Rahul-Chintan
(0)
Author:
Gunakar MuleyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
195
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विज्ञान के साथ-साथ साहित्य, पुरातत्त्व-इतिहास एवं संस्कृति पर गुणाकर मुळे की महत्त्वपूर्ण लेखमालाएँ और पुस्तकें पहले प्रकाशित हो चुकी हैं। वस्तुतः राहुल पर उनकी पुस्तकें उसी सिलसिले की अगली कड़ी हैं, क्योंकि राहुल पर लिखना महज़ एक साहित्यकार के बारे में और उसके साहित्य पर लिखना नहीं है। एक साहित्यकार होने के अलावा राहुल ने समाज, राजनीति, इतिहास-पुरातत्त्व, धर्म और संस्कृति पर गहन चिन्तन किया था। इन विषयों पर उनके मौलिक विचार थे, जिन्हें समझे और उद्घाटित किए बिना राहुल के वास्तविक महत्त्व को नहीं समझा जा सकता। गुणाकर मुले ने इस काम को बड़ी निष्ठा और वैज्ञानिक सूझबूझ के साथ सम्पन्न किया है, जिसका ज्वलन्त उदाहरण यह पुस्तक है।</p> <p>इस पुस्तक में गुणाकर जी ने राहुल के बहुआयामी व्यक्तित्व का विशद एवं विराट चित्र उपस्थित किया है और अन्त में ‘राहुल-साहित्य : एक परिचय’ शीर्षक के अन्तर्गत राहुल की लगभग सभी कृतियों का संक्षिप्त परिचय दे दिया है, जिससे राहुल साहित्य के बारे में आज भी जो भ्रामक बातें लिखी और प्रचारित की जा रही हैं, उनका निराकरण होता है।
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विज्ञान के साथ-साथ साहित्य, पुरातत्त्व-इतिहास एवं संस्कृति पर गुणाकर मुळे की महत्त्वपूर्ण लेखमालाएँ और पुस्तकें पहले प्रकाशित हो चुकी हैं। वस्तुतः राहुल पर उनकी पुस्तकें उसी सिलसिले की अगली कड़ी हैं, क्योंकि राहुल पर लिखना महज़ एक साहित्यकार के बारे में और उसके साहित्य पर लिखना नहीं है। एक साहित्यकार होने के अलावा राहुल ने समाज, राजनीति, इतिहास-पुरातत्त्व, धर्म और संस्कृति पर गहन चिन्तन किया था। इन विषयों पर उनके मौलिक विचार थे, जिन्हें समझे और उद्घाटित किए बिना राहुल के वास्तविक महत्त्व को नहीं समझा जा सकता। गुणाकर मुले ने इस काम को बड़ी निष्ठा और वैज्ञानिक सूझबूझ के साथ सम्पन्न किया है, जिसका ज्वलन्त उदाहरण यह पुस्तक है।</p>
<p>इस पुस्तक में गुणाकर जी ने राहुल के बहुआयामी व्यक्तित्व का विशद एवं विराट चित्र उपस्थित किया है और अन्त में ‘राहुल-साहित्य : एक परिचय’ शीर्षक के अन्तर्गत राहुल की लगभग सभी कृतियों का संक्षिप्त परिचय दे दिया है, जिससे राहुल साहित्य के बारे में आज भी जो भ्रामक बातें लिखी और प्रचारित की जा रही हैं, उनका निराकरण होता है।
Book Details
-
ISBN9788126705665
-
Pages164
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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'जाति पाँति पूछै नहिं कोई। हरि को भजै सो हरि का होई।'
उनके अनुसार पुरुष की भाँति स्त्री भी भक्ति की कारिणी है।
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- Description: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांचे रामायण-महाभारत हे ग्रंथ वाचून समाधान झाले नाही तेव्हा ते बुद्धांकडे वळले. बौद्ध धर्म हा एकमेव असा धर्म आहे की, विज्ञानाने जागृत झालेला समाज तो सहर्ष स्वीकारील. मानवासाठी कल्याणकारी असणाऱ्या या धर्मात उच्च-नीच, श्रेष्ठ-कनिष्ठ, स्त्री-पुरुष, स्पृश्य-अस्पृश्य असा कोणताही भेद नाही. समानता हेच तत्त्व या धम्मात व्यापून आहे. ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' हे या धम्माचं मध्यवर्ती सूत्र आहे. हे तत्त्वज्ञान त्यांनी ‘बुद्ध आणि त्यांचा धम्म' या ग्रंथातून विस्तृतपणे मांडलेले आहे. गौतम बुद्धांच्या जीवन आणि तत्त्वज्ञानावर, समाजातील मौलिक प्रश्नांवर विवेचन करणारा हा एकमेवाद्वितीय ग्रंथ होय. सबंध मानवास समृद्ध जीवन जगण्याचा मार्ग दाखवणारा हा एक प्रमाण ग्रंथ म्हणता येईल.डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांनी लिहिलेला हा अखेरचा ग्रंथ असून त्यांच्या सर्व ग्रंथांत या ग्रंथाला सर्वाधिक महत्त्व आहे. त्यांची भूमिका धर्मचिकित्सकाची होती. तर्काला पटेल ते स्वीकारायचं आणि न पटेल ते नाकारण्याचं धम्मात दिलेलं स्वातंत्र्य घेऊनच ‘बुद्ध आणि त्यांचा धम्म' हा ग्रंथ त्यांनी लिहिला.मूळ इंग्रजीत असणारा हा ग्रंथ मराठी, हिंदी, गुजराती, तेलुगू, तमिळ, कन्नड, पंजाबी आदी भाषांत अनुवादित झालेला आहे. या ग्रंथावर ‘अ जर्नी ऑफ सम्यक बुद्ध' हा चित्रपटसुद्धा प्रदर्शित झालेला आहे.गौतम बुद्ध आणि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांवर ज्यांची प्रगाढ निष्ठा आहे त्यांच्यासाठी आणि विद्यार्थी, ज्ञानसाधक, अभ्यासक आदींना प्रस्तुत ग्रंथ नक्कीच अत्यंत उपयुक्त ठरेल. Buddha Aani Tyancha Dhamm | Bharatratna Dr. Babasaheb Ambedkar बुद्ध आणि त्यांचा धम्म | भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर
Cinema Ka Ishq
- Author Name:
Pitras Bukhari
- Book Type:

- Description: पितरस बुख़ारी का पूरा नाम पीर सैयद अहमद शाह बुख़ारी है। आपका ताल्लुक़ पाकिस्तान के पेशावर से हैं। शुरूआती तालीम पाकिस्तान ही में पायी और एम.ए. करने के बाद इंग्लिस्तान की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में डिग्री हासिल की। लाहौर में बतौर उस्ताद आपकी ख़िदमात रहीं और कई बरस तक ऑल इंडिया रेडियो में अलग-अलग ओहदों पर रहे। 1952 में यूनाइटेड नेशन्स में नुमाइन्दे चुने गए, जहाँ 1954 तक रहे। पितरस के लिखे मज़ामीन ज़माने भर में मशहूर हैं मगर इस किताब में मुन्तख़ब 11 मज़ामीन का एक अलग मक़ाम है। आपका लिखा हुआ मिज़ाह उर्दू अदब में बेशक़ीमती सरमाया है। यही वजह है कि आपके इन्तेक़ाल के अगले ही रोज़ न्यूयॉर्क टाईम्स (6 दिसम्बर 1958) ने अपने इदारिया में उनको याद करते हुए 'सिटिज़न सिटिज़न ऑफ वर्ल्ड' कहा। 2013 में पाकिस्तानी हुक़ूमत के ज़रिए आपको मुल्क का दूसरा सबसे बड़ा सिटिज़न अवॉर्ड 'हिलाल-ए-इम्तियाज़' भी दिया गया। शुऐब शाहिद का तआल्लुक़ बुनियादी तौर पर उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर से है। इस वक़्त आपकी शिनाख़्त मुल्क के एक मशहूर बुक कवर डिज़ाइनर के तौर पर होती है। दुनिया की कई मशहूर किताबों पर बतौर आर्टिस्ट काम करने के सबब आपकी अदबी दुनिया में एक ख़ास मक़बूलियत है। मुल्कगीर और बैनुलअक़्वामी सतह पर कई अवार्ड्स के साथ आपका नाम रहा है। आपके लिखे मज़ामीन, ख़ुतूत और बिलख़ुसूस उर्दू मिज़ाह से मुताल्लिक मज़ामीन हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बहुत से रिसालों में अक्सर शाया होते हैं और आप अवाम-ए-ख़ास-ओ-आम में अपने मुन्फ़रद अन्दाज़ के लिए काफ़ी मकबूल हैं। इन दिनों क्लासिकल उर्दू अदब को देवनागरी रस्मुल-ख़त में लाने का तारीख़ी काम अंजाम दे रहे हैं।
Rajkahini-The Princely Tales of Rajasthan
- Author Name:
Abanindranath Tagore
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- Description: Rajkahini-The Princely Tales of Rajasthan is an English translation of Abanindranath Tagore's Bengali classic Rajkahini. It is a collection of nine stories that are replete with episodes and incidents involving the royalty of Rajasthan. Expectedly, therefore, bravery, nobility palace intrigues, wars, skirmishes, feuds betrayal, caste, religion, marriage, motherhood and progeny, all play a dynamic role as the fictionalized social and political history of early Rajasthan is unfurled. Authoring Rajkahini as a literary expression of the legends and tales of the Rajput kings can also be considered a part of the postcolonial action to etch out a narrative that could draw the far part of the nation closer to the Bengali readership.
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