Gay-Geka Ki Auratein
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Author:
Joram Yalam NabamPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
199
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गाय-गेका की औरतें अरुणाचल प्रदेश के एक सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के आदिवासी बाशिन्दों की संस्मृतियों की पुस्तक है। जोराम यालाम नाबाम ने इस पुस्तक में न्यीशी समुदाय के सामाजिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन, उनके सामूहिक विश्वासों, धार्मिक-आध्यात्मिक मान्यताओं, रस्म-रिवाज, तीज-त्योहार तथा आर्थिक क्रिया-कलाप आदि का बहुत सूक्ष्मता से वर्णन किया है।</p> <p>यहाँ यह उल्लेख करना अनुचित न होगा कि यालाम स्वयं न्यीशी समुदाय से आती हैं जो अरुणाचल प्रदेश के बहुसंख्यक तानी आदिवासी समाज के अन्तर्गत आनेवाले पाँच समुदायों—आदी, आपातानी, तागिन और गालो—में शामिल है। इन संस्मरणों में जो कुछ दर्ज किया गया है, वह निरे ‘आब्ज़र्वेशन’ का नहीं, बल्कि आत्मीय संलग्नता का भी प्रतिफल है।</p> <p>पुस्तक का जोर न्यीशी समुदाय के रोजमर्रा के जीवन को रेखांकित करने पर है जिससे शेष भारतीय समाज किंचित अपरिचित अथवा बहुत कम परिचित है। ये संस्मरण कथात्मक अन्दाज में लिखे गए हैं, इसलिए सम्मिलित रूप से ये एक औपन्यासिक आस्वाद पैदा करते हैं। हालाँकि यह कोई उपन्यास नहीं है।</p> <p>वैसे यह समाजशास्त्र या नृतत्वशास्त्र की पुस्तक भी नहीं है, लेकिन इसमें जो कुछ लिखा गया है वह विषय और विधा के प्रश्नों को पीछे छोड़ते हुए पाठक को एक ऐसे समुदाय के बीच ले जाता है जो निरन्तर गतिशील संस्कृति का वाहक तथा ‘विविधता में एकता’ के सूत्र से निर्मित भारतीयता का एक अपरिहार्य अवयव है।
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गाय-गेका की औरतें अरुणाचल प्रदेश के एक सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के आदिवासी बाशिन्दों की संस्मृतियों की पुस्तक है। जोराम यालाम नाबाम ने इस पुस्तक में न्यीशी समुदाय के सामाजिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन, उनके सामूहिक विश्वासों, धार्मिक-आध्यात्मिक मान्यताओं, रस्म-रिवाज, तीज-त्योहार तथा आर्थिक क्रिया-कलाप आदि का बहुत सूक्ष्मता से वर्णन किया है।</p>
<p>यहाँ यह उल्लेख करना अनुचित न होगा कि यालाम स्वयं न्यीशी समुदाय से आती हैं जो अरुणाचल प्रदेश के बहुसंख्यक तानी आदिवासी समाज के अन्तर्गत आनेवाले पाँच समुदायों—आदी, आपातानी, तागिन और गालो—में शामिल है। इन संस्मरणों में जो कुछ दर्ज किया गया है, वह निरे ‘आब्ज़र्वेशन’ का नहीं, बल्कि आत्मीय संलग्नता का भी प्रतिफल है।</p>
<p>पुस्तक का जोर न्यीशी समुदाय के रोजमर्रा के जीवन को रेखांकित करने पर है जिससे शेष भारतीय समाज किंचित अपरिचित अथवा बहुत कम परिचित है। ये संस्मरण कथात्मक अन्दाज में लिखे गए हैं, इसलिए सम्मिलित रूप से ये एक औपन्यासिक आस्वाद पैदा करते हैं। हालाँकि यह कोई उपन्यास नहीं है।</p>
<p>वैसे यह समाजशास्त्र या नृतत्वशास्त्र की पुस्तक भी नहीं है, लेकिन इसमें जो कुछ लिखा गया है वह विषय और विधा के प्रश्नों को पीछे छोड़ते हुए पाठक को एक ऐसे समुदाय के बीच ले जाता है जो निरन्तर गतिशील संस्कृति का वाहक तथा ‘विविधता में एकता’ के सूत्र से निर्मित भारतीयता का एक अपरिहार्य अवयव है।
Book Details
-
ISBN9788119092369
-
Pages116
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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"बंदा बहादुर ने अपना प्रारंभिक जीवन एक वैरागी के रूप में बिताया। यह लगभग सत्रह वर्ष चला। अधिकांश समय उन्होंने दक्षिण भारत में गोदावरी नदी पर स्थित नंदेड़ नामक नगर में अपने आश्रम में तपश्चर्या करते बिताया। उन्होंने हिंदू शास्त्रों तथा योग एवं प्राणायाम विद्याओं का गहन अध्ययन किया। कुछ लोग मानते हैं कि वे तंत्र विद्या के भी ज्ञाता थे। गुरु गोविंद सिंह ने उन्हें गले से लगाया, उन्हें अमृत छकाकर सिख बनाया, उनका नाम बंदा सिंह बहादुर रखा और उन्हें पंजाब से मुगल राज्य की जड़ें उखाड़ फेंकने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद उन्होंने पंजाब में मुगलों के शहर, गढ़ और किले आक्रमण करके अपने अधीन करने का कार्यक्रम शुरू किया। बंदा ने ऐलान किया कि वे जमींदारों को हटाकर सभी जमीन खेतिहर गरीब किसानों में बाँटेंगे। महमूद गजनी और मुहम्मद गौरी के दिनों के बाद इतनी सदियाँ बीत जाने के बाद पहली बार उत्तर भारत में किसी गैर-मुसलमानी शक्ति ने एक बड़े और बेशकीमती भू-भाग पर अपना आधिपत्य जमाया। अंततः मुगलों ने बंदा बहादुर को पकड़कर बेडि़यों में डाल लोहे के पिंजड़े में बंद कर दिया गया। हथकडि़यों और पाँव की साँकलों में बंदा को महीनों तक जेल में बंद रख, मुसलमान जल्लादों के हाथों जो अमानवीय यातनाएँ दी गईं, वे अनुमान और कल्पना से परे हैं। वीर, क्रांतिकारी, हुतात्मा, धर्मपारायण, राष्ट्रनिष्ठ वीर बंदा सिंह बहादुर की जाँबाजी और पराक्रम का गौरवगान करती यह पुस्तक हर राष्ट्राभिमानी के लिए पढ़नी आवश्यक है। "
Martial Arts Champion Bruce Lee
- Author Name:
Abhishek Kumar
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विश्वविख्यात मार्शल आर्ट एक्सपर्ट ब्रूस ली का जीवन संघर्षों की चादर में लिपटा हुआ था। बचपन में उन्हें बार-बार बीमारी से लड़ना पड़ा। शरीर दुर्बल था और राह दिखानेवाला भी कोई नहीं था। बाद के जीवन में उन्हें युद्ध-कला में एक अनिश्चित एवं अस्थिर जीविका से जूझना पड़ा। इसी अनिश्चितता के कारण उसके मन में एक पेशेवर नर्तक बनने का विचार आया। यहाँ तक कि उन्होंने हांगकांग की चा-चा चैंपियनशिप भी जीत ली। लेकिन उनका मन तो कुंगफू में ही रमता था। जीवन भर उन्होंने कुंगफू का ही अभ्यास किया था और जिस शांति की खोज में वह लगे हुए थे। वह शांति उन्हें इससे ही प्राप्त हुई। अपने काम से उन्होंने दुनिया भर में युवा पीढ़ी को प्रेरित किया था और आज भी करते हैं। वे एक उत्तम अभिनेता थे और आज भी उनकी फिल्में बहुत शौक से देखी जाती हैं। पूरे विश्व में किशोरों के कमरों की दीवारें ली के पोस्टरों से सजी रहती हैं, जो उन्हें एक योद्धा, एक शिक्षक और एक अनुकरणीय व्यक्तित्व के रूप में देखते हैं। उनके जीवन के हर पहलू से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उनमें शिक्षा है, बुद्धिमानी है और जीवन-दर्शन है। उनका जीवन कई मायनों में प्रेरणाप्रद और अनुकरणीय है।
Buffett & Graham Se Seekhen Share Market Main Invest Karna
- Author Name:
Aryaman Dalmia
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यह पुस्तक निवेश के उन मूलभूत सिद्धांतों को, वास्तविक उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करती है, जिन्हें वैज्ञानिक निवेश की पद्धति के जनक, बेंजामिन ग्राहम ने प्रतिप्रदित किया है। इसमें उन साधारण, किंतु बेहद कारगर दिशा-निर्देशों का भी विश्लेषण किया गया है, जिन्हें अपनाते हुए उनके सबसे मेधावी छात्र वॉरेन बफे ने निवेश की दुनिया की चुनौतियों को पार कर दुनिया के तीन सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक बनने का सफर तय किया। इसका भी वर्णन किया गया है कि विस्तृत विश्लेषण, स्वतंत्र सोच और अनुशासन की मदद से कैसे लाभ हासिल किया जा सकता है, तथा कैसे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए बाजार के रुझानों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। भारतीय बाजारों के सफलतम निवेशकों का भी उदाहरण के तौर पर इसमें जिक्र है—असाधारण रूप से सफल और क्रिस कैपिटल के संस्थापक आशीष धवन, मॉर्गन स्टेनले में इमर्जिंग मार्केट्स के पूर्व प्रमुख माधव धर; चैतन्य डालमिया, जिनकी स्वयं की कंपनी का प्रदर्शन तमाम दूसरी निधियों के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर है, और संजय बख्शी, जो मूल्य निवेश की शिक्षा देते हैं तथा भारत के लिए एक विशिष्ट कोष भी चलाते हैं। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता है कि निवेशकों ने किस प्रकार ग्राहम और बफे के तरीकों को अपनाया और तर्कसंगत सोच के साथ असाधारण लाभ कमाया है।
Buffett & Graham Se Seekhen Share Market Main Invest Karna
Aryaman Dalmia
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Nari Kalakar
- Author Name:
Asha Rani Vohra
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"सभ्यता हमारी भौतिक जरूरत है तो संस्कृति आध्यात्मिक। संस्कृति में शिक्षा, साहित्य, कलाएँ आदि सभी शामिल हैं। कला का काम मात्र मनोरंजन करना नहीं, कलाओं का मूल उद्देश्य मन को स्वस्थ दिशा में मोड़ना या उसका परिष्कार करना होता है। कलाएँ ही सत्यं, शिवं, सुंदरम् के संपर्क में लाकर मानव-मन को संस्कारित करती हैं और मानव की आध्यात्मिक भूख को तृप्त करती हैं। परंतु आज की बाजार-व्यवस्था प्रधान संस्कृति ने कलाओं को धन अर्जित करनेवाला उद्योग बना दिया है। नारी और कला एक-दूसरे की पर्यायवाची हैं। स्पष्ट कहें तो नारी सृष्टि की सबसे खूबसूरत कलाकृति है। अत: ललित व रूपंकर कलाओं से उसका निकट संबंध होना स्वाभाविक है। आदि पाषाण युग से लकर आज तक इतिहास का कोई कालखंड ऐसा नहीं है, जब नारी ने अपनी कलाप्रियता एवं सृजन-कौशल का परिचय न दिया हो। चित्रकारी, गायन, वादन तथा नृत्य जैसे गुण उसमें स्वभावत: पाए जाते हैं। प्रस्तुत पुस्तक का उद्देश्य आधुनिक काल की प्रमुख नारी-साधिकाओं से नई पीढ़ी का परिचय कराना तथा कलाओं के प्रति रुचि जाग्रत् करने के साथ-साथ उसमें सीखने की ललक पैदा करना है। आशा है, सुधी पाठक-पाठिकाएँ एवं कलाप्रेमी जन अपने-अपने समय की श्रेष्ठ कला-साधिकाओं के जीवन से प्रेरणा प्राप्त कर अपनी कला-साधना को समर्पित होकर उनमें और भी निखार लाएँगे।
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