Sone Ki Sikdi : Roop Ki Nathiya
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Author:
Rashmi VajpeyiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
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संताल आदिवासी समुदाय झारखंड की आबादी का एक मुख्य हिस्सा है। यहाँ के तेजी से बदलते सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में संताल लोगों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती जा रही है। संताल परगना के प्रमण्डलीय मुख्यालय दुमका को झारखण्ड की उप-राजधानी का दर्जा दिया गया है जो इसकी महत्ता को स्वतः उजागर करता है। आज की बदली हुई स्थिति में संताल आदिवासियों के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहन शोध एवं अध्ययन की आवश्यकता प्रबल होती जा रही है। संताल आदिवासियों के बीच अलग-अलग मौसम त्योहार और अवसरों के लिए अलग-अलग गीतों के विधान हैं। दोङ अर्थात् विवाह गीतों के अतिरिक्त सोहराय दुरूमजाक् बाहा लांगड़े रिजां मतवार डान्टा और कराम संताल परगना के प्रमुख लोकगीत हैं। बापला अर्थात् विवाह संताल आदिवासियों के लिए मात्र एक रस्म ही नहीं वरन् एक वृहत् सामाजिक उत्सव की तरह है जिसका वे पूरा-पूरा आनन्द उठाते हैं। इसके हर विधि-विधान में मार्मिक गीतों का समावेश है। इन गीतों में जहाँ आपको आदिवासी जीवन की सहजता सरलता उत्फुल्लता तथा नैसर्गिकता आदि की झलक मिलेगी वहीं उनके जीवन-दर्शन सामाजिक सोच और मान्यता जिजीविषा तथा अदम्य आतंरिक शक्ति से भी अनायास साक्षात्कार हो जाएगा। परम्परागत संताली जीवन विविधतापूर्ण है जिसकी एक झलक प्रस्तुत करने की दिशा में हमने यह प्रयास किया है।
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संताल आदिवासी समुदाय झारखंड की आबादी का एक मुख्य हिस्सा है। यहाँ के तेजी से बदलते सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में संताल लोगों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती जा रही है। संताल परगना के प्रमण्डलीय मुख्यालय दुमका को झारखण्ड की उप-राजधानी का दर्जा दिया गया है जो इसकी महत्ता को स्वतः उजागर करता है। आज की बदली हुई स्थिति में संताल आदिवासियों के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहन शोध एवं अध्ययन की आवश्यकता प्रबल होती जा रही है।
संताल आदिवासियों के बीच अलग-अलग मौसम त्योहार और अवसरों के लिए अलग-अलग गीतों के विधान हैं। दोङ अर्थात् विवाह गीतों के अतिरिक्त सोहराय दुरूमजाक् बाहा लांगड़े रिजां मतवार डान्टा और कराम संताल परगना के प्रमुख लोकगीत हैं।
बापला अर्थात् विवाह संताल आदिवासियों के लिए मात्र एक रस्म ही नहीं वरन् एक वृहत् सामाजिक उत्सव की तरह है जिसका वे पूरा-पूरा आनन्द उठाते हैं। इसके हर विधि-विधान में मार्मिक गीतों का समावेश है। इन गीतों में जहाँ आपको आदिवासी जीवन की सहजता सरलता उत्फुल्लता तथा नैसर्गिकता आदि की झलक मिलेगी वहीं उनके जीवन-दर्शन सामाजिक सोच और मान्यता
जिजीविषा तथा अदम्य आतंरिक शक्ति से भी अनायास साक्षात्कार हो जाएगा। परम्परागत संताली जीवन विविधतापूर्ण है जिसकी एक झलक प्रस्तुत करने की दिशा में हमने यह प्रयास किया है।
Book Details
-
ISBN9788126710096
-
Pages115
