Sangharsh Ka Sukh
(0)
Author:
Abhishek SaurabhPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
795
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‘संघर्ष का सुख’ प्रेरक और कर्मठ व्यक्तित्व के धनी उदय शंकर अवस्थी के उदात्त जीवन का प्रामाणिक लेखा है जिन्हें दुनिया उर्वरक क्षेत्र की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इफको के प्रबन्ध निदेशक और सीईओ के रूप में अधिक जानती है। पुस्तक से गुज़रते हुए अवस्थी का जो व्यक्तित्व सामने आता है उसमें साधारण की असाधारणता और असाधारण की सादगी का दुर्लभ संयोग सहज ही लक्षित किया जा सकता है।</p> <p>उनके जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों के साथ-साथ उर्वरक उद्योग की प्रौद्योगिकी और प्रबंधन कौशल की बारीकियों के ब्योरे पुस्तक को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हैं। इसमें सार्वजनिक, सहकारी और निजी क्षेत्र की कार्यप्रणाली, उनके अन्तर्सम्बन्ध और अन्तर्विरोध सहित प्रबंधन के विविध पहलू शामिल हैं। अपने बहुआयामी अनुभव तथा अन्तरराष्ट्रीय वाणिज्य और व्यापार की गहरी समझ के साथ किस प्रकार अवस्थी इफको को एक छोटी सहकारी समिति से वैश्विक कारोबारी समूह में परिवर्तित करने में कामयाब हुए, इसकी पूरी कहानी पुस्तक में विस्तार से दी गई है। अपने दूरदर्शी नेतृत्व में अवस्थी ने इफको के कारोबार का विविधीकरण करते हुए देश और देश से बाहर अत्याधुनिक उर्वरक संयंत्रों की स्थापना से लेकर नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे क्रांतिकारी उर्वरक विकसित कर विश्व मंच पर भारत और भारतीय सहकारिता का परचम लहराया है।</p> <p>उत्तर प्रदेश के एक छोटे-से गाँव से निकला एक बालक आरंभिक दौर से ही जीवन की जटिलताओं और संघर्षों के बीच से सर्जनात्मक ऊर्जा अर्जित करता हुआ कामयाबी के नित नए-नए कीर्तिमान स्थापित करता है। इस अर्थ में अवस्थी एक प्रेरणास्रोत बनकर सामने आते हैं। देश के किसानों को सशक्त और समृद्ध बनाने के उद्देश्य से अत्याधुनिक प्रौद्योगिकीयुक्त नूतन और नवोन्मेषी उत्पाद विकसित करने की अवस्थी की इच्छा और क्षमता उन्हें ‘जनता का सीईओ’ बनाती है।</p> <p>यह पुस्तक अवस्थी के साथ-साथ इफको के विकास की भी कहानी है। सही मायने में वे इफको की सफलता के सूत्रधार हैं।
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‘संघर्ष का सुख’ प्रेरक और कर्मठ व्यक्तित्व के धनी उदय शंकर अवस्थी के उदात्त जीवन का प्रामाणिक लेखा है जिन्हें दुनिया उर्वरक क्षेत्र की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इफको के प्रबन्ध निदेशक और सीईओ के रूप में अधिक जानती है। पुस्तक से गुज़रते हुए अवस्थी का जो व्यक्तित्व सामने आता है उसमें साधारण की असाधारणता और असाधारण की सादगी का दुर्लभ संयोग सहज ही लक्षित किया जा सकता है।</p>
