Radhakrishna Nobel Puraskar Kosh : 1901-2016
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Author:
Ashok MaheshwariPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
1995
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'मेरा डायनामाइट दुनिया में शान्ति के लिए होनेवाले हज़ारों सम्मेलनों से भी जल्दी शान्ति ला देगा।'</p> <p>—अल्फ़्रेड नोबेल</p> <p> </p> <p>डायनामाइट का आविष्कार करनेवाले 'पागल वैज्ञानिक' ने जब अपनी वसीयत में एक ऐसी संस्था स्थापित करने की बात कही, जिससे 'उन लोगों को पुरस्कार (राशि) बाँटे जाएँ, जिन्होंने मानव जाति के लिए अपनी सेवाएँ प्रदान की हों', तो यक़ीनन उनका सपना विश्व शान्ति ही था। लेकिन इसके बावजूद विवाद लगातार सामने आते रहे। सोवियत रूस की सरकार ने सखारोव को 'शान्ति पुरस्कार' दिए जाने का विरोध जताया, तो चीन ने दलाई लामा को पुरस्कार दिए जाने पर। फिर भी नोबेल पुरस्कारों की स्वीकार्यता या इनके महत्त्व को नकारा नहीं जा सकता। सौ वर्षों से भी अधिक समय से इन पुरस्कारों की निरन्तरता अपने-आपमें एक अद्भुत करिश्मा है।</p> <p>'नोबेल पुरस्कार कोश' का उद्देश्य है नोबेल पुरस्कारों के सम्बन्ध में पाठकों को पर्याप्त और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराना। इस कोश में नोबेल पुरस्कारों के संस्थापक अल्फ़्रेड नोबेल की वसीयत के साथ ही उससे जुड़े विवादों व अन्य तथ्यों पर भी प्रकाश डाला गया है। रसायन व भौतिकी, साहित्य, चिकित्सा, शान्ति और अर्थशास्त्र के लिए दिए जानेवाले ‘नोबेल पुरस्कार’ के 1901 से 2016 तक के विजेताओं के नाम, परिचय के साथ पुरस्कार के मद्देनज़र उनके कार्य का विस्तृत ब्यौरा इस कोश में संकलित हैं। पुरस्कार विजेताओं की सूची के साथ ही पुरस्कृत संस्थाएँ, ‘नोबेल पुरस्कार’ से सम्मानित महिलाएँ, दो बार पुरस्कार प्राप्त व्यक्तियों, एक ही परिवार के पुरस्कृत विजेताओं, मरणोपरान्त पुरस्कार प्राप्त करनेवालों, पुरस्कार लेने से मना करनेवालों इत्यादि की भी विस्तृत व प्रामाणिक जानकारी इस कोश में उपलब्ध कराई गई है।</p> <p>इससे पहले ‘नोबेल पुरस्कार’ के बारे में इतनी अधिक और परिपूर्ण जानकारी देनेवाला कोई कोश हिन्दी में उपलब्ध नहीं था। इस दिशा में यह अपने-आपमें बहुत बड़ा प्रयास है। 116 वर्षों के अनूठे इतिहास को सँजोए यह कोश पाठकों के लिए संग्रहणीय है।
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'मेरा डायनामाइट दुनिया में शान्ति के लिए होनेवाले हज़ारों सम्मेलनों से भी जल्दी शान्ति ला देगा।'</p>
<p>—अल्फ़्रेड नोबेल</p>
<p> </p>
<p>डायनामाइट का आविष्कार करनेवाले 'पागल वैज्ञानिक' ने जब अपनी वसीयत में एक ऐसी संस्था स्थापित करने की बात कही, जिससे 'उन लोगों को पुरस्कार (राशि) बाँटे जाएँ, जिन्होंने मानव जाति के लिए अपनी सेवाएँ प्रदान की हों', तो यक़ीनन उनका सपना विश्व शान्ति ही था। लेकिन इसके बावजूद विवाद लगातार सामने आते रहे। सोवियत रूस की सरकार ने सखारोव को 'शान्ति पुरस्कार' दिए जाने का विरोध जताया, तो चीन ने दलाई लामा को पुरस्कार दिए जाने पर। फिर भी नोबेल पुरस्कारों की स्वीकार्यता या इनके महत्त्व को नकारा नहीं जा सकता। सौ वर्षों से भी अधिक समय से इन पुरस्कारों की निरन्तरता अपने-आपमें एक अद्भुत करिश्मा है।</p>
<p>'नोबेल पुरस्कार कोश' का उद्देश्य है नोबेल पुरस्कारों के सम्बन्ध में पाठकों को पर्याप्त और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराना। इस कोश में नोबेल पुरस्कारों के संस्थापक अल्फ़्रेड नोबेल की वसीयत के साथ ही उससे जुड़े विवादों व अन्य तथ्यों पर भी प्रकाश डाला गया है। रसायन व भौतिकी, साहित्य, चिकित्सा, शान्ति और अर्थशास्त्र के लिए दिए जानेवाले ‘नोबेल पुरस्कार’ के 1901 से 2016 तक के विजेताओं के नाम, परिचय के साथ पुरस्कार के मद्देनज़र उनके कार्य का विस्तृत ब्यौरा इस कोश में संकलित हैं। पुरस्कार विजेताओं की सूची के साथ ही पुरस्कृत संस्थाएँ, ‘नोबेल पुरस्कार’ से सम्मानित महिलाएँ, दो बार पुरस्कार प्राप्त व्यक्तियों, एक ही परिवार के पुरस्कृत विजेताओं, मरणोपरान्त पुरस्कार प्राप्त करनेवालों, पुरस्कार लेने से मना करनेवालों इत्यादि की भी विस्तृत व प्रामाणिक जानकारी इस कोश में उपलब्ध कराई गई है।</p>
<p>इससे पहले ‘नोबेल पुरस्कार’ के बारे में इतनी अधिक और परिपूर्ण जानकारी देनेवाला कोई कोश हिन्दी में उपलब्ध नहीं था। इस दिशा में यह अपने-आपमें बहुत बड़ा प्रयास है। 116 वर्षों के अनूठे इतिहास को सँजोए यह कोश पाठकों के लिए संग्रहणीय है।
Book Details
-
ISBN9788183618625
-
Pages696
-
Avg Reading Time23 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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पुस्तक के हर प्रसंग में एक अप्रत्यक्ष और अदृश्य शाश्वत शक्ति परिलक्षित होती है। यह पुस्तक एक उन्नत साधक से लेकर आध्यात्मिक पथ के प्रथम जिज्ञासुओं के लिए रोमांचक मार्गदर्शिका है। हिमालयवासी दिव्य संतों के रहस्यों से परिचय कराती आत्मकथा, जिसमें पुनर्जन्म, साधना, आध्यात्मिक उन्नयन आदि की अनसुनी घटनाएँ पाठकों को अचंभित कर देंगी। ‘‘मैं तुम्हारे परिवार में लौट रहा हूँ।’’ ‘‘हमने पिछले जन्म में भी साथ गाया है।’’ जैसे वाक्य इस पुस्तक में दृष्टिगोचर होते हैं। यह पुस्तक शरीर से निकलकर सूक्ष्म यात्रा कर पिछले जन्म के संबंधियों को सँभालने जैसे रहस्योद्घाटनों से भरी विस्मयकारी कृति है, जिसको आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे। इसमें आपको भौतिकवादी पश्चिम जगत् में प्रेम से ओत-प्रोत लोक-कल्याणार्थ हिमालयवासी भारतीय संतों की गौरवशाली करुणा गाथा का विस्तृत विवरण मिलेगा। साथ ही यह आपको सत्य और धर्म पर आधारित दुःख, पीड़ा और मृत्यु से निवृत्ति दिलाती दिव्य उद्देश्य से भरपूर ईश्वर के चिरसेवकों के चमत्कारों का परिचय भी देगी। अवतारों और अलौकिक महापुरुषों की क्रीड़ाभूमि भारत की अक्षुण्ण संत परंपरा की अत्यंत रोमहर्षक नवीनतम गाथा।
Rishton ki Chhatri
- Author Name:
Man Mohan Bhatia
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दिल की बेचैनी ने आज जल्दी जगा दिया। श्रीमती जी अपनी खूबसूरती लिए आराम से सो रहीं थी, मैं उठ कर बाहर आ गया। अख़बार वाला आज जल्दी अख़बार रख गया था। अख़बार उठाया तो वो दूर से टाटा करता हुआ नज़र आया। चेहरे पर ख़ुद-ब-ख़ुद एक मुस्कान ठहर गई।अख़बार पढ़ तैयार हुआ, तब तक पत्नी ने गरम चाय, अपने नरम होठों के साथ पीला दी। दफ्तर तक जाने में किए ऑटो-वाले ने, आज फिर कोई मज़ेदार किस्सा सुनाया, दिल खुश हो गया। ऑफ़िस का दिन भी सह-कर्मियों के साथ हँसी-मज़ाक में निकल गया। सालों से इनके साथ रिश्ता घर-सा हो गया है।वापसी में पत्नी जी के लिए एक खास गजरा लिया, जो फूलवाले ने आदत में डाल दिया है। बच्चों के लिए फल ले लिए। ज़िन्दगी कुछ ऐसे ही चलती जा रही है।बेमौसम बरसात हो गयी, छतरी थी नहीं, भीग गए। घर पहुँचे, तो सब ने घेर लिया, लगे ‘हाल’ पूछने। कपड़े बदल सोफे पर बैठा, तो चाय के साथ पकोड़े तैयार थे। बिना बोले श्रीमती जी ने सर दबाना शुरू कर दिया और बच्चों ने पाँव। सबको यों पास देख, दिल को सुकून मिला, लगा जैसे जिंदगी की धुप-छाँव, इन सभी रिश्तों की छतरी तले आराम से निकल जाएगी। रात, हमसफ़र के साथ, एक-दूसरे की बाहों में सिमट, चैन से सो गया।
Diary Of My Love
- Author Name:
Deesha Sangani
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अगर आपका दिल धड़कता है, तो आप अब भी सपने देख सकते हैं। अनुष्का युवा है, उत्साह और उमंग से भरी है, जिसने अपने लक्ष्य निश्चित कर लिये हैं। अपने सपनों को सच करते हुए उसने अभी-अभी कॉरपोरेट जगत् में कदम रखा है। जीवन शानदार लग रहा है। नौकरी के पहले ही दिन आयुष की मुलाकात अनुष्का से होती है और उसमें एक तरंग सी दौड़ने लगती है। अनायास ही अनुष्का से हुई बातचीत मन में ऐसी भावनाएँ जगाती है, जिनका एहसास उसे बरसों से नहीं हुआ था। वह एकदम परफेक्ट लगती है। पर क्या जीवन में कुछ भी परफेक्ट होता है? चार साल बाद जब दोनों फिर से मिलते हैं, तो उनके दिल टूट चुके होते हैं और प्यार करने की इच्छा खत्म हो चुकी है। दोनों एक-दूसरे के दिल का दर्द दूर करते हैं और अपने-अपने सपनों को सच करने में मदद करते हैं। आखिर में जब दोनों अपने और एक-दूसरे के लिए जीने लगते हैं, तब जिंदगी एक क्रूर खेल खेलती है। अनुष्का की डायरी ही उसकी सच्ची साथी है, जिसके पन्नों में ऐसे राज दफन हैं, जिन्हें कोई कभी नहीं जान पाएगा। आइए, भावनाओं के इस उतार-चढ़ाव भरे सफर में आयुष और अनुष्का के साथ चलें तथा उन रहस्यों को जानें, जिन्हें अनुष्का ने ‘डायरी ऑफ माई लव’ में दफन कर रखा है।
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