Aanand Ki Raah (Hindi)
(0)
Author:
Rajendra TiwariPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
300
₹ 240 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
विश्व में अशांति, कलह, संघर्ष, युद्ध, नकारात्मकता, ईर्ष्या, अहम् की प्रतिस्पर्धा में शांतिविहीन समाज का स्वरूप बन रहा है, जिस कारण अभाव, अपूर्णता, असंतुष्टता पनप रही है। व्यक्ति का आंतरिक सुख व आनंद विलुप्त हो रहा है। प्रश्न यह है कि हमारा मन शांत और संतुष्ट कैसे हो व हम आनंद कैसे प्राप्त करें? प्रस्तुत पुस्तक में विद्वान् लेखक ने स्पष्ट किया है कि अध्यात्म का तात्पर्य किसी धर्म-विशेष से नहीं है, बल्कि इससे व्यक्ति को सही व गलत के भेद को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का रास्ता मिलता है, विवेकशीलता जाग्रत् होती है। आध्यात्मिक चिंतन में द्वंद्व और भेदभाव नहीं है। यह विषय सिर्फ संत-महात्माओं और भक्ति के क्षेत्र से जुडे़ व्यक्तियों के लिए ही नहीं है, बल्कि इसकेमाध्यम से मनन करके हम आनंद की राह खोज सकते हैं। हमें हमारे शिक्षणकाल में उस ज्ञान को परोसा ही नहीं जा रहा है जो आनंद के आभास की राह बताता हो। जीवन का उद्देश्य आनंद में रहने का है। मनुष्य के नैसर्गिक गुणों में द्वंद्व, भ्रम, अवसाद, चिंता, व्यग्रता, असंतोष, असंतुलन, क्लेश आदि ग्राह्य नहीं हैं। प्रसन्न रहना एक स्वाभाविक गुण है। अतः जीवन में संतोष और उल्लास प्राप्त करने के लिए मानवीय गुण तथा आध्यात्मिक-सांस्कृतिक चिंतन प्राप्त करने के लिए प्रसन्न रहिए, आनंदित रहिए। इसी से जीवन में आनंद की राह प्रशस्त होगी। व्यावहारिक जीवन में आनंद का एकमात्र साधन आध्यात्मिक चिंतन है। पुस्तक की प्रस्तावना मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति माननीय श्री जस्टिस आनंद पाठक ने प्रस्तुत की है।
Read moreAbout the Book
विश्व में अशांति, कलह, संघर्ष, युद्ध, नकारात्मकता, ईर्ष्या, अहम् की प्रतिस्पर्धा में शांतिविहीन समाज का स्वरूप बन रहा है, जिस कारण अभाव, अपूर्णता, असंतुष्टता पनप रही है। व्यक्ति का आंतरिक सुख व आनंद विलुप्त हो रहा है। प्रश्न यह है कि हमारा मन शांत और संतुष्ट कैसे हो व हम आनंद कैसे प्राप्त करें?
प्रस्तुत पुस्तक में विद्वान् लेखक ने स्पष्ट किया है कि अध्यात्म का तात्पर्य किसी धर्म-विशेष से नहीं है, बल्कि इससे व्यक्ति को सही व गलत के भेद को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का रास्ता मिलता है, विवेकशीलता जाग्रत् होती है। आध्यात्मिक चिंतन में द्वंद्व और भेदभाव नहीं है। यह विषय सिर्फ संत-महात्माओं और भक्ति के क्षेत्र से जुडे़ व्यक्तियों के लिए ही नहीं है, बल्कि इसकेमाध्यम से मनन करके हम आनंद की राह खोज सकते हैं।
हमें हमारे शिक्षणकाल में उस ज्ञान को परोसा ही नहीं जा रहा है जो आनंद के आभास की राह बताता हो। जीवन का उद्देश्य आनंद में रहने का है। मनुष्य के नैसर्गिक गुणों में द्वंद्व, भ्रम, अवसाद, चिंता, व्यग्रता, असंतोष, असंतुलन, क्लेश आदि ग्राह्य नहीं हैं। प्रसन्न रहना एक स्वाभाविक गुण है। अतः जीवन में संतोष और उल्लास प्राप्त करने के लिए मानवीय गुण तथा आध्यात्मिक-सांस्कृतिक चिंतन प्राप्त करने के लिए प्रसन्न रहिए, आनंदित रहिए। इसी से जीवन में आनंद की राह प्रशस्त होगी। व्यावहारिक जीवन में आनंद का एकमात्र साधन आध्यात्मिक चिंतन है। पुस्तक की प्रस्तावना मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति माननीय श्री जस्टिस आनंद पाठक ने प्रस्तुत की है।