<p>उनके जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों के साथ-साथ उर्वरक उद्योग की प्रौद्योगिकी और प्रबंधन कौशल की बारीकियों के ब्योरे पुस्तक को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हैं। इसमें सार्वजनिक, सहकारी और निजी क्षेत्र की कार्यप्रणाली, उनके अन्तर्सम्बन्ध और अन्तर्विरोध सहित प्रबंधन के विविध पहलू शामिल हैं। अपने बहुआयामी अनुभव तथा अन्तरराष्ट्रीय वाणिज्य और व्यापार की गहरी समझ के साथ किस प्रकार अवस्थी इफको को एक छोटी सहकारी समिति से वैश्विक कारोबारी समूह में परिवर्तित करने में कामयाब हुए, इसकी पूरी कहानी पुस्तक में विस्तार से दी गई है। अपने दूरदर्शी नेतृत्व में अवस्थी ने इफको के कारोबार का विविधीकरण करते हुए देश और देश से बाहर अत्याधुनिक उर्वरक संयंत्रों की स्थापना से लेकर नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे क्रांतिकारी उर्वरक विकसित कर विश्व मंच पर भारत और भारतीय सहकारिता का परचम लहराया है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के एक छोटे-से गाँव से निकला एक बालक आरंभिक दौर से ही जीवन की जटिलताओं और संघर्षों के बीच से सर्जनात्मक ऊर्जा अर्जित करता हुआ कामयाबी के नित नए-नए कीर्तिमान स्थापित करता है। इस अर्थ में अवस्थी एक प्रेरणास्रोत बनकर सामने आते हैं। देश के किसानों को सशक्त और समृद्ध बनाने के उद्देश्य से अत्याधुनिक प्रौद्योगिकीयुक्त नूतन और नवोन्मेषी उत्पाद विकसित करने की अवस्थी की इच्छा और क्षमता उन्हें ‘जनता का सीईओ’ बनाती है।</p>
<p>यह पुस्तक अवस्थी के साथ-साथ इफको के विकास की भी कहानी है। सही मायने में वे इफको की सफलता के सूत्रधार हैं।
Book Details
-
ISBN9788119159154
-
Pages296
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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इस आत्मकथा को सामन्तवाद और लोकतन्त्र के खुले द्वन्द्व की तरह भी पढ़ा जा सकता है।
इन्हीं तूफ़ानी झंझावातों से गुज़रकर आई है रमणिका गुप्ता। आर्य समाज, कांग्रेस, समाजवादी और कम्युनिस्ट होने की उनकी यह यात्रा भारतीय राजनीति के नाटकीय मोड़ों का इतिहास भी है और विकास भी।
Hum Hushmat : Vol. 4
- Author Name:
Krishna Sobti
- Book Type:

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Description:
‘हम हशमत’ का यह चौथा भाग है। कृष्णा सोबती ने ‘हशमत’ को सिर्फ़ एक उपनाम की तरह ग्रहण नहीं किया था, बल्कि वह अपने आप में एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व है। कृष्णा जी ने स्वयं कहा है कि जब वे ‘हशमत’ के रूप में लिखती हैं, तो न सिर्फ़ उनकी भाषा, और शब्द-चयन कुछ अलग हो जाते हैं, उनका हस्तलेख तक कुछ और हो जाता है। ‘हशमत’ का विषय उनके समकालीनों, साथी लेखकों के अलावा गोष्ठियों, पार्टियों में हुए अनुभव और समसामयिक मुद्दों पर उनकी प्रतिक्रियाएँ होती हैं।
‘हम हशमत’ के इस भाग में राजेन्द्र यादव और असद जैदी पर उनके आलेखों के अलावा इस समय के कुछ विवादों पर उनकी प्रतिक्रियाओं को भी लिया गया है। साहित्य, लेखक की अस्मिता, और संस्कृति से सम्बन्धित उनके कुछ पठनीय आलेख भी यहाँ हैं। देश के वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक पर्यावरण से कृष्णा जी इधर बहुत क्षुब्ध और निराश रही हैं, लोकतंत्र के भविष्य की चिन्ता उन्हें बार-बार सताती रही है। इसकी छवियाँ इस सामग्री में बार-बार सामने आएँगी। भाषा को लेकर ‘सारिका’ में प्रकाशित उनकी एक प्रतिक्रिया विशेष तौर पर पढ़ी जानी चाहिए। इसमें उन्होंने अत्यन्त स्पष्टता से बोलियों, भाषा और प्रान्तीय बोलियों के अन्तर्सम्बन्धों पर अपनी बात कही है।