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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"अंतरिक्ष तथा ब्रह्मांड वस्तुत : एक ही शब्द के भिन्न-भिन्न रूप हैं, जिनसे उस असीम- अनंत सत्ता का बोध होता है, जिसे ' नेति-नेति ' कहा गया है । जहाँ मनुष्य की आँखें नहीं देख पातीं, जहाँ दूरबीन भी विफल हो जाती है-वह आकाश अंतरिक्ष है । वह अपरिमित, अनंत और असीम है । वह अनेक कल्पनाओं से भरा हुआ क्षेत्र है । विश्व की उत्पत्ति कैसे हुई, उसका अंत कैसे होता है, उसका विस्तार कहाँ तक है, अंतरिक्ष में विभिन्न ग्रहों का स्वरूप क्या है, तारे क्या हैं, अंतरिक्ष की शून्यता क्या है, हमारी पृथ्वी का अंतरिक्ष में क्या स्थान है. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्या है और अंतरिक्ष का अध्ययन कैसे किया जाता है- ये ऐसे प्रश्न हैं, जिनका उत्तर मिलेगा प्रस्तुत पुस्तक ' अंतरिक्ष की रोचक बातें ' में; जिसे लेखका ने प्रामाणिक सामग्री के आधार पर, जनरुचि को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है । विश्वास है, पुस्तक हमारे पाठको को पसंद आएगी ।
1000 Rasayan Vigyan Prashnottari
- Author Name:
Sitaram Singh
- Book Type:

- Description:
"वस्तुतः रसायन विज्ञान प्रकृति, पर्यावरण और जीवन से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। और तो और पृथ्वी पर जीवन का प्रादुर्भाव भी जटिल रासायनिक प्रतिक्रियाओं का ही परिणाम है। यहाँ तक कि जीवन की प्रत्येक गतिविधि में रासायनिक क्रिया-प्रतिक्रिया छिपी है। रासायनिक प्रतिक्रियाओं के बिना जीवन संभव नहीं है। प्रस्तुत पुस्तक में रसायन विज्ञान के महत्त्वपूर्ण अध्यायों, जैसे कि परमाणु संरचना, कार्बन और उसके यौगिक, धातुएँ और अधातुएँ, विलयन, नाभिकीय रसायन इत्यादि के अंतर्गत उपयोगी वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का समावेश किया गया है। छात्र-छात्राओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों एवं सामान्य वर्ग के पाठकों के लिए यह पुस्तक निश्चित ही अत्यंत उपयोगी साबित होगी। "
1000 MODI PRASHNOTTARI
- Author Name:
Anita Gaur
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- Description:
"राष्ट्र को सर्वोपरि माननेवाले कोटिकोटि भारतीयों की जनाकांक्षाओं के केंद्रबिंदु भारत के जनप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सबके मानस में हैं। लोग उनको जाननेसमझने की तीव्र जिज्ञासा रखते हैं। भारत हो या विश्व का कोई भी कोना—जहाँ नरेंद्र मोदी जाते हैं, वहाँ उनका अपूर्व स्वागत होता है। परंतु अहंकार भाव उन्हें छू भी नहीं गया है। वे कहते हैं—‘जब विदेश में मैं किसी राजनेता से उनके समकक्ष बात करता हूँ तो मेरे पीछे मेरे सवा अरब भारतीयों की शक्ति का संबल होता है।’ ऐसे राष्ट्रनायक के अनेक रूप हैं—एक सामाजिक कार्यकर्ता, राष्ट्रनिष्ठ राजनेता, कर्तृत्वशील प्रधानमंत्री, ओजस्वी वक्ता, प्रखर चिंतक, प्रभावी लेखक। ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूलमंत्र के साथ समाज के विभिन्न वर्गों के समुचित विकास हेतु अनेक कल्याणकारी योजनाएँ बनानेवाले नरेंद्र मोदी के सभी आयामों को संकलित किया है इस पुस्तक में। प्रश्नोत्तर के रूप में नरेंद्र मोदी के जीवन को जानने का अवसर उपलब्ध कराती एक पठनीय पुस्तक।"
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