Book Details
-
ISBN9789355212740
-
Pages248
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Sanskriti : Rajya, Kalayen Aur Unse Pare
- Author Name:
Balmeeki Prasad Singh
- Book Type:

-
Description:
संस्कृति भारतीय अनुभव की आत्मा है। भारतीय अनुभव को समझने के लिए आवश्यक है कि उसके मर्म में स्थित भारतीय संस्कृति को समझा जाए। ईसाई युग के अभ्युदय से काफ़ी पहले ही पूर्णत: विकसित हो चुकी इस संस्कृति ने भारतवासियों को (और समस्त भरतवंशियों को भी) एक निश्चित अस्मिता और चरित्र से सम्पन्न किया है। लेखक की मान्यता है कि संस्कृति के इसी अवदान के कारण भारतीय जन-गण इतिहास के कई दौरों और मानव-चेतना में हुए कई परिवर्तनों के बावजूद अपनी अखंडता सुरक्षित रख पाए हैं।
यह पुस्तक भारतीय संस्कृति की एक असाधारण अन्वेषण-यात्रा करते हुए व्याख्यात्मक प्रयास के ज़रिए कई अन्तर्सम्बन्धित विषय-वस्तुओं पर प्रकाश डालती है। इन्हीं में से एक धारणा यह है कि भारत में एक विकसित संस्कृति और विकासमान अर्थव्यवस्था का दुर्लभ संयोग मिलता है। लेखक का दावा है कि बीसवीं सदी के आख़िरी वर्षों में राष्ट्र-समुदाय के बीच राष्ट्रों की हैसियत तय करने में संस्कृति का कारक महत्त्वपूर्ण होता जा रहा है। शीतयुद्धोत्तर विश्व में ‘बाज़ार’ ने ‘सैन्य-शक्ति’ को प्रतिस्थापित कर दिया है और ‘संस्कृति’ अब इन दोनों के महत्त्व को चुनौती दे रही है। लेखक ने कला और संस्कृति के साथ भारतीय राज्य की अन्योन्यक्रिया की जाँच-पड़ताल ऐतिहासिक ही नहीं, समकालीन दृष्टिकोण से भी की है। उनकी मान्यता है कि जवाहरलाल नेहरू और मौलाना आज़ाद के ज़माने से ही भारत सरकार कला और संस्कृति के क्षेत्रों को प्रायोजित करने और संरक्षण देने की नीति के साथ प्रतिबद्ध रही है (इस विषय से जुड़े हुए कुछ पत्राचार सम्बन्धी अप्रकाशित दस्तावेज़ भी पुस्तक में उद्धृत किए गए हैं)।
नब्बे के दशक की शुरुआत से जारी अर्थव्यवस्था के उदारीकरण और पश्चिमी मीडिया के प्रभावों के मद्देनज़र लेखक ने व्यापारिक क्षेत्र द्वारा संस्कृति के क्षेत्र में सरकार के साथ जुड़ने की आवश्यकता की ओर ध्यान खींचा है। उसका तर्क है कि धरोहर स्थलों के समुचित संरक्षण और भारतीय संस्कृति के रचनात्मक रखरखाव के लिए परियोजनाओं और कार्यक्रमों के प्रायोजित करने का दायित्व निभाने में निजी क्षेत्र सरकार की मदद कर सकता है। पुस्तक इस सम्बन्ध में विचारवान नागरिकों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका को उभारते हुए सुझाव देती है कि देश की सांस्कृतिक धरोहर के प्रबन्धन के लिए भारत सरकार को इस काम में विशेष रूप से पारंगत प्रशासनिक कैडर का गठन करना चाहिए। संस्कृति से सम्बन्धित यह सर्वथा नवीन विश्लेषण ‘सभ्यताओं में संघर्ष’ जैसी बहुप्रचारित धारणाओं को अस्वीकार करते हुए सभ्यताओं के बीच मैत्री का परिदृश्य व्याख्यायित करता है और उसे लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण के व्यापकतर सन्दर्भ से जोड़ देता है। लेखक की दलील है कि इस वैचारिक विन्यास के लिए आनेवाली सहस्राब्दि में गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी की शिक्षाएँ उत्तरोत्तर प्रासंगिक होती चली जाएँगी।
भारतीय सांस्कृतिक इतिहास, राजकीय नीति के विश्लेषण और दार्शनिक विचार-विमर्श के मिश्रण के माध्यम से यह पुस्तक राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर और उसके भारतीय व वैश्विक सन्दर्भों पर एक चुनौतीपूर्ण व नवीन दृष्टि डालती है।
Paryavaran Bachane Ke Liye 31 Achchhi-Achchhi Aadaten
- Author Name:
Rohit Mehra (Irs)
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have any description
General English For RAS Mains
- Author Name:
P.C. Kothari
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Pocket English Hindi Dictionary
- Author Name:
Dwarka Prasad
- Book Type:

- Description: आज अंग्रेज़ी का प्रचार-प्रसार पहले से भी अधिक होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में यह आवश्यक हो गया है कि आप कम-से-कम इतनी अंग्रेज़ी तो जानें ही कि अपने काम अंग्रेज़ी में भी चला सकें। अब तो स्कूलों की प्राइमरी कक्षाओं तक में अंग्रेज़ी का प्रचलन होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में आपको एक ऐसे कोश की आवश्यकता पड़ती ही है जिसके माध्यम से आप अपने अन्दर हिन्दी में उठते विचारों को अंग्रेज़ी में भी प्रकट कर सकें। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस कोश में प्रयास किया गया है कि आज की प्रचलित हिन्दी का अगर आपको अंग्रेज़ी में अनुवाद करना हो तो आप आसानी से अपना मनचाहा अंग्रेज़ी शब्द इसमें पा जाएँ। अगर आप अहिन्दी भाषी हों और अंग्रेज़ी से अधिक परिचित हों तो हिन्दी पढ़ते हुए अगर कहीं कठिनाई हो तो इस कोश में आपको अपना वांछित अंग्रेज़ी अर्थ आसानी से मिल जाएगा। शब्दों के चुनाव में हमने इस बात का भी ध्यान रखा है कि यह स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों के अलावा लेखकों, पत्रकारों, शिक्षकों, दफ़्तरों आदि के लिए भी उपयोगी हो।
Urdu-Hindi-Angreji Tribhashi Kosh
- Author Name:
Badri Nath Kapoor
- Book Type:

-
Description:
आचार्य रामचन्द्र वर्मा कृत ‘उर्दू-हिन्दी-अंग्रेज़ी’ कोश उर्दू और हिन्दी-प्रेमियों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध हुआ है। प्रस्तुत संशोधित-संवर्द्धित संस्करण में पाठकों के अनेक महत्त्वपूर्ण सुझाव भी सम्मिलित किए गए हैं।
इस कोश की विभिन्न उल्लेखनीय विशेषताओं में एक यह कि मुख्य प्रविष्टि के ठीक बाद उसका फ़ारसी लिपि में अंकन किया गया है। यह भी कि इसमें हिन्दी में अर्थ देने के बाद अंग्रेज़ी में भी अर्थ दिया गया है। ऐसी बहुतेरी विशेषताओं के कारण अब इस कोश की उपयोगिता और भी बढ़ गई है।
अनेक नवीन शब्दों के समावेश से समृद्ध इस संस्करण से उर्दू, हिन्दी और अंग्रेज़ी के अध्येता अपने भाषा ज्ञान को और अधिक विस्तार दे सकेंगे। दक्षिण भारत के विभिन्न भाषा-भाषी हिन्दी का अध्ययन करते समय फ़ारसी व अरबी आदि के शब्दों का अर्थबोध प्रायः सहजता से नहीं कर पाते। इस कोश से ऐसी बहुत-सी कठिनाइयों का निवारण सरलतापूर्वक हो सकेगा।
कोश के शब्दों का अर्थ देते समय यह ध्यान रखा गया है कि जहाँ तक हो सके अर्थ ऐसे हों, जिनसे पाठकों को ठीक-ठीक आशय के अलावा यह भी ज्ञात हो सके कि उन शब्दों का मूल क्या है अथवा वे किन शब्दों के परिवर्तित रूप हैं।
यह कोश विद्यार्थियों, अध्यापकों, लेखकों, पत्रकारों और शोधार्थियों के लिए बहुत उपयोगी है।
UPPSC Chiktsa Adhikari Bharti Pariksha Bhag- I Samanya Gyan Homeopathic/Ayurvedic
- Author Name:
Dr. S. K. Bhatnagar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bihar STET Secondary Teacher Eligibility Test
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh
- Book Type:

- Description: Higher Secondary Class (PGT) Paper-II (Class 11 & 12) History 15 Practice Sets Book in Hindi
BPSC Bihar Lok Seva Aayog Samanya Adhyayan (General Studies) Prarambhik Pareeksha 1992 Se 2023 Tak Solved Papers
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bodhi Vriksha Ki Chaaya Mein
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description: धम्मो मैगलमक्किट्ठ अहिन्सा सज्जमोतवो। देवावितं नभ सति जस्स धम्मे सयामणो॥ प्राकृतिक आधिदेविक देवों या नित्यमुक्त ईश्वर का पूज्य स्थान नहीं है। एक सामान्य पुरुष भी अपना चरम विकास करके मनुष्य और देव दोनों का पूज्य बन जाता है। (दश वैकालिक 1-1) यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब धर्म के उत्थान के लिए ईश्वर अपने रूप को रचता है। In each agc since ancient times, I have imposed on myseof the obligation of protecting truth (dharma), when sin destroys truth, I forget my formlessness and take birth.
Deepak Jalana Hi Bhata Rahe
- Author Name:
Ram Kinkar Singh
- Book Type:

- Description: किंकर की कविताओं का यह अद्भुत संकलन अत्यधिक रोचक एवं उपयोगी है। कविताएँ न केवल जीवन का दर्शन प्रस्तुत करती हैं, अपितु प्रेरणादायक भी हैं। जहाँ एक ओर इन कविताओं के माध्यम से विशुद्ध प्रेम का निवेदन है, वहीं दूसरी ओर हार को कभी न स्वीकारने का संकल्प भी है। मनुष्य अपना मार्ग किस प्रकार प्रशस्त करे, इसका विवरण पथिक कविता में सुचारु रूप से किया गया है। कवि ने प्रकृति के माध्यम से ईश्वर के बोध का सजीव प्रस्तुतीकरण प्रकृति और ईश्वर कविता में प्रस्तुत किया है। राम किंकर सिंह की कविताएँ अवसर और परिश्रम के सराहनीय उद्देश्य को लेकर सोचने के लिए प्रेरित करनेवाली हैं। जीवन में हर महत्त्वपूर्ण बिंदु को इस तरह स्पर्श करती हैं, जिससे सभी पल जीवंत हो उठें। —अनिल स्वरूप आई.ए.एस. (अ.प्रा.) पूर्व सचिव, भारत सरकार लेखक और विचारक
Horoscope 2023
- Author Name:
Dr. A. Shanker
- Book Type:

- Description: The effects of twelve Signs (Rāśis) and Planets have been described in various classical books of Astrology. In this small booklet, we have provided the general pattern of Zodiac Signs for the year 2023. This pattern is based on the transition of planets, their daśā and effects on that Rāśi at a particular point of time. Zodiac signs concur special effects. Its portable nature will help the natives born under these sun signs to understand the zodiac characteristics and the impact of these planetary movement on these sun-signs. A general awareness about the characteristics of the different Zodiac signs can give one an advantage on their relations with people around the self (Native). Astrological traits of every zodiac sign are different from each sign, understanding the way their personalities are, can make it easier to understand why people do the things they do and helps in a better understanding of relationships.
Hindi Mein Ashuddhiyan
- Author Name:
Ramesh Chandra Mahrotra
- Book Type:

- Description: मानक हिन्दी इतने बड़े क्षेत्र में और इतनी अधिक जनसंख्या द्वारा व्यवहृत की जा रही है कि उसका एकमेव राष्ट्रीय स्वरूप निर्मित होना और उसका स्थिर रह पाना असम्भव है। कारण दो हैं—एक तो उसके प्रयोक्ताओं पर उनकी मातृबोलियों का व्याघात और दूसरे उनको दी जानेवाली समुचित शिक्षा का अभाव और अशुद्धियाँ (प्रयोगों में अन्तर होने) की सामाजिक पृष्ठभूमि। प्रस्तुत पुस्तक में समूचे हिन्दी क्षेत्र से नमूनार्थ संकलित सामग्री को विश्लेषित करके हज़ारों उदाहरणों के साथ यह स्पष्ट किया गया है कि हिन्दी की बाईस बोलियों के मातृभाषी मानक हिन्दी लिखते समय वर्तनी, व्याकरण और अर्थ से सम्बन्धित किस-किस प्रकार की कुल 44 त्रुटियाँ करते हैं, जिनमें 111 उपत्रुटियाँ अन्तर्भुक्त हैं। इन उपत्रुटियों को सरलतम विधि से केवल आगम (कुल 7), आदेश (कुल 95), और लोप (कुल 9) तीन आधारों पर समझाया गया है। प्रमुखतः उपचारात्मक मूल्य वाली यह पुस्तक हिन्दी को अशुद्धियों से दूर रखना चाहनेवालों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
Uttar Pradesh B.Ed. Sanyukt Pravesh Pariksha 15 Practice Sets Vigyan Varg (UP B.Ed Science Entrance Exam 2023 Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UPSC Nibandh : Useful For UPSC CSE, State PSC and Other Competitive Examinations
- Author Name:
Snehil Tripathi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
SBI PO Prelim Online Bharti Pareeksha Phase-I Prarambhik Pareeksha 15 Practice Sets
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Angreji Raj Aur Hindi Ki Pratibandhit Patrakarita
- Author Name:
Santosh Bhadoria
- Book Type:

- Description: पेशे से प्राध्यापक संतोष भदौरिया ने ब्रिटिश काल के मीडिया पर बेहद महत्वपूर्ण अनुशीलन प्रस्तुत किया है। उनकी किताब पढ़ते हुए आज के पाठक जान सकेंगे कि पराधीन भारत में किस तरह शब्दों पर पहरे बिठा दिए जाते थे। किस तरह पत्रिकाओं को प्रतिबंधित किया जाता था और प्रतिबंधों के बावजूद किस तरह तत्कालीन पत्रकारों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाया और स्वाधीनता संग्राम में हिस्सेदारी के लिए आम जनता को प्रेरित किया। संतोष ने उन अखबारों-पत्रिकाओं के तेवर, रुझान और प्रतिबद्धता का गंभीर अध्ययन किया है, जिन पर ब्रिटिश शासनकाल में प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। क्या आज के नए पत्रकारों को पता है कि 1907 में इलाहाबाद से निकले 'स्वराज साप्ताहिक' के आठ- आठ संपादकों को जेल हुई। एक संपादक जेल जाता तो दूसरा संपादक आता। इसी तरह के कई तथ्यों का पता संतोष भदौरिया की किताब से चलता है। प्रकारान्तर से संतोष की किताब पराधीनता के उस काले दौर में हिंदी पत्रकारिता के संघर्ष का लेखा-जोखा भी है तो वहीं देश की आजादी की लड़ाई में प्रतिबंधित पत्र-पत्रिकाओं के अवदान को भी सामने लाती है। इन कृतियों से आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता के योगदान का भी पता चलता है। संतोष पत्रकारिता के इतिहास के अन्यतम अध्येता और विशेषज्ञ हैं। वे विचारों से प्रगतिशील हैं। उनके साहित्य में सुसंगत इतिहास बोध और इतिहास दृष्टि है, इसी कारण वे मूल्यवान इतिहास रच सके हैं और पाठकों को भी वे अतीत में उतरने का मौका देते हैं। पत्रकारिता के इतिहास के विद्यार्थियों को संतोष से यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि तरह-तरह की किंवदंतियों के घटाटोप को पार कर कैसे तथ्यों और प्रामाणिक सूचनाओं पर आधारित अनुशीलन किया जाता है। - महाश्वेता देवी
Reetikaleen Sahitya Kosh
- Author Name:
Vijaypal Singh
- Book Type:

-
Description:
तीन वर्षों के अथक परिश्रम के उपरांत तैयार किया गया डॉ. विजयपाल सिंह का महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है–‘रीतिकालीन साहित्य कोश’। हिंदी में अद्यावधि समीक्षकों को लेकर तैयार किया गया एक दुर्लभ कोश!
प्रस्तुत कोश के अंतर्गत रीतिकालीन काव्य की प्रवृत्तियों, काव्यगत विशेषताओं पर विस्तार से विचार किया गया है।
शृंगार, नायिका भेद, विभिन्न रस, लक्ष्य एवं लक्षणग्रंथ, रीतिबद्ध, रीतिमुक्त, रीतिसिद्ध काव्य, प्रबंध मुक्तक, भाषा, शैली, अलंकार, पिंगल, शास्त्रीय शब्द संपत्ति, भक्ति, धर्म, नीति, विभिन्न संप्रदाय, साहित्यशास्त्र के आचार्य तथा शब्दकोश कला आदि अनेक विषयों से शब्द लेकर सभी दृष्टियों से इस कोश को ज्ञानवर्द्धक तथा उपयोगी बनाने के साथ-साथ लेखक ने रीतिकाल के विभिन्न पक्षों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला है।
‘रीतिकालीन साहित्य कोश’ शोध छात्रों, अध्येताओं के लिए एक अनिवार्य ग्रंथ है ।
Puratan Vigyan (Hindi)
- Author Name:
Pramod Bhargava
- Book Type:

- Description: भारतीय संस्कृति के दो विलक्षण पहलू हैं। एक, धर्म एवं अध्यात्म और दूसरा, आध्यत्मिक विज्ञान। विडंबना यह रही कि इन्हें वर्गीकृत करके परिभाषित नहीं किया गया। मिथक रूपी विधा ने इन्हें और जटिल बना दिया। लेकिन इसकी चिरंतरता और सफलता यह रही कि इसके तीनों रूप श्रुति और वाचन में सरलता के कारण आज अपने मूल रूप में सुरक्षित हैं। इनके रहस्यों को तकनीक के उत्तरोत्तर विकास ने प्रामाणिक साक्ष्यों में बदल दिया। अतएव नासा ने रामसेतु और समुद्र विज्ञानियों ने द्वारका व श्रीलंका के राम-रावण युद्ध में क्षतिग्रस्त हुए अवशेषों को खोज निकाला। सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने रामायण और महाभारत में उल्लिखित तिथियों की प्रामाणिकता सिद्ध कर दी। बहरहाल विज्ञान की अनेक उपलब्धियों के सूत्र हमारे धर्म ग्रंथों में यत्र-तत्र-सर्वत्र बिखरे पडे़ हैं। इस पुस्तक में इसी सनातन ज्ञान को चिरंतन बनाने की एक समन्वयवादी वैज्ञानिक पहल है। इसमें दिए अध्याय—‘हवा का भोजन कर जीवित रहीं अहल्या’, ‘बालक ध्रुव के तारा बनने का विज्ञान’, ‘हनुमान के उड़ने का विज्ञान’, ‘चौरासी लाख योनियों का विज्ञान’, ‘सूर्यरथ के एक चक्रीय होने का विज्ञान’, ‘कुंभ पर्व में स्नान का विज्ञान’, ‘तैरनेवाले पत्थरों का विज्ञान’, ‘भ्रूण प्रत्यारोपण से जनमे थे बलराम’, ‘रामायणों में विज्ञान’, ‘प्राचीन भारत में टीकाकरण’ एवं ‘प्राचीन मंदिरों में विज्ञान’ पुरातन विज्ञान की महत्ता को सिद्ध कर भारतीय ज्ञान चेतना का दिग्दर्शन कराते हैं।
BPSC (Bihar Public Service Commission) Main Exam Solved Papers Paper I & Paper II 67th to 48th Combined Exams
- Author Name:
IAS (AIR-49) Dr. Ranjeet Kumar Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
CTET/TETS ENGLISH LANGUAGE & PEDAGOGY PAPERS–I & II
- Author Name:
Dharmesh Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book