Miss You Bruzzo
- Author Name:
Tanishi Sharma
- Book Type:

- Description: जी, हाँ...। ब्रूज़ो एक पालतू डॉगी है। किताब इसके इर्द-गिर्द ही घूमती है। दिल्ली की रहने वाली एक छोटी लड़की की ब्रूज़ो से मुलाक़ात हिमाचल प्रदेश के ख़ूबसूरत शहर धर्मशाला में होती है। ब्रूज़ो का साथ उसकी चाहत को पूरा करता है। जब वह दिल्ली में रहती थी, तो अक्सर अपनी माँ से एक डॉगी को घर पर रखने की माँग करती थी। लेकिन उसकी माँ उसकी इस इच्छा को हमेशा नज़रअंदाज़ करती रहीं। कोरोना के पहले दौर में, जब महामारी का भय चरम पर था, तब वह सपरिवार धर्मशाला शिफ्ट हो जाती है। वह जिस घर में रहती है, उसके मकान मालिक के पालतू कुत्ते का नाम ब्रूज़ो है। दस साल की छोटी लड़की ब्रूज़ो के साथ ख़ूब खेलती और उसके साथ काफी समय बिताती। लेकिन यह ख़ुशी थोड़े दिनों के लिए ही रहती है..। यह उपन्यास हिंदी बाल साहित्य की दुनिया में एक नई शुरुआत है।
Binpatachi Chaukat - yatanamay parikramecha nital aawishkar
- Author Name:
Indumati Jondhale
- Book Type:

- Description: ‘बिनपटाची चौकट' दोन खांबांवर उभी आहे.एक खांब आहे, ऋजुतेचा आणि दुसरा खांब आहे, क्रूरतेचा.या दोन्ही अनुभवांतूनइंदूचे आयुष्य आकाराला आले आहेआणि म्हणून ते विदारक आहे.सरळसोट जगणे असते तर‘बिनपटाची चौकट' उभीच राहिली नसती.पट नसलेली चौकट समाजव्यवस्थेची आहे,मनुष्यसमूहाची आहे आणिआतल्या आत खदखदणाऱ्याआत्मप्रत्ययी अनुभवांची आहे.इंदूमती जोंधळे यांची ‘बिनपटाची चौकट'यातनामय परिक्रमेचानितळ आविष्कार आहे.गेल्या दशकातील मराठी निर्मितीनेज्याचा अक्षरवाङ्मयात गौरवाने समावेश करावाअसे हे आत्मकथन आहे.‘स्मृतीचित्रा'पेक्षाही हे अधिक दाहक आहे.- डॉ. गंगाधर पानतावणे(फेबु्रवारी, 1999) Binpatachi Chaukat | Indumati Jondhale बिनपटाची चौकट | इंदुमती जेोंधळे
Dinkar Ki Diary
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

- Description: “दैनिकी के लिए अंग्रेज़ी में दो शब्द हैं–डायरी और जर्नल। डायरी वह चीज़ है, जो रोज़ लिखी जाती है और जिसमें घोर रूप से वैयक्तिक बातें भी लिखी जा सकती हैं। बहुत-से महापुरुषों की डायरियाँ प्रकाशित हुई हैं, जिनमें से लज्जा या कलंक की बातें काटकर निकाल दी गई हैं। मगर जर्नल के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि वह रोज़ लिखा जाए। वैयक्तिक बातें जर्नल में भी लिखी जा सकती हैं। लेकिन मैंने जो जर्नल देखे हैं, उनमें वैयक्तिक बातें बहुत वैयक्तिक नहीं हैं। उनमें विचार हैं, भावनाएँ हैं और कहीं-कहीं टिप्पणियाँ या संक्षिप्त लेख भी हैं। मैं जो डायरी प्रकाशित कर रहा हूँ, वह डायरी और जर्नल, दोनों का मिश्रण है।" दिनकर जी के इस उद्धरण से