Madhya Pradesh Madhyamik Shikshak Patrata Pareeksha Hindi Practice MCQs
(0)
Author:
Team PrabhatPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
210
₹ 168 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789354884399
-
Pages204
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Divya Bhagwadgita Atma Se Parmatma Tak
- Author Name:
Ashok Agrawal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shodh Drishti-Sudha Om Dhingra Ka Sahitya
- Author Name:
Balvir Singh +1
- Book Type:

- Description: Book
History of Nepali Literature
- Author Name:
Kumar Pradhan
- Book Type:

- Description: Nepali is widely spoken in the Himalayan terrain. Like many other Indo-Aryan languages, Nepali took its birth and grew in the Indian sub-continent long before India and Nepal took their present political shape. The story of Nepali literaturrebegins from the thirteenth century rock inscriptions and has a chequered course. Prose writing in Nepali began earlier than in many other languages of India, and has steadily developed. Other genres appeared gradually and flourished.
Bhartiya Jyotish Vijyan
- Author Name:
Ravindra Kumar Dubey
- Book Type:

- Description: Awaiting description
Karmayogi Banen "कर्मयोगी बनें" Book In Hindi
- Author Name:
Dr. Vikrant Singh Tomar
- Book Type:

- Description: Awaiting description
Bhartiya Islami Sanskriti
- Author Name:
Zafar Raza
- Book Type:

-
Description:
लब्धप्रतिष्ठ लेखक प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा की 'भारतीय इस्लामी संस्कृति' एक महत्त्वपूर्ण विषय पर एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। उसके नौ अध्याय इस्लामी धर्म और व्यवस्था, ज्ञान और विज्ञान, कला और संगीत के विस्तृत आयामों का संक्षिप्त पर विशद वर्णन प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने इस्लामी परम्परा के भारतीय विकास पर विशेष रूप से प्रकाश डाला है। उनका दृष्टिकोण सन्तुलित और युक्तिसंगत है। अनेकता में एकता के प्रसिद्ध सूत्र को अपनाए रखने और आगे बढ़ाने की आवश्यकता को लेखक ने रेखांकित किया है। औपनिवेशिक भेद नीति से उबरने के लिए यह आवश्यक है कि हिन्दू और मुस्लिम परम्पराओं का समन्वित अध्ययन किया जाए।
प्रस्तुत पुस्तक जिज्ञासुओं को आवश्यक तथ्यों और विचारों से अवगत कराने में सहायक सिद्ध होगी। प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा को इतनी सुन्दर पुस्तक लिखने के लिए बधाई।
—प्रो. गोविन्द चन्द्रपाण्डे; नई दिल्ली; 20 अप्रैल, 2011
Uttar Pradesh B.Ed. Sanyukt Pravesh Pariksha 15 Practice Sets Vigyan Varg (UP B.Ed Science Entrance Exam 2023 Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Na Bhoolanewali 100 Kahaniyan
- Author Name:
J.P. Vaswani
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vaigyanik Kosh
- Author Name:
Shanti Gunakar Muley
- Book Type:

- Description: विज्ञान और वैज्ञानिकों का मनुष्य-जीवन और सभ्यता के लिए अतुल्य योगदान रहा है। विकास के रथ को तीव्र गति से आगे बढ़ाने में उन्होंने बहुधा अपने जीवन और जीवन की सुख-सुविधाओं तक को महत्त्व नहीं दिया। यह ‘वैज्ञानिक कोश’ संसार के ऐसे ही वैज्ञानिकों से हमारा परिचय कराता है जिनके आविष्कारों और खोजों ने दुनिया को इतना उन्नत और सुविधाजनक बनाया है जिसमें रहते हुए हम मानव-जाति के भविष्य के बारे में सोच सकते हैं। इनमें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक भी शामिल हैं जिनका परिचय अलग से दिया गया है। हिन्दी में अभी तक ऐसी और इतनी विस्तृत पुस्तक उपलब्ध नहीं थी। यह हिन्दी के प्रमुख विज्ञान-लेखक गुणाकर मुळे के बरसों के श्रम का नतीजा है, जिसे अन्तिम रूप उनकी पत्नी और सुपुत्र ने सावधानी और यत्नपूर्वक दिया है। हर पाठक के लिए उपयोगी यह कोश न सिर्फ़ विश्व के महान वैज्ञानिकों के जीवन, उनके आविष्कारों और उपलब्धियों के विषय में आवश्यक जानकारी देता है, बल्कि हमें वैज्ञानिक ढंग से सोचने को भी प्रेरित करता है। परिशिष्ट में प्रस्तुत की गई सामग्री इस अध्ययन को और भी उपयोगी बनाती है जिसमें भौतिकी, रसायन और चिकित्सा विज्ञान आदि विषयों की संक्षिप्त एवं सारगर्भित जानकारी दी गई है।
Shuddha Anna Swastha Tan
- Author Name:
Prempal Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ramana Pito
- Author Name:
Hiralal Shukla
- Book Type:

-
Description:
गोंडी बोली में रामकथासार की प्रस्तुति रचनात्मक अभाव को दूर करने की एक बड़ी कोशिश
तो है ही, नई शुरुआत करने की एक दूरदृष्टि भी है। गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानसएक ऐसी कृति है, जिसका दो-तिहाई से अधिक अंश वनभूमि और वनजनों से सम्बद्ध है और आदिवासियों के जीवन-जगत में आज भी शामिल है, जिससे ये अपना सम्बन्ध पुरातन मानते हैं, इसलिए अभिन्न जुड़ाव रखते हैं।
गोंडी बोली की इस रामकथा में आदिवासी समुदाय अपने जीवन, समाज, संस्कृति और सामूहिक संघर्ष-चेतना की
भी कथा देखता, जीता है। यह पुस्तक रामकथा के बहाने जनजातियों की तरफ़ से उनकी विरासत का परिचय
और उनके अपने अस्तित्व की गाथा भी प्रस्तुत करती है।
UPTET Uttar Pradesh Shikshak Patrata Pareeksha Paper-1 ( Class : 1-5)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Seva Chayan Board Pravakta (PGT) Chayan Pareeksha, Samajshastra 14 Practice Sets in Hindi (UPSESSB PGT Sociology Book Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
IIT-JEE Main + Advanced Rasayan (Chemistry) for JEE Main + JEE Advanced and NEET (Other Engineering Entrance Examinations)
- Author Name:
Dr. K.G. Ojha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Freedom Struggle Quiz Book
- Author Name:
Sachin Singhal
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have description
Acid Wali Ladki
- Author Name:
Pratibha Jyoti
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharatiya Sainya Patniyon Ki Sahasik Kahaniyan (Hindi Translation of The Force Behind The Forces)
- Author Name:
Swapnil Pandey
- Book Type:

- Description: भारतीय सैन्य बलों के पराक्रमी; शूरवीर, जाँबाज और निर्भीक सैनिक अपना सर्वस्व मातृभूमि पर समर्पित कर देते हैं। होम कर देते हैं अपना यौवन, अपने सपने, ताकि हमारे तिरंगे की आनबान अक्षुण्ण रहे और हमारी सीमाएँ सुरक्षित। पर इनके साथ ही इनका परिवार और स्वयं भी उनकी इस साधना में बराबर के साझेदार होते हैं। प्रस्तुत पुस्तक में लेखिका ने सात वीर नारियों और उनके परिवारों के जीवन पर प्रकाश डाला है। व्यक्तिगत हानि, घर चलाने की जिम्मेदारी, भविष्य की चिंता, बच्चों के पालन-पोषण जैसी समस्याओं से निपटने और जिंदगी की सच्चाई का सामना करती पत्नियों के चित्रण में काफी कुछ अनूठापन है। वीर नारी को खुद भी यह समझने की जरूरत है कि कैसे उसके छोटे-छोटे बच्चे भविष्य की उन चुनौतियों से निपटेंगे, जिनका उन्हें भान तक नहीं है। सैन्य पत्नियों से भविष्य के लिए मजबूत होने, छोटे बच्चों की देखभाल करने और दयालु होने की अपेक्षा की जाती है। पर अपेक्षाओं का बोझ उठाना आसान नहीं होता है। एक सैनिक के न रहने पर सैनिक की पत्नियों को किन कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, साथ ही उनके परिवारवालों और समाज को उनके क्या- क्या अपेक्षाएँ होती हैं, इन सब ज्वलंत प्रश्नों पर इस पुस्तक में गंभीरता से विचार किया है। हमारे बलिदानी सैनिकों की उतनी ही त्यागी पत्नियों के समर्पण, संघर्ष और साहस की प्रेरक गाथा हैं ये कहानियाँ।
Shreshtha Hasya Vyangya Geet
- Author Name:
Ed. : Prem Kishore 'Patakha'
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sanskriti : Rajya, Kalayen Aur Unse Pare
- Author Name:
Balmeeki Prasad Singh
- Book Type:

-
Description:
संस्कृति भारतीय अनुभव की आत्मा है। भारतीय अनुभव को समझने के लिए आवश्यक है कि उसके मर्म में स्थित भारतीय संस्कृति को समझा जाए। ईसाई युग के अभ्युदय से काफ़ी पहले ही पूर्णत: विकसित हो चुकी इस संस्कृति ने भारतवासियों को (और समस्त भरतवंशियों को भी) एक निश्चित अस्मिता और चरित्र से सम्पन्न किया है। लेखक की मान्यता है कि संस्कृति के इसी अवदान के कारण भारतीय जन-गण इतिहास के कई दौरों और मानव-चेतना में हुए कई परिवर्तनों के बावजूद अपनी अखंडता सुरक्षित रख पाए हैं।
यह पुस्तक भारतीय संस्कृति की एक असाधारण अन्वेषण-यात्रा करते हुए व्याख्यात्मक प्रयास के ज़रिए कई अन्तर्सम्बन्धित विषय-वस्तुओं पर प्रकाश डालती है। इन्हीं में से एक धारणा यह है कि भारत में एक विकसित संस्कृति और विकासमान अर्थव्यवस्था का दुर्लभ संयोग मिलता है। लेखक का दावा है कि बीसवीं सदी के आख़िरी वर्षों में राष्ट्र-समुदाय के बीच राष्ट्रों की हैसियत तय करने में संस्कृति का कारक महत्त्वपूर्ण होता जा रहा है। शीतयुद्धोत्तर विश्व में ‘बाज़ार’ ने ‘सैन्य-शक्ति’ को प्रतिस्थापित कर दिया है और ‘संस्कृति’ अब इन दोनों के महत्त्व को चुनौती दे रही है। लेखक ने कला और संस्कृति के साथ भारतीय राज्य की अन्योन्यक्रिया की जाँच-पड़ताल ऐतिहासिक ही नहीं, समकालीन दृष्टिकोण से भी की है। उनकी मान्यता है कि जवाहरलाल नेहरू और मौलाना आज़ाद के ज़माने से ही भारत सरकार कला और संस्कृति के क्षेत्रों को प्रायोजित करने और संरक्षण देने की नीति के साथ प्रतिबद्ध रही है (इस विषय से जुड़े हुए कुछ पत्राचार सम्बन्धी अप्रकाशित दस्तावेज़ भी पुस्तक में उद्धृत किए गए हैं)।
नब्बे के दशक की शुरुआत से जारी अर्थव्यवस्था के उदारीकरण और पश्चिमी मीडिया के प्रभावों के मद्देनज़र लेखक ने व्यापारिक क्षेत्र द्वारा संस्कृति के क्षेत्र में सरकार के साथ जुड़ने की आवश्यकता की ओर ध्यान खींचा है। उसका तर्क है कि धरोहर स्थलों के समुचित संरक्षण और भारतीय संस्कृति के रचनात्मक रखरखाव के लिए परियोजनाओं और कार्यक्रमों के प्रायोजित करने का दायित्व निभाने में निजी क्षेत्र सरकार की मदद कर सकता है। पुस्तक इस सम्बन्ध में विचारवान नागरिकों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका को उभारते हुए सुझाव देती है कि देश की सांस्कृतिक धरोहर के प्रबन्धन के लिए भारत सरकार को इस काम में विशेष रूप से पारंगत प्रशासनिक कैडर का गठन करना चाहिए। संस्कृति से सम्बन्धित यह सर्वथा नवीन विश्लेषण ‘सभ्यताओं में संघर्ष’ जैसी बहुप्रचारित धारणाओं को अस्वीकार करते हुए सभ्यताओं के बीच मैत्री का परिदृश्य व्याख्यायित करता है और उसे लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण के व्यापकतर सन्दर्भ से जोड़ देता है। लेखक की दलील है कि इस वैचारिक विन्यास के लिए आनेवाली सहस्राब्दि में गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी की शिक्षाएँ उत्तरोत्तर प्रासंगिक होती चली जाएँगी।
भारतीय सांस्कृतिक इतिहास, राजकीय नीति के विश्लेषण और दार्शनिक विचार-विमर्श के मिश्रण के माध्यम से यह पुस्तक राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर और उसके भारतीय व वैश्विक सन्दर्भों पर एक चुनौतीपूर्ण व नवीन दृष्टि डालती है।
Charitraheen
- Author Name:
Sarat Chandra Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: पुस्तक के संबंध में एक बार शरत की अन्य पुस्तकों के साथ उनकी चरित्रहीन की पांडुलिपि, जो लगभग पाँच सौ पृष्ठों की थी, जल गई। इससे हताश वे अवश्य ही बहुत हुए, परंतु निराश नहीं। अपने असाथारण परिश्रम से उसे पुन: लिखने से समर्थ हुए। प्रस्तुत रचना उनकी बड़ी लगन और साधना से निर्मित वही कलाकृति है। शरतबाबू ने अपनी इस अमर कृति के संबंध में अपने काव्य-मर्मज्ञ मित्र प्रमथ बाबू को लिखा था, “केवल नाम और प्रारंभ को देखकर ही चरित्रहीन मत समझ बैठना। मैं नीतिशास्त्र का सच्चा विद्यार्थी हूँ। नीतिशास्त्र समझता हूँ। कुछ भी हो, राय देना, लेकिन राय देते समय मेरे गंभीर उद्देश्य को याद रखना। मैं जो उलटा-सीधा कलम की नोक पर आया, नहीं लिखता। आरंभ में ही उद्देश्य लेकर चलता हूँ। वह घटना-चक्र में बदला नहीं जाता।'!
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book