Allah Ho Ram
(0)
Author:
Sachchidanand SachchuPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
MaithiliCategory:
Contemporary-fiction₹
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सब संप्रदायक अपन-अपन देवता छै। ककरो अल्लाह, ककरो राम। एक दोसरा सँ छत्तीसक आँकड़ा! मुदा कहियो एना बुझल जाइ छलै, 'अल्लाह मे राम छै आ राम मे अल्लाह' तेँ अल्लाह हो राम! सहज ग्रामीण अंत:चेतना मे व्याप्त अध्यात्म केँ जीवन-मूल्यक रूप मे लैत आजादी सँ पहिने जुआन होइत पीढ़ी आ आजादीक बादक क्रमश: वर्तमान रुढि़, वैमनस्यक बीच जुआन भेल आजुक पीढ़ी केँ अनायासे तुलनात्मक रूप मे देखै अइ उपन्यासकार आ सविस्तार ओकर कथा कहै अइ। तेँ एहि क्षेत्रक सांस्कृतिक परिवर्तन (सम्यक सँ उन्मादी दिस उन्मुख)क तटस्थ निरूपण संग एक टा ऐतिहासिक दस्तावेज बनि क' प्रस्तुत होइत अइ उपन्यास 'अल्लाह हो राम'। उपन्यासक यात्रा प्राय: सत्तरि-अस्सी बरखक छै। आजादी सँ पहिनेक समय-समाज सँ उपन्यास शुरू होइत छै। एहि विस्तृत अवधिक काल-कथा, एहि अवधि मे बदलैत मनुक्खक कथा, एहन सहज रूप मे गुंफित जे बेसीकाल लोक-कथाक सहोदर बुझाइए। कथा मे कथा, समयक कथा, चरित्रक कथा। सब के सब अपना तरहक रीयल लाइफ कैरेक्टर, अपन (उन्नत कि मलिन) मूल्यक संग जीवंत। आजादीक लड़ाइ, बँटवाराक दाह-दंश-दाग, सुखाड़क डाँग, बाढि़क मूंगरा-मारि, राजनीतिक दखलंदाजीक बीज आ उत्सव-त्योहारक संगहि स्त्रीक स्थिति आ उत्पीडऩ...सब किछु सहज-स्वाभाविक... टाइम-ट्रेन (काल रथ) पर यात्रा करै सन। खास क' पार्टीशन आ वृहत मुस्लिम समाज पर मिथिला-मैथिलीक परिप्रेक्ष्य मे ई पहिल उपन्यास थिक। मुखर सामाजिक सरोकार आ कथा कहबाक आकर्षक शिल्पक संग, उपन्यास 'अल्लाह हो राम' उत्तम रचनाक श्रेणी मे प्रमुख स्थान राखत। एक तरहें मैथिली उपन्यासक एक टा मीलक पाथर सिद्ध हैत, से विश्वास अछि। —कुणाल
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सब संप्रदायक अपन-अपन देवता छै। ककरो अल्लाह, ककरो राम। एक दोसरा सँ छत्तीसक आँकड़ा! मुदा कहियो एना बुझल जाइ छलै, 'अल्लाह मे राम छै आ राम मे अल्लाह' तेँ अल्लाह हो राम! सहज ग्रामीण अंत:चेतना मे व्याप्त अध्यात्म केँ जीवन-मूल्यक रूप मे लैत आजादी सँ पहिने जुआन होइत पीढ़ी आ आजादीक बादक क्रमश: वर्तमान रुढि़, वैमनस्यक बीच जुआन भेल आजुक पीढ़ी केँ अनायासे तुलनात्मक रूप मे देखै अइ उपन्यासकार आ सविस्तार ओकर कथा कहै अइ। तेँ एहि क्षेत्रक सांस्कृतिक परिवर्तन (सम्यक सँ उन्मादी दिस उन्मुख)क तटस्थ निरूपण संग एक टा ऐतिहासिक दस्तावेज बनि क' प्रस्तुत होइत अइ उपन्यास 'अल्लाह हो राम'। उपन्यासक यात्रा प्राय: सत्तरि-अस्सी बरखक छै। आजादी सँ पहिनेक समय-समाज सँ उपन्यास शुरू होइत छै। एहि विस्तृत अवधिक काल-कथा, एहि अवधि मे बदलैत मनुक्खक कथा, एहन सहज रूप मे गुंफित जे बेसीकाल लोक-कथाक सहोदर बुझाइए। कथा मे कथा, समयक कथा, चरित्रक कथा। सब के सब अपना तरहक रीयल लाइफ कैरेक्टर, अपन (उन्नत कि मलिन) मूल्यक संग जीवंत। आजादीक लड़ाइ, बँटवाराक दाह-दंश-दाग, सुखाड़क डाँग, बाढि़क मूंगरा-मारि, राजनीतिक दखलंदाजीक बीज आ उत्सव-त्योहारक संगहि स्त्रीक स्थिति आ उत्पीडऩ...सब किछु सहज-स्वाभाविक... टाइम-ट्रेन (काल रथ) पर यात्रा करै सन। खास क' पार्टीशन आ वृहत मुस्लिम समाज पर मिथिला-मैथिलीक परिप्रेक्ष्य मे ई पहिल उपन्यास थिक। मुखर सामाजिक सरोकार आ कथा कहबाक आकर्षक शिल्पक संग, उपन्यास 'अल्लाह हो राम' उत्तम रचनाक श्रेणी मे प्रमुख स्थान राखत। एक तरहें मैथिली उपन्यासक एक टा मीलक पाथर सिद्ध हैत, से विश्वास अछि। —कुणाल
Book Details
-
ISBN9789388799447
-
Pages304
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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कुसुमा-सलहेस आ अन्य छह गोट नाटक लगभग पैंतालीस वर्ष सँ निर्देशक रूप मे आ तीस वर्ष सँ नाट्यकार रूप मे मैथिली रंगमंच सँ जुड़ल कुणाल एक टा प्रयोगधर्मी नाटककार रूप मे जानल-मानल नाम छथि। हिनक अनेक नाटकक अनेक सराहनीय प्रदर्शन भेल अछि। मुदा पुस्तकाकार मैथिली मे हिनक पहिल नाट्य-पुस्तक यैह छनि, जखन कि ओ सत्तरि वर्षक भेलाह अछि। एहि पुस्तक मे कुणालक सात गोट पूर्णकालिक मौलिक नाटक संग्रहित अछि। पहिल नाटक 'चालीस चोर आ गोनू झा उर्फ ज्ञान झाक खिस्सा' अछि जे 'भंगिमा' मे छपल छल, बाकी छओ गोट नाटक 'विदापत', 'कुसुमा-सलहेस', 'प्रेम-प्रतिज्ञा उर्फ श्रुवावतीक जय', 'विश्वासक शक्ति उर्फ सुकन्याक विवाह', 'प्रेमक विस्तार उर्फ श्वेताक आविष्कार' आ 'प्रेमक परीक्षा उर्फ सुप्रभा आ अष्टावक्र' नाटक 'अंतिका' मे 2003 सँ 2014क बीच छपल। '...उर्फ ज्ञान झाक खिस्सा' मे अपना ठाम प्रचलित गोनू झाक खिस्साक रचनात्मक उपयोग करैत नाट्यकार अतीतक कथा कहैतो वर्तमान मे छथि। 'विदापत' नाटक कुलीन समाज सँ अलग साधारण लोक-मानस मे कवि विद्यापतिक पहिचान आ महत्त्व केँ प्रभावी ढंग सँ रखैत अछि। 'कुसुमा-सलहेस' दलित समाजक एक टा सर्व-स्वीकृत योद्धा नायकक वीरताक संग-संग प्रेमक अद्भुत आख्यान अछि, जकर ई नाट्य-रचना हरदम मन रहैवला अछि। शेष चारि गोट सुखांत नाटक पौराणिक आख्यान पर आधारित अछि, मुदा ई चारो स्त्रीक छवि आ वैचारिक आदर्शक जे रूप प्रदर्शित करैत अछि ओ एकरा समकालीन बनबैत अछि। सं —गौरीनाथ
Bhai Saheb Mane Raj Mohan Jha
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Memoirs
Khaksiyah
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