Book Set
Complete Collection : 3 Books in this Book Set
Prabhat Sookti Kosh
Prabhat Sookti Kosh
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Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
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Book Type:

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Description:
सूक्तियाँ गागर में सागर भरे वे शब्द समूह हैं, जो सीधे मर्म पर चोट करते हैं। इन शब्दों में ऐसी शक्ति होती है कि ये इनसान को सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं और कई बार वह क्षण जीवन का महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित होता है, जो जीवन की दशा और दिशा को बदलकर रख देता है, यह व्यक्ति का मानो नया जन्म होता है; उसका चीजों को देखने का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। महात्मा बुद्ध के कुछ सूक्ति वाक्य ज्यों अंगुलिमाल का हृदय परिवर्तित कर देते हैं और वह डाकू से संत बन जाता है; सूक्तियाँ कुछ यों ही मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में दुनिया भर के महान् विचारकों की सूक्तियों का संकलन किया गया है, जो प्रबुद्ध पाठकों के लिए निश्चित ही उपयोगी सिद्ध होगा।
Suprabhat Zindagi
Suprabhat Zindagi
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Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
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Book Type:

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Description:
सादगी के सौंदर्य से दीप्त इन कविताओं में गहरी संवेदना और मूल्यचेतना व्याप्त है। निशंकजी जीवन के संक्रांत सत्य को गहराई से समझते हैं। जीवन में सुख भी है, दु:ख भी है, हार भी है, जीत भी है, यानी सकारात्मकता है तो नकारात्मकता भी है। निशंकजी संक्रांत सत्य को निरंतर चित्रित करते हुए जीवन के प्रकाश पक्ष को रेखांकित कर देते हैं। उनकी कविताएँ कहती हैं कि जीवन एक सरल रेखा नहीं है। उसमें अनेक उतार-चढ़ाव होते हैं और वे ही हमें अच्छी और सही जिंदगी का पाठ पढ़ाते हैं। कवि कहता है कि लोग जिसे प्रतिकूलता मानते हैं, वह अनुकूलता की सृष्टि करती है। हमें प्रतिकूलता और अनुकूलता के द्वंद्व तथा सुंदर परिणति की प्रतीति करनी चाहिए। मनुष्य को अनुकूलता के प्रति दृढ़ विश्वास रखकर उसके लिए संघर्ष करना चाहिए। इस संग्रह की सारी कविताएँ भिन्न-भिन्न प्रकार से जीवन के प्रति विश्वास पैदा करती हैं, यानी सबमें रात से निकला हुआ सुप्रभात व्याप्त है। कवि की संवेदनशीलता और मूल्यधर्मिता उस आमजन के दर्द तथा महत्त्व की गहरी पहचान कर लेती है, जो ऊँचा कहे जानेवाले समाज की दृष्टि से ओझल है और तुच्छ है।—रामदरश मिश्र
Thar Marusthal Ka Paramparagat Jal Prabandhan
Thar Marusthal Ka Paramparagat Jal Prabandhan
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Author Name:
Meena Kumari
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Book Type:

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Description:
डॉ. मीना का चूरू मंडल के पारंपरिक जलस्रोतों पर सर्वेक्षणात्मक शोध एक सराहनीय प्रयास है। इस ग्रंथ में वर्षाजल, सतही जल एवं भूमिगत जल की उपलब्धता पर चर्चा की गई है। जल के प्रकारों (पालर, पाताल एवं रेजानी) से संबंधित जल-स्थापत्य का निर्माण तत्कालीन टेक्नॉलॉजी का विस्तृत विवरण है, जो अत्यंत महत्त्वपूर्ण बिंदु है। इसके अलावा लेखिका ने चूरू जैसे थार मरुस्थलीय क्षेत्र में विशाल जल-प्रबंधन खड़ा करने के लिए विभिन्न भागीदारों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की है। पर्यावरण, मोहल्लों की बसावट के संग जल-संरक्षण, वाणिज्य व्यापार जैसे व्यापक विषयों का जुड़ाव लेखिका के अध्ययन का प्रशंसनीय पहलू है। —प्रो. बी.एल. भादानी पूर्व चेयरमैन एवं कोऑर्डिनेटर सी.ए.एस. डिपार्टमेंट ऑफ हिस्ट्री, ए.एम.यू.-अलीगढ़ प्रस्तुत शोध-ग्रंथ में जल-संरक्षण को लेकर हमारे प्रज्ञावान पुरखों की दूर-दृष्टि की झलक मिलती है। डॉ. मीना ने अथक परिश्रम से तथ्य और साक्ष्य जुटाकर तकनीकी रूप से ग्राफ, प्रारूप, अभिलेखीय संदर्भों के भिन्न-भिन्न उदाहरणों के माध्यम से पुस्तक रूप में सुंदर विमर्श प्रस्तुत किया है। पुस्तक में तथाकथित साक्षर समाज द्वारा निरक्षर मान ली गई हमारी लोक-मेधा की सुंदर बानगी प्रस्तुत की गई है। इस पुस्तक के साथ मीना कुमारी ने उन चीजों को भी हासिल किया है, जिसकी प्रतीक्षा अकादमिक जगत काफी समय से कर रहा था। —सिराज केसर सी.ई.ओ., इंडिया वाटर पोर्टल