar
- Author Name:
Hrideyesh
- Book Type:

-
Description:
हृदयेश ने अपने इस उपन्यास ‘सफेद घोड़ा काला सवार’ में भारतीय न्याय–व्यवस्था की शव–परीक्षा की है। यह उपन्यास इस व्यवस्था के सारे अन्तर्विरोधों तथा छद्मों को केवल उजागर ही नहीं करता, सामान्य जन के लिए प्रचलित न्याय–प्रणाली की निरर्थकता पर तीव्र टिप्पणी भी करता है। उपन्यास का फलक इतना व्यापक है कि इसमें संगुम्फित छोटी–छोटी कहानियाँ इसे न्याय के नाम पर रचे गए चक्रव्यूह का वृहद् मार्मिक दस्तावेज़ बनाती हैं।
उपन्यास में विषयगत नवीनता है, शिल्पगत ताज़गी है और है सार्थक दृष्टि का कलात्मक उपयोग। वस्तुत: यह उपन्यास हिन्दी के उन कुछ श्रेष्ठ उपन्यासों में से है जो स्वतंत्रता के बाद के वर्षों में यथार्थवादी दृष्टि से लिखे गए हैं और जो पाठकों को समसामयिक परुष यथार्थ से परिचित कराने के साथ–साथ उनको बहुत कुछ सोचने को भी मजबूर करते हैं।
Shekhar Ek Jeevani : Vol-1
- Author Name:
Sachchidananda Hirananda Vatsyayan 'Ajneya'
- Book Type:

- Description: शेखर : एक जीवनी’ अज्ञेय का सबसे अधिक पढ़ा गया उपन्यास; हिन्दी की एक ऐसी कथा-कृति जिसे हर पीढ़ी का पाठक जरूरी समझता आया है और जिससे गुजरने के बाद वह जीवन की एक भरी-पूरी छलछलाती नदी में डूबकर निकल आने जैसा अनुभव करता है। उपन्यास का नायक शेखर स्वयं अज्ञेय हैं अथवा कोई और व्यक्ति, यह हमेशा कौतूहल का विषय रहा है। कुछ लोग इसे पूरी तरह उनकी आत्मकथात्मक कृति मानते हैं, लेकिन स्वयं अज्ञेय का कहना है कि यह 'आत्म-जीवनी’ नहीं है। वे कहते हैं कि 'आत्म-घटित’ ही आत्मानुभूति नहीं होता, पर-घटित भी आत्मानुभूत हो सकता है यदि हममें सामथ्र्य है कि हम उसके प्रति खुले रह सकें।...शेखर में मेरापन कुछ अधिक है।’ लेकिन यह कथा ऐसी नहीं है कि इसे 'एक आदमी की निजू बात’ कहकर उड़ाया जा सके। अज्ञेय इसे अपने युग और समाज का प्रतिबिम्ब मानते हैं। इसमें 'मेरा समाज और मेरा युग बोलता है,...वह मेरे और शेखर के युग का प्रतीक है।’ बहुआयामी और संश्लिष्ट चरित्रों के साथ अपने समय-समाज और उनके बीच अपनी अस्मिता को आकार देते व्यक्ति की वेदना को तीव्र और आवेगमयी भावात्मकता के साथ अंकित करते इस उपन्यास के नायक शेखर के बारे में अज्ञेय की टिप्पणी है : 'शेखर कोई बड़ा आदमी नहीं है, वह अच्छा भी आदमी नहीं है। लेकिन वह मानवता के संचित अनुभव के प्रकाश में ईमानदारी से अपने को पहचानने की कोशिश कर रहा है।...उसके साथ चलकर आप पाएँगे कि आपके भीतर भी कहीं पर एक शेखर है जो...जागरूक, स्वतंत्र और ईमानदार है, घोर ईमानदार।’
Shakkar
- Author Name:
K. Chinnappa Bharti
- Book Type:

-
Description:
सुप्रसिद्ध समाजवादी चिन्तक और अप्रतिम नेता ई.एम.एस. नम्बूदिरिपाद के शब्दों में, चिन्नप्प भारती ने अपने पूर्ववर्ती उपन्यास ‘संगम’ और ‘दाहम’ में किसानों के हृदय में पनप रही वर्ग-चेतना और संगठन-बोध की जिस बेल को पल्लवित होते दिखाया था, ‘शक्कर’ में आकर वह परवान चढ़ जाती है। इस रचना में वर्ग-संघर्ष और क्रान्ति के सिद्धान्त को परिभाषित करते हुए एक सुलझी हुई रणनीति प्रस्तुत की गई है।
दो भागों में विभक्त इस उपन्यास का कथानक रोचक और सुगठित है। मिल-मालिक और मज़दूरों के संघर्ष और टकराव में मेहनतकश किसानों की भूमिका को रेखांकित करना कृषि-प्रधान देश भारत की यथार्थ परिस्थितियों के नितान्त अनुरूप है। अंग्रेज़ सरकार की फूट डालकर राज करने की नीति को अपनाते हुए चीनी मिल-मालिक मज़दूर यूनियन के प्रयासों को नाकाम करने के लिए पुत्र के नेतृत्व में समान्तर यूनियन बनाकर किसानों को मज़दूरों के ख़िलाफ़ बरगलाता है। हड़ताल के पहले चरण में किसानों का संघ मज़दूरों के ख़िलाफ़ लड़ता है। इस टकराव में यूनियन नेता कन्दसामी घायल होकर अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं। उन्हें अस्थायी रूप से निलम्बित किया जाता है। नेता-विहीन मज़दूर-यूनियन की बागडोर सँभालने के लिए युवा नेता वीरन आगे आता है। कन्दसामी द्वारा यूनियन गतिविधियों में प्रशिक्षित वीरन मज़दूरों और किसानों को संगठित करके उन्हें वर्ग-संघर्ष की ओर प्रेरित करता है। इस बीच यूनियन का चुनाव आता है जिसमें उम्मीदवार के रूप में खड़े नेता को मज़दूरों और प्रबन्ध के सहयोग की आवश्यकता होती है। इस प्रयास के चलते एक समझौता होता है जिसमें मज़दूरों की ज़्यादातर माँगे मंजूर कर ली जाती हैं और कन्दसामी को नौकरी पर बहाल किया जाता है।
इस प्रधान कथा के अन्दर एक रोमांटिक उपकथा भी है। कन्दसामी की बहन और युवा मज़दूर नेता वीरन के बीच अंकुरित प्रेम अन्त में विवाह में परिणत होता है।
‘शक्कर’ उपन्यास में चिन्नप्प भारती ने मालिक-मज़दूर के बीच हो रहे टकराव का तर्कपूर्ण विश्लेषण किया है। यही नहीं, इस उपन्यास में मज़दूरों की क्रान्ति के सिद्धान्त को वास्तविकता के धरातल पर परिभाषित करके एक सुलझी हुई रणनीति को रूप देने में भारती को पूरी कामयाबी मिली है।
Ho Gayi Aadhi Raat
- Author Name:
Amitabh Bagchi
- Book Type:

-
Description:
मनुष्य-मन की महीन पड़ताल और सामाजिक-राजनीतिक व मानवीय परिस्थितियों के बारीक तंतुजाल से जूझती भाषा, वह पहली चीज़ें हैं जो इस उपन्यास को एक यादगार अनुभव बनाती हैं। पात्रों और एक विस्तृत काल-खंड में फैली घटनाओं के सूक्ष्मतम घटकों तक पहुँचने की लेखक की साहसी आकांक्षा जो इस औपन्यासिक वितान की पंक्ति-पंक्ति में न्यस्त है वह इस अनुभव को और घनीभूत करती है। साथ ही आज़ादी के पहले और बाद के भारतीय समाज, और उसकी भावगत-मूल्यगत बनावट की संवेदनशील व सटीक समझ भी जो सहज ही इस पाठ को एक बड़ी रचना के रूप में स्थापित कर देती है।
कहानी लाला मोतीचंद और उसके तीन बेटों की है। बेटों में एक अपने पिता की तरह ही व्यावसायिक बुद्धि का धनी दीनानाथ है, दूसरा धन-संग्रह के प्रति नितांत उदासीन और कविहृदय दीवानचंद है और तीसरा मक्खन लाल जो आगरा में लाला के एजेंट किशोरी की पत्नी से हुआ है और विचारों से मार्क्स और भगतसिंह का अनुयायी है। इनकी कहानी के साथ ही जुड़ी है लाला मोतीचंद के सेवक मांगेराम और उसकी तीन पीढ़ियों की कहानी जिनका पुरुषार्थ लाला, उनकी हवेली और उनकी औलादों की सेवा के संदर्भ में साकार होता है। कथा
के इन दो छोरों के बीच एक कहानी पुरस्कारप्राप्त हिन्दी उपन्यासकार विश्वनाथ की भी है जो छोटे-छोटे टापुओं की तरह इस धारा के बीच-बीच में पत्रों की शक्ल में उभरती रहती है। अनुमान लगाया जा सकता है कि मुख्य कथा और उसके पात्र विश्वनाथ की ही रचना हैं और लेखक के रूप में उनके सफल और महत्वाकांक्षी लेकिन पिता और पति के रूप में उनके पश्चाताप-ग्रस्त जीवन का ही प्रतीकात्मक विस्तार हैं जो हिन्दी-उर्दू कविता के उद्धरणों के साथ इन पत्रों में खुलता चलता है।
इस गझिन परन्तु रोचक कथा-संकुल में हमें अपने समाज और देश का लगभग हर पहलू देखने को मिल जाता है। हमारा परिवार, उसकी सत्ता-संरचना, एक प्राचीन जातीय समूह के रूप में हमारी धार्मिक व नैतिक बुनावट, अलग-अलग तबकों के स्त्री-पुरुषों की नियति, संपत्ति की अवधारणा और उसके प्रति भारतीय मानस के विविधवर्णी और अंतर्विरोधी दृष्टिकोण, औपनिवेशिक भारत में व्यवसाय तथा उद्यमिता के स्वरूप और अंततः मनुष्य की नियति के लोमहर्षक आलेख, इन सबको हम इस उपन्यास के विराट कैनवस पर अपने तमाम संभव शेड्स के साथ चलते-फिरते देख पाते हैं। बिना किसी अतिरंजना के कहा जा सकता है कि यह एक परिपक्व भारतीय उपन्यास है।
Lal Peeli Zameen
- Author Name:
Govind Mishra
- Book Type:

-
Description:
रचना अच्छी, कहीं-कहीं बहुत अच्छी, अच्छी के अतिरिक्त सशक्त लगी। न यह स्थानाबद्ध है और न समयाबद्ध...यह रचना की विशेषता है। जिन पात्रों और घटनाओं को लेखक ने लिया है, पात्रों के जो कार्यकलाप हैं, उसके पीछे की मार्मिक कारण-जगत की खोज लेखक को निरंतर रही है। अपने को औरों में खोजने की वृत्ति...जो ‘लाल पीली जमीन’ की औपन्यासिक दृष्टि है...वह मुझे विश्वसनीय प्रतीत होती है।
–जैनेन्द्र कुमार
पढ़ने में रुचिकर और सिर्फ पाठक की दृष्टि से कहूँ तो यह एक सफल, सशक्त और एक स्थायी प्रभाव छोड़नेवाला उपन्यास है। इसके कई चरित्र और घटनाएँ मुझे याद हैं और उनकी याद रहेगी। आंचलिकता केवल भाषिक परिवेश तक सीमित है। उपन्यास की भाषा ने मुझे बहुत आकृष्ट किया। इस उपन्यास ने
बहुत-से ऐसे शब्द हिन्दी को दिए हैं जो ज्यादा आसानी से आज की साधु हिन्दी ग्रहण कर सकती है। भाषा की दृष्टि से इस उपन्यास की यह महत्त्वपूर्ण देन रही।
–अज्ञेय
बुंदेलखंड का जन्म से मरण तक कोई ऐसा पहलू नहीं है जो इस उपन्यास में न आया हो और सो भी ‘फर्स्ट हैंड’। इस उपन्यास के कई गुण हैं मगर सबसे बड़ा गुण है, गोविन्द मिश्र के बयान का अन्दाज जो बातों को शुरू से अन्त तक कहानी बनाए रखता है। यह पुस्तक हमारे उपन्यास साहित्य में एक नक्षत्र की तरह चमकती रहेगी।
–भवानी प्रसाद मिश्र
उपन्यास की घटनाएँ बहुत सजीव हैं। कोई पात्र ‘स्टॉक’ नहीं जान पड़ता, बराबर एक साफ, सुडौल, विशिष्ट, महीन से महीन रेखाओं से उकेरा हुआ व्यक्ति सामने आता है।
–निर्मल वर्मा
Hindi Ki Manak Vartani
- Author Name:
Dr. K.C. Bhatia +1
- Book Type:

- Description: "हिंदी की मानक वर्तनी—कैलाशचंद्र भाटिया प्रस्तुत पुस्तक में हिंदी के तीन अत्यधिक व्यावहारिक पक्षों को रखा गया है—वर्तनी, विरामचिह्न तथा प्रूफ-संशोधन। उक्त तीनों पक्ष एक-दूसरे से इतने अधिक संबद्ध हैं कि पृथक् करने में कठिनाई है। प्रूफ-संशोधन में जहाँ वर्तनी का शुद्ध रूप रखना पड़ता है, वहीं विरामचिह्नों के ठीक प्रयोग का। ‘मानक हिंदी वर्तनी’ का कार्यक्षेत्र केंद्रीय हिंदी निदेशालय का है, जिनकी सिफारिशों को इसमें समुचित स्थान दिया गया है। वर्तनी का क्षेत्र मात्र शब्दों तक नहीं है, उसमें संक्षिप्त रूप, प्रतीक, व्यक्ति-स्थान नामों का अपार भंडार है। वर्तनी से ही विरामचिह्न जुड़े हुए हैं। यह सर्वविदित है कि पूर्ण विराम ‘।’ के अतिरिक्त सभी चिह्न अंग्रेजी के संसर्ग से प्राप्त हुए हैं। व्याकरण की विभिन्न पुस्तकों में यत्किंचित् सामग्री विरामचिह्नों पर भी है। इस पुस्तक में पहली बार इन्हें विस्तार से समझाया गया है; जिससे विद्यार्थी व सुधी पाठक लाभान्वित होंगे। प्रूफ-संशोधन कार्य उक्त दोनों से जुड़ा हुआ है। हिंदी पत्रकारिता में भी अब इसकी आवश्यकता का अनुभव किया जाने लगा है। साधारणत: हिंदी लेखक इस पुस्तक से लाभान्वित होंगे ही, साथ ही विद्वानों को इस दिशा में अंतिम रूप से निर्णय लेने में चिंतन का अवसर मिलेगा। "
Cliff Hanger
- Author Name:
P Sawhney
- Book Type:

- Description: This collection of short stories explores the cynical and frenzied side of human behaviour. Read this book today.
Pahala Padav
- Author Name:
Shrilal Shukla
- Book Type:

-
Description:
‘राग दरबारी’ जैसे कालजयी उपन्यास के रचयिता श्रीलाल शुक्ल हिन्दी के वरिष्ठ और विशिष्ट कथाकार हैं। उनकी क़लम जिस निस्संग व्यंग्यात्मकता से समकालीन सामाजिक यथार्थ को परत-दर-परत उघाड़ती रही है, ‘पहला पड़ाव’ उसे और अधिक ऊँचाई सौंपता है।
श्रीलाल शुक्ल ने अपने इस उपन्यास को राज-मज़दूरों, मिस्त्रियों, ठेकेदारों, इंजीनियरों और शिक्षित बेरोज़गारों के जीवन पर केन्द्रित किया है और उन्हें एक सूत्र में पिरोए रखने के लिए एक दिलचस्प कथाफलक की रचना की है। सन्तोषकुमार उर्फ़ सत्ते परमात्मा जी की बनती हुई चौथी बिल्डिंग की मुंशीगीरी करते हुए न सिर्फ़ अपनी डेली-पैसिंजरी, एक औसत गाँव-देहात और ‘चल-चल रे नौजवान’ टाइप ऊँचे सम्बोधनों की शिकार बेरोज़गार ज़िन्दगी की बखिया उधेड़ता है, बल्कि वही हमें जसोदा उर्फ़ ‘मेमसाहब’ जैसे जीवन्त नारी चरित्र से भी परिचित कराता है। इसके अलावा उपन्यास के प्रायः सभी प्रमुख पात्रों को लेखक ने अपनी गहरी सहानुभूति और मनोवैज्ञानिक सहजता प्रदान की है और उनके माध्यम से विभिन्न सामाजिक-आर्थिक अन्तर्विरोधों, उन्हें प्रभावित-परिचालित करती हुई शक्तियों और मनुष्य-स्वभाव की दुर्बलताओं को अत्यन्त कलात्मकता से उजागर किया है।
वस्तुतः श्रीलाल शुक्ल की यह कथाकृति बीसवीं शताब्दी के अन्तिम दशकों में ईंट-पत्थर होते जा रहे आदमी की त्रासदी को अत्यन्त मानवीय और यथार्थवादी फलक पर उकेरती है।
Bhagawan Parshuram
- Author Name:
K. M. Munshi
- Book Type:

- Description: आर्य-संस्कृति का उषःकाल ही था, जब भृगुवंशी महर्षि जमदग्नि-पत्नी रेणुका के गर्भ से परशुराम का जन्म हुआ। यह वह समय था जब सरस्वती और हषद्वती नदियों के बीच फैले आर्यावर्त्त में यदु और पुरु, भरत और तृत्सु, तर्वसु और अनु, द्रह्यू और जन्हु तथा भृगु जैसी आर्य जातियाँ निवसित थीं और जहाँ वसिष्ठ, विश्वामित्र, जमदग्नि, अंगिरा, गौतम और कण्व आदि महापुरुषों के आश्रमों से गुंजरित दिव्य ऋचाएँ आर्यधर्म का संस्कार-संस्थापन कर रही थीं। लेकिन दूसरी ओर सम्पूर्ण आर्यावर्त्त, नर्मदा से मथुरा तक शासन कर रहे हैहयराज सहस्रार्जुन के लोमहर्षक अत्याचारों से त्रस्त था। ऐसे में युवावस्था में प्रवेश कर रहे परशुराम ने आर्य-संस्कृति को ध्वस्त करने वाले हैहयराज की प्रचंडता को चुनौती दी और अपनी आर्यनिष्ठा, तेजस्विता, संगठन-क्षमता, साहस और अपरिमित शौर्य के बल पर विजयी हुए। संक्षेप में कहें तो यह उपन्यास एक युगपुरुष की ऐसी शौर्यगाथा है जो किसी भी युग में अन्याय और दमन के सक्रिय प्रतिरोध की प्रेरणा देती रहेगी।
Tabadala
- Author Name:
Vibhuti Narayan Rai
- Book Type:

-
Description:
बहुराष्ट्रीय निगमों की बढ़ती मौजूदगी और कॉरपोरेट दुनिया में कार्य-संस्कृति पर लगातार एक नैतिक मूल्य के रूप में ज़ोर दिए जाने के बावजूद भारतीय मध्यवर्ग की पहली पसन्द आज भी सरकारी नौकरी ही है, तो उसका सम्बन्ध, उस आनन्द से ही है जो ग़ैर-ज़िम्मेदारी, काहिली, अकुंठ स्वार्थ और भ्रष्टाचार से मिलता है; और हमारे स्वाधीन पचास सालों में सरकारी नौकरी इन सब ‘गुणों’ का पर्याय बनकर उभरी है। इन्हीं के चलते तबादला-उद्योग वजूद में आया तो आज दफ़्तरों से लेकर राजनेताओं के बँगलों तक, शायद बाक़ी कई उद्योगों से ज़्यादा, फल-फूल रहा है।
इस उद्योग की जिन बारीक डिटेल्स को हम बिना इसके भीतर उतरे, बिना इसका हिस्सेदार बने, नहीं जान सकते, उन्हीं को यह उपन्यास इतने तीखे और मारक व्यंग्य के साथ हमारे सामने रखता है कि हमें उस हताशा को लेकर नए सिरे से चिन्ता होने लगती है जो भारतीय नौकरशाही ने पिछले पचास सालों में आम जनता को दी है। इस उपन्यास का वाचक व्यंग्य के उस ठंडे कोने में जा पहुँचा है जहाँ ‘कोई उम्मीदबर नहीं आती’। उपन्यास पढ़कर हम सचमुच यह सोचने पर बाध्य हो जाते हैं कि अगर यह हताशा वास्तव में हमारे इतने भीतर तक उतर चुकी है तो फिर रास्ता है किधर!
Kamyogi
- Author Name:
Sudhir Kakkar
- Book Type:

-
Description:
काल : चौथी सदी, भारत का स्वर्णयुग। स्थान वाराणसी के बाहर जंगलों में बना एक आश्रम। ‘कामसूत्र’ के रचयिता वात्स्यायन हर सुबह अपने एक युवा शिष्य को अपने बचपन और युवावस्था की कहानियाँ सुनाते हैं। यह शिष्य इस महान ऋषि की जीवनी लिखना चाहता है। वात्स्यायन के जीवन के बारे में बहुत कम जानकारियाँ उपलब्ध हैं। यह युवा अध्येता इन जानकारियों को अपने मस्तिष्क में दर्ज करता जाता है। साथ ही ‘कामसूत्र’ के उन प्रासंगिक श्लोकों को भी उनमें गूँथता जाता है, जिन्हें उसने कंठस्थ कर लिया है। जो कथा उभरती है, वह अद्भुत है। वात्स्यायन की माँ अवंतिका और मौसी कौशाम्बी के एक वेश्यालय में प्रसिद्ध गणिकाएँ हैं। उसे और उनके विभिन्न प्रेमियों से वात्स्यायन काम-कलाओं की पहली छवियाँ देखते हैं, जो उनके मन पर अमिट छाप छोड़ती है।
सुधीर कक्कड़ अपनी विशिष्ट सूक्ष्म दृष्टि से इस कथा के उन अनगिनत पात्रों के मन की गहराइयों तक पहुँचते हैं, जो अपनी पहचान पाने के विभिन्न चरणों से गुज़र रहे हैं। इस तरह वासना और कामुकता का एक सशक्त आख्यान आकार लेता है, जिसमें प्राचीन कला का सम्मोहन भी है और आश्चर्यजनक विसंगतियाँ भी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book