स्पष्ट है कि वे कविता के साथ-साथ सत्ता-समय में जीवन, समाज के प्रति अपने गद्य-लेखन में भी किस तरह की सृजनात्मकता को जी रहे थे। दिनकर जी अपने समकालीनों में मात्र एक ऐसे साहित्यकार थे जो सत्ता, साहित्य और जनता तीनों जगह समान रूप से लोकप्रिय थे। यही कारण है कि यह पुस्तक अपने कालखंड में हर स्तर पर अपनी ज़िम्मेवारी का निर्वहन करनेवाले एक महाकवि के मनोजगत की जिस यात्रा को प्रस्तुत करती है, वह प्रभावशाली भी है और प्रेरक भी। 'दिनकर की डायरी' भारतीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में न सिर्फ़ भावनाओं, विचारों का दस्तावेज़ है, बल्कि एक राष्ट्रकवि के संस्मरणों और जीवन-प्रसंगों की भी एक अमूल्य निधि है।
Bura Waqt Achchhe log
- Author Name:
Sudhir Chandra
- Book Type:

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Description:
सुधीर चन्द्र यूँ तो इतिहासकार हैं लेकिन उनकी चिन्ताओं और दिलचस्पियों का फलक इस अकादमिक श्रेणी से कहीं ज़्यादा बड़ा है। गांधी पर जो काम वे करते रहे हैं, वह सिर्फ़ इतिहासकार का काम नहीं है। गांधी के साथ उन्होंने एक नितान्त निजी और दुर्लभ रिश्ता बनाया है, और उस 'असम्भव' व्यक्तित्व को समझते-जानते हुए देखने का एक अपना ढंग पाया है। हो सकता है कि यह ढंग उनका स्वभाव ही हो जिसे गांधी के स्पर्श ने और पुख़्ता, और टिकाऊ बना दिया।
इस किताब में शामिल गांधी-विषयक लेखों को अलग करके यदि हम समसामयिक सवालों और मुद्दों पर उनकी टिप्पणियों को भी ग़ौर से पढ़ें तो उस दृष्टि की मौजूदगी साफ़ दिखाई देगी जो जीवन को भी, और जीवन में होनेवाले परिवर्तन को भी एक गहरी नैतिक कार्रवाई के रूप में देखना चाहती है। 16 दिसम्बर—निर्भया कांड पर उनकी व्यथित प्रतिक्रियाएँ हों या दिल्ली में आम आदमी पार्टी के उदय पर उनकी टिप्पणियाँ हों, उनकी कसौटी कहीं अस्पष्ट नहीं है। अन्ना के अनशन को लेकर जब लगभग सबने अपने आपको एक हताशाजनित आशावाद के सुपुर्द कर दिया था, सुधीर जी बहुत साफ़ ढंग से उसकी नैतिक और व्यावहारिक विसंगतियों को देख और अभिव्यक्त कर पा रहे थे। इसी तरह पहले मुख्यमंत्रित्व काल में अरविन्द केजरीवाल के जिस धरने पर उनके समर्थक तक डिफ़ेंसिव हो रहे थे, सुधीर जी केजरीवाल के उस फ़ैसले की ऐतिहासिक और सैद्धान्तिक अहमियत को समझ पा रहे थे।
देश में बढ़ती असहिष्णुता, कठिन और संवेदना-च्युत होता सामाजिक जीवन और राजनैतिक हताशा उनके चिन्तन के मुख्य बिन्दु हैं जिन पर वे इतिहास की गहरी समझ और आन्तरिक नैतिकता के स्पष्ट तर्क के साथ बार-बार विचार करते हैं।
किताब में कुछ संस्मरण भी हैं जिनमें भीमसेन जोशी और भूपेन खख्खर पर केन्द्रित कतिपय लम्बे आलेख सम्बन्धित व्यक्तित्वों के अलावा भारतीय कला के इन दो पक्षों, संगीत और चित्रकला पर महत्त्वपूर्ण रोशनी डालते हैं। संगीत पर उन्होंने एकाधिक जगह और बहुत लगाव के साथ लिखा है। समाज, संस्कृति और सामाजिक इतिहास को समेटते इन निबन्धों को अच्छे और समर्थ गद्य के रूप में भी पढ़ा जाना ज़रूरी है